Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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कृषि कैबिनेट
वर्षा की स्थिति को देखते हुये बनायें शॉर्ट टर्म प्लान - मुख्यमंत्री
 

भोपाल, अल्प वर्षा और अवर्षा से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के लिये शॉर्ट-टर्म आपात योजना बनाई जाये। सिंचाई और पेयजल की आवश्यकताओं का आकलन करते हुए जल भंडारण की समुचित तैयारी की जाये। प्रवाहमान जल को रोकने के लिये सभी समुचित उपाय युद्ध स्तर पर किये जायें। इसके लिये कृषि से जुड़े अन्य विभाग, ऊर्जा, उद्यानिकी, सिंचाई और पीएचई समय रहते आवश्यक कार्रवाई करें। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में कृषि कैबिनेट की बैठक में कही।

  • प्रदेश के 378 निकायों में किसान बाजार की होगी स्थापना।
  • किसान बाजार में फसलों के प्राथमिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र बनाये जायेंगे।
  • प्रत्येक विकासखंड में उद्यमियों को प्रशिक्षित करने के लिए खोले जायें कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान सम्मेलनों के प्रति किसानों में जिज्ञासा उत्पन्न की जाए। आय दोगुना करने की तैयारियों का समस्त विवरण दिया जाए। अंतरवर्ती फसल लेने वाले किसानों के ब्यौरे सहित सफलता की कहानी प्रभावशाली तरीके से दी जाए। मृदा कार्ड उपयोग का तरीका बताया जाए। जैविक उत्पादों की प्रमाणिकता और विक्रय के आउटलेट खुलवाए जाएँ। धान खरीदी के साथ ही भावांतर भुगतान योजना के लिए पंजीयन की पुख्ता व्यवस्था हो। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण की छोटी-छोटी इकाईयों से बड़ा काम करने के लिए पंचायत स्तर पर इकाईयों की स्थापना करवाने के निर्देश दिए।

किसानों की कृषि आय में वृद्धि

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 के दौरान कृषि आय 2 लाख 22 हजार 174 करोड़ रुपये रही है। वर्ष 2015-16 के दौरान यह एक लाख 68 हजार 427 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार, गत वर्ष किसानों की कृषि आय में 53 हजार 747 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हुई है। योजना एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2016-17 के दौरान वर्तमान मूल्यों पर वृद्धि दर्ज की है।

राष्ट्रीय उत्पादकता से अधिक हुई 8 फसलों की उत्पादकता

प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बैठक में किसान की आय को दोगुना करने के रोडमैप और विगत 18 माह में क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी दी। डॉ. राजौरा ने बताया कि चना, सोयाबीन, दलहनी फसलें, तिलहनी फसलें, अमरूद, और टमाटर का कुल जैविक क्षेत्र, जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया में देश में प्रदेश प्रथम स्थान पर है।