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स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 कार्यशाला
अधोसंरचना, पेयजल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बने प्रदेश के शहर
 

भोपाल, मध्यप्रदेश के शहर अधोसंरचना, पेयजल, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, सीवेज प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश में अग्रणी बनें। शहरी क्षेत्रों में गरीबों के लिये बेहतर व्यवस्थाएँ की जायें। हमारे शहर ऐसे बनाये जायेंे कि दुनिया के लोग देखने आयें। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 नगरों को स्वच्छ बनाने की पहल’ कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।

  • शहरी पेयजल योजना के द्वारा सभी 378 शहरों में होगी पेयजल आपूर्ति।
  • कचरा प्रबंधन के लिये प्रदेश में बनाये जायेंगे 26 क्लस्टर।
  • शहरी क्षेत्रों में कचरे से बनायी जायेगी जैविक खाद और बिजली।
  • आने वाले तीन सालों में नगरीय विकास पर खर्च होंगे 85 हजार करोड़ रुपये।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के हर शहर की अपनी विशेषता है। शहर की पहचान जनता के गर्व से जुड़ जाये, ऐसे प्रयास करें। पर्यावरण को बचाने के लिये पॉलीथिन के दुरुपयोग के बारे में जनता को जागरूक करें। शहरों में पॉलीथिन के विकल्प तैयार हों। आने वाली पीढ़ी के लिये बेहतर पृथ्वी छोड़कर जायें।

मेरा प्रण-मेरा शहर नंबर एक अभियान फिर से शुरू होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी शहरों में ‘मेरा प्रण-मेरा शहर नंबर एक’ अभियान फिर से शुरू किया जाये। शहरों के हर गली-मोहल्ले में स्वच्छता की अलख जगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस आगामी 17 सितम्बर से यह अभियान शुरू किया जाये। स्वच्छता हमारे जीवन का अंग बनें इसका मिशन चलायें। लोगों को स्वच्छता के लिये जागरूक करें। शहरों में फेरी वालों के लिये हॉकर्स कॉर्नर बनायें। शहरी क्षेत्रों में गरीब फेरीवालों से वसूली की व्यवस्था नहीं चलेगी। सभी नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलायें। नागरिक सेवाओं की व्यवस्थाओं का सरलीकरण किया जाये।