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एमएसएमई इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव
प्रदेश में उद्योगों के विस्तार के लिए सभी संभागीय मुख्यालय जुड़ेंगे फोर-लेन सड़कों से
इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव से महाकौशल क्षेत्र में आयेगी औद्योगिक क्रांति

कटनी, इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव कटनी में आयोजित होने से महाकौशल क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति आयेगी। मध्यप्रदेश में उद्योगों के विस्तार के लिए सभी संभागीय मुख्यालयों को फोर-लेन सड़कों से जोड़ा जा रहा है। यह बात उद्योग, वाणिज्य और रोज़गार मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कटनी में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग द्वारा आयोजित इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए कही।
महाकौशल को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने केन्द्र शासन को भेजा प्रस्ताव

श्री शुक्ल ने बताया कि महाकौशल में बिजली, पानी एवं खनिज के भण्डार और इन पर आधारित उद्योग लगाने की अपार संभावनाएँ हैं। इनके मद्देनजर राज्य शासन ने जबलपुर, कटनी, सतना, रीवा, बनारस और सोनभद्र तक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है, जिसके जल्द ही मंजूर होने की संभावना है। श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा के गुढ़ में विश्व का सबसे बड़ा 750 मेगावॉट क्षमता का सोलर पॉवर प्लांट तैयार होने जा रहा है। उद्योगों के लिये 24 घंटे बिजली की सुनिश्चितता के साथ पानी की उपलब्धता के लिये नर्मदा बेसिन का पानी गंगा बेसिन में पहुँचाने का काम किया जा रहा है।
हर दो वर्ष में होगा
एम.एस.एम.ई. कॉन्क्लेव

  • कटनी जिले में उद्योगों के लिए तीन हजार एकड़ का भूमि बैंक उपलब्ध।
  • मध्यप्रदेश में हर साल 15 लाख युवाओं का कौशल उन्नयन करने का लक्ष्य।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्यमंत्री श्री संजय पाठक ने उद्योगपतियों का स्वागत करते हुए कटनी के औद्योगिक महत्व पर प्रकाश डाला। श्री पाठक ने कहा कि कटनी में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव विभाग का पहला प्रयास है, जिसे अगले वर्ष वृहद-स्तर पर किया जायेगा। इसके बाद प्रत्येक दो वर्ष में विभाग इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव करेगा। श्री पाठक ने कहा कि कटनी संसाधन सम्पन्न जिला होने से बेस्ट लॉजिस्टिक हब है। रोड, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी यहाँ सुलभ हैं। कुशल श्रमिक, खनिज, बिजली, पानी की उपलब्धता के साथ-साथ यहाँ कोई हस्तक्षेप भी नहीं है। दाल मिल क्षेत्र में कटनी देश में अग्रणी है।
प्रदेश में 87 हजार सूक्ष्म उद्योग पंजीकृत

प्रमुख सचिव श्री व्ही.एल. कांताराव ने बताया कि प्रदेश में सूक्ष्म उद्योगों का ऑनलाइन पंजीयन होने से 87 हजार सूक्ष्म उद्योग पंजीकृत हो चुके हैं। विजन-2018 के तहत मध्यप्रदेश को मेक इन इण्डिया का हब बनाने का प्रयास किया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में यूनिट लगाने पर अन्य यूनिटों की तुलना में दोगुना प्रोत्साहन दिया जायेगा।
हर जिले में होगी एक कंसलटेंट की नियुक्ति

लघु और बड़े उद्योगों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिये हर जिले में एक कंसलटेंट की नियुक्ति की जा रही है। कंसलटेंट, लघु उद्योगों द्वारा तैयार सामग्री बड़े उद्योगों को उपलब्ध करवायेगा। देश का 40 प्रतिशत निर्यात लघु एवं कुटीर उद्योगों से हो रहा है।