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भारत नेट परियोजना
ग्रामीण क्षेत्रों में ‘डिजिटल इंडिया’ को दिया जा रहा है बढ़ावा
 

नई दिल्ली, ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाएँ मुहैया कराने के लिये भारत सरकार द्वारा शुरू की गई ‘भारत नेट’ परियोजना लगातार प्रगति कर रही है। परियोजना के तहत पाँच नवंबर तक की स्थिति में एक लाख तीन हजार 275 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) कनेक्टिविटी की गई है। अब तक लगभग 85 हजार 506 ग्राम पंचायतों में गीगाबाइट पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क (जीपीओएन) उपकरण लगाये जा चुके हैं। वहीं 75 हजार 82 ग्राम पंचायतें ब्रॉडबैंड सेवायें प्रदान करने के लिये तैयार हैं। 

डिजिटल इंडिया सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएँ प्रदान करना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में ग्रामीण भारत में किफायती ब्रॉडबैंड सेवाएँ प्रदान करने के लिए ‘जितना आप उपयोग करेंगे, उतना ही कम भुगतान करेंगे’ के सिद्धांत के साथ एक नई आकर्षक एवं किफायती शुल्क संरचना निर्धारित की गई है। इस शुल्क (टैरिफ) संरचना के उन शुल्क दरों में प्रतिबिम्बित होने की आशा है, जो सेवा प्रदाताओं द्वारा उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा।

प्रखंड (ब्लॉक) और ग्राम पंचायतों के बीच विषम बैंडविड्थ के लिए वार्षिक शुल्क  दरें 10 एमबीपीएस तक के लिए सात सौ रुपये प्रति एमबीपीएस और एक जीबीपीएस के लिए दो सौ रुपये प्रति एमबीपीएस तय की गई हैं।

हालाँकि, प्रखंड और ग्राम पंचायतों के बीच सममितीय बैंडविड्थ के लिए वार्षिक शुल्क दरें 10 एमबीपीएस तक के लिए एक हजार रुपये प्रति एमबीपीएस और सौ एमबीपीएस के लिए पाँच सौ रुपये प्रति एमबीपीएस तय की गई हैं। किसी भी मध्यवर्ती बैंडविड्थ के लिए शुल्क दरों की गणना समानुपातिक आधार पर की जाएगी। इसके अलावा, एकल आवेदन के तहत ही एक हजार ग्राम पंचायतों (जीपी) से ज्यादा और 25 हजार जीपी तक बैंडविड्थ को ले जाने के लिए पाँच से लेकर 25 फीसदी तक की छूट (डिस्काउंट) की पेशकश की गई है।