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फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में कैरियर के बढ़ रहे हैं अवसर
 

फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में कैरियर की अपार संभावनाएँ हैं, चूँकि अब फार्मेसी एक उद्योग-व्यवसाय की तरह विकसित हो गई है, अतएव इस क्षेत्र में उन युवाओं के लिए सुनहरे अवसर हैं, जिन्हें फार्मेसी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ मैनेजमेंट का भी ज्ञान है।
औषधीय कंपनियों का
व्यापार बढ़ रहा है
गौरतलब है कि भारत की औषधीय कंपनियों का व्यापार दोहरी वैश्विक मंदी के बावजूद लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत, अमेरिका, रूस, जर्मनी, इंग्लैंड और ब्राजील सहित दुनिया के 200 से अधिक देशों को दवाइयों का निर्यात करता है। फार्मेसी दवाइयों से संबंधित ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नई-नई दवाइयों के आविष्कार से लेकर उनकी गुणवत्ता, रख-रखाव और मात्रा से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। औषधि निर्माण का कार्य अत्यंत प्राचीनकाल से चला आ रहा है। यह कार्य प्रशिक्षित और कुशल व्यक्तियों द्वारा ही किया जा सकता है। इस कार्य की माँग हमेशा से बनी हुई है।
आधुनिक दवा उद्योग
लगभग सौ वर्ष पुराना है
आधुनिक दवा उद्योग, जिसका बड़ा हिस्सा एलोपैथिक दवाओं का है, लगभग 100 वर्ष पुराना है। इस दवा उद्योग के विस्तार की काफी संभावनाएँ हैं। भारत सरकार ने 1948 में निर्मित फार्मेसी कानून के तहत भारतीय फार्मेसी काउंसिल का गठन किया है, जो एक वैधानिक संस्था है। यह काउंसिल फार्मासिस्टों के प्रशिक्षण के लिए न्यूनतम स्तर तय करती है, जो पूरे देश में एक समान रूप से लागू होता है। फार्मेसी, स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें औषधि या दवा के आविष्कार, उत्पादन, विकास एवं वितरण संबंधी कार्यों की देखभाल की जाती है। इस व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति चिकित्सक, दंत चिकित्सक या पशु चिकित्सकों द्वारा सुझाई गई दवाएँ लोगों को देते हैं। दवा, मरहम-पट्टी या स्वास्थ्य संबंधी सामग्रियों को बेचने का कार्य भी इन्हीं के जिम्मे होता है। अस्पतालों के अन्दर भी फार्मेसी वालों की भूमिका महत्वपूर्ण है। नुस्खे के आधार पर खास रोगों के लिए खास दवा तैयार करना, प्रत्येक रोगी को दी जा रही दवा-प्रणाली की निगरानी करना, दवा की उपलब्धता बनाए रखना, मेडिकल एवं फार्मेसी के इंटर्नस, नर्स तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को दवा-संबंधी जानकारी देना इत्यादि कुछ विशिष्ट कार्य ऐसे हैं, जो फार्मेसी क्षेत्र से जुड़ा व्यक्ति ही कर सकता है।
वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम फार्मासिस्ट चाहिये
औषधीय उद्योग में प्रतिवर्ष परिवर्तन आ रहे हैं। नए गतिविधि क्षेत्र जैसे कि अनुबंध शोध, क्लीनिकल ट्रायल्स, नई औषधियों का विकास, नई औषधि डिलीवरी प्रणालियाँ आदि उभरकर सामने आई हैं। फलस्वरूप फॉर्मेसी में विभिन्न विषय क्षेत्रों में स्नातकोत्तर तथा डॉक्टरेट डिग्री जैसी उच्चतर योग्यताओं की माँग बढ़ी है। अब औषधीय कंपनियों को ऐसे विशेषज्ञ व्यावसायिकों की आवश्यकता है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों। विशेषज्ञता के इस युग में औषधियों का निर्माण अब चिकित्सक की जगह फार्मासिस्ट का कार्य हो गया है। एक कुशल फार्मासिस्ट को दवा बनाते समय यह जानकारी रखनी पड़ती है कि अमुक औषधि के निर्माण में क्या-क्या और कितनी-कितनी मात्रा मिलानी चाहिए। अस्पतालों में फार्मासिस्ट का काम डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएँ तैयार