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म्यांमार में रोहिंग्या हिंसा पर
मलाला ने सू की से किया निंदा का आग्रह
     

पाकिस्तान में शिक्षा के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई ने शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित आंग सान सू की से रोहिंग्या हिंसा पर प्रतिक्रिया माँगी है। उन्होंने कहा कि इस हिंसा की उनके (सू की) द्वारा निंदा किए जाने का विश्व इंतजार कर रहा है। 20 वर्षीय मलाला ने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ शर्मनाक हिंसा की सू की को निंदा करना चाहिये। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या के लोगों को म्यांमार की नागरिकता भी मिलना चाहिए।

समस्या- उत्तर-पश्चिमी राज्य राखिन में 25 अगस्त 2017 को हिंसा भड़क गयी थी, जब रोहिंग्या चरमपंथियों ने दर्जनों पुलिस चौकियों पर हमला कर दिया था। इसके बाद हिंसा के शिकार हुए 1 लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुस्लिमों ने भागकर पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरण ले ली है। पश्चिमी देश रोहिंग्या मुस्लिमों पर लंबे समय से हो रहे इस अत्याचार को लेकर  आंग सान सू के कुछ न बोलने पर उनकी आलोचना भी करते आ रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि 25 अगस्त 2017 से फैली हिंसा के बाद से 87,000 शरणार्थी बांग्लादेश पहुँचे, जिनमें ज्यादातर रोहिंग्या हैं। संघर्ष के नवीनतम दौर के बाद से हजारों मुस्लिम अल्पसंख्यक इस बौद्धबहुल राष्ट्र से भाग कर सीमा पार पहुँच गये हैं। उनकी स्थिति देशविहीन हो गयी है।