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किशन गंगा और रातले हाइड्रो प्रोजेक्ट
विश्व बैंक ने दी भारत को पावर प्रोजेक्ट बनाने की इजाजत

सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के मध्यस्थ विश्व बैंक ने कहा है कि भारत को संधि के तहत पश्चिमी नदियों पर पनबिजली परियोजना बनाने की इजाज़त है। विश्व बैंक ने एक फैक्टशीट जारी कर स्पष्ट किया है कि इस संधि के तहत भारत पश्चिमी नदियों पर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का काम शुरू कर सकता है और इस पर पाकिस्तान किसी भी तरह का आक्षेप नहीं लगा सकता है। पाकिस्तान को जम्मू कश्मीर में प्रस्तावित किशनगंगा और रातले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के डिजाइन पर आपत्ति थी और पिछले साल उसने विश्व बैंक में शिकायत की थी। उसकी माँग थी कि 57 वर्ष पुरानी जल संधि में मध्यस्थ विश्व बैंक इन चिंताओं के समाधान के लिए मध्यस्थता अदालत गठित करे। विश्व बैंक का कहना है कि हमने दोनों देशों के बीच विवाद समाधान के लिए काम किया है।
बातचीत की समाप्ति सद्भावनापूर्ण माहौल में हुई, दोनों पक्ष बातचीत आगे जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगले दौर की बातचीत वाशिंगटन में सितंबर में होगी।
300 मेगावॉट का किशनगंगा प्रोजेक्ट झेलम और 850 मेगावॉट का रातले चिनाब पर बनेगा।
    पानी के बंटवारे पर भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि पर 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तख़त किए थे।
छह नदियाँ इस समझौते में शामिल हैं। तीन पूर्वी नदियों व्यास, रावी और सतलुज का नियंत्रण भारत, जबकि तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया है।