| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | संपर्क करें | साईट मेप
You Tube

 
जीएसटी काउंसिल ने दी राहत
 

पूरे भारत में 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी लागू हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश के लोग वस्तु एवं सेवा कर संबंधी जीएसटी काउंसिल की बैठक का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। 6 अक्टूबर, 2017 को जीएसटी काउंसिल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कई अहम् फैसले लिए गए। बहुत सी वस्तुओं पर टैक्स भी कम किया गया। जीएसटी काउंसिल के फैसलों के मुताबिक अब डेढ़ करोड़ रुपये तक टर्न ओवर वाले कारोबारियों को हर महीने के बजाय 3 महीने में जीएसटी रिटर्न भरने की सुविधा दी गई है। एक करोड़ रुपये तक की आमदनी वाले रेस्त्रां को अब केवल 5 फीसदी टैक्स चुकाना होगा। कंपोजीशन स्कीम की सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने का फैसला भी व्यापारियों के लिए बहुत सुकून भरा साबित होगा। इसी तरह जीएसटी काउंसिल ने निर्यातकों की परेशानी को भी समझा और उनके लिए भी राहत भरे फैसले लिए हैं। निर्यातकों के लिए अब ई-वॉलेट बनाया जा रहा है, जिससे निर्यातकों को अपना व्यापार करने में सुविधा होगी। जीएसटी काउंसिल ने आयुर्वेदिक दवाओं, डीजल इंजिन के कलपुर्जों सहित 27 वस्तुओं पर टैक्स कम किए हैं।

यह लगभग तय है कि जीएसटी काउंसिल को आगे भी इस नई टैक्स व्यवस्था के प्रावधानों में कुछ न कुछ फेरबदल करना होंगे। जीएसटी काउंसिल ने छोटे और मंझले कारोबारियों की परेशानियों को दूर करने के लिए कई कदम उठाये हैं। अभी सालाना 75 लाख रुपये तक कारोबार करने वाले ही कंपोजीशन की स्कीम का विकल्प चुन सकते थे। अब यह सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है। कंपोजीशन के अलावा सभी रजिस्टर्ड व्यापारियों के लिए मासिक रिटर्न भरने का नियम था, लेकिन अब 1.5 करोड़ रुपये तक टर्न ओवर वाले भी तिमाही रिटर्न फाइल कर सकेंगे। अभी तक दूसरे राज्यों में माल सप्लाई करने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी था। भले ही उनका सालाना टर्न ओवर 20 लाख रुपये से कम क्यों न हो। अब 20 लाख रुपये तक टर्न ओवर वाले सभी कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन से छूट दे दी गई है। अभी अनरजिस्टर्ड कारोबारी का सामान ले जाने पर ट्रांसपोर्टर्स को रिवर्स चार्ज में टैक्स चुकाना पड़ता था, इसे खत्म कर दिया गया है। अभी निर्यातक अपने रिफंड को लेकर चिंतित थे, लेकिन अब उन्हें 10 अक्टूबर तक जुलाई का और 18 अक्टूबर तक अगस्त का रिफंड मिल जाएगा। अब हर एक्सपोर्टर का ई-वॉलेट बनेगा, जिसमें नोशनल एमाउंट का एडवांस्ड क्रेडिट दिया जाएगा। इससे निर्यातक टैक्स भुगतान कर सकेंगे। बाद में यह उनके रिफंड से ऑफसेट होगा। काउंसिल ने कहा है कि प्रयास किए जाएंगे कि ई-वॉलेट की व्यवस्था अप्रैल- 2018 से लागू कर दी जाए। तब तक एक्सपोर्टर्स को मैन्यूफैक्चरर्स से खरीद पर 0.1 प्रतिशत टैक्स चुकाना होगा। ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप पर अब तक 5 प्रतिशत टैक्स था। इसे अब खत्म कर दिया गया है। अभी गुड्स सप्लाई के एडवांस पर भी जीएसटी का प्रावधान था, अब 1.5 करोड़ रुपये तक टर्न ओवर वालों को इससे छूट मिलेगी। उन्हें सप्लाई के वक्त ही टैक्स चुकाना पड़ेगा।

अभी लीजिंग पर वाहन के बराबर टैक्स लगता है, अब इसमें 35 प्रतिशत छूट मिलेगी। सिर्फ 65 प्रतिशत रकम पर ही टैक्स लगेगा। अब 50 हजार रुपये से ज्यादा की ज्वैलरी खरीदने के लिए पैन जरूरी नहीं होगा। इसके लिए मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में किया गया संशोधन वापस ले लिया गया है। जॉब वर्क पर टैक्स रेट 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। देश में जीएसटी लागू होने के बाद से इसकी व्यापक चर्चा हो रही थी और इसके पक्ष और विपक्ष में अपने-अपने तर्क दिए जा रहे थे। लागू होने के तीन महीने से कुछ ज्यादा वक्त बीतने के बाद जीएसटी काउंसिल ने यह महसूस किया कि कुछ क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश है। काउंसिल ने 6 अक्टूबर को आयोजित अपनी बैठक में इस संबंध में फैसले लिए। बैठक में देश के व्यापारियों और आम नागरिकों को काफी राहत देने का प्रयास किया गया है।