Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

फेल नहीं करने की नीति खत्म

र्थियों को फेल नहीं करने की नीति को खत्म करने को मंजूरी दी है। परीक्षा में फेल न करने की नीति आरटीई कानून के तहत 1 अप्रैल 2010 को लागू की गई थी। मकसद था 6 से 14 साल के बीच की उम्र का हर बच्चा स्कूल में पढ़ाई करे। देश में ज्यादा से ज्यादा बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा पूरी हो। बच्चे परीक्षा के मानसिक दबाव से मुक्त रहें। दरअसल सरकार ने मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। इसमें राज्यों को अधिकार दिया जाएगा कि वे  सत्र के अंत में होने वाली परीक्षा में कक्षा 5वीं और 8वीं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने वाले छात्रों को अनुत्तीर्ण कर सकें। ऐसा करने से पहले छात्रों को परीक्षा का एक और मौका दिया जाएगा। यह विधेयक मंजूरी के लिए संसद म
पेश किया जाएगा। अभी शिक्षा के अधिकार अधिनियम के मौजूदा प्रावधान के तहत छात्र परीक्षा में पास हुए बिना भी आठवीं कक्षा तक बढ़ते जाते हैं।
ज्ञात रहे कि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हाल ही में कहा था कि 25 राज्यों ने इस नीति को समाप्त करने की सहमति दी है।