कर मरीजों को देने का भी होता है। उसे मरीजों को यह भी समझाना होता है कि कौन-सी दवा उपयोग करते समय क्या-क्या सावधानियाँ बरती जानी चाहिए, दवा कब और कैसे ली जाए इत्यादि। दवा तथा दवा बनाने वाली सामग्रियों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जा सकता है, यह भी एक फार्मासिस्ट का ही कार्य क्षेत्र होता है। फार्मेसी को अपना पेशा बनाने के इच्छुक छात्रों की जीव विज्ञान में विशेष रुचि होनी चाहिए, ताकि वे यह समझ सकें कि उपयुक्त दवा शरीर के किस हिस्से पर असर करेगी और कैसे? उसे जीव विज्ञान के साथ-साथ रसायन शास्त्र में भी पारंगत होना चाहिए।
चिकित्सकों तथा केमिस्टों के माध्यम से होता है औषधीय विपणन
औषधीय विपणन कार्य अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के विपणन से सर्वथा भिन्न प्रकृति का होता है। औषधीय क्षेत्र में विपणन का कार्य चिकित्सकों तथा केमिस्टों के माध्यम से किया जाता है। अतः यह काम काफी चुनौतीपूर्ण है और इसमें विशेष कौशल तथा प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, क्योंकि एक तरफ उन्हें उच्च प्रशिक्षित चिकित्सकों से तथा दूसरी ओर दवा व्यापारियों से निरंतर संपर्क करना होता है। यह एक सतत् व्यावसायिक क्षेत्र है तथा इस क्षेत्र में सदैव रोज़गार के अवसर उपलब्ध रहते हैं। फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में कैरियर बनाने हेतु फार्मेसी में स्नातक या स्नातकोत्तर  होना आवश्यक है। फार्मेसी मैनेजमेंट की पढ़ाई लाभप्रद है। स्नातक पाठ्यक्रम हेतु विज्ञान विषयों से बारहवीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम हेतु फार्मेसी या बायोलॉजी से जुड़ी कोई डिग्री होनी जरूरी है। इस क्षेत्र के स्नातकों के लिए दवा उद्योगों और सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में उपलब्ध कैरियर के अवसर इस प्रकार हैं-
औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर)
के रूप में कैरियर
दवाओं का न केवल प्रभावी होना अपेक्षित होता है बल्कि वह सुरक्षित और गुणवत्ता आश्वासन से परिपूर्ण भी होनी चाहिए। सुरक्षा, गुणवत्ता तथा प्रभावोत्पा-दकता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दवाइयों के निर्माण से बिक्री तक का संपूर्ण औषधीय परिदृश्य केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों के द्वारा लाइसेंसिंग और निरीक्षण प्रक्रिया के माध्यम से विनियमित किया जाता है। औषधीय स्नातक सरकारी सेवा में औषधि निरीक्षक के रूप में सामान्यतः लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं।
केमिस्ट के रूप में कैरियर
विनिर्माण केमिस्ट के सक्रिय निर्देशन तथा व्यक्तिगत पर्यवेक्षण में दवाइयों का निर्माण किया जाता है। औषधियों के विनिर्माण कार्य की देखरेख से जुड़ा यह रोज़गार बहुत ही रोचक और जिम्मेदारीपूर्ण है। विनिर्माण केमिस्ट के लिए वर्क्स मैनेजर या फैक्टरी प्रबंधक जैसे सर्वोच्च पदों पर पदोन्नति की अपार संभावनाएँ होती हैं।
गुणवत्ता नियंत्रक (क्वालिटी कंट्रोलर)
केमिस्ट के रूप में कैरियर
राष्ट्रीय या अन्य स्वीकृत औषध संग्रह में विनिर्दिष्ट मानदंडों के अनुरूप औषधीय उत्पादों की गुणवत्ता हेतु उत्पादों के नमूनों की जाँच का कार्य किया जाता है। स्नातक और साथ में औषधियों के विश्लेषण तथा अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन में अभिरुचि रखने वालों के लिए इस क्षेत्र में अच्छे अवसर हैं।
अस्पताल फार्मासिस्ट
के रूप में कैरियर
अस्पतालों में फार्मासिस्टों का कामकाज बहुत व्यापक होता है और वे दवाइयों की खरीद से लेकर, दवाइयों का रोगियों में वितरण तक का कार्य संभालते हैं। संक्षेप में कहा जाए तो वे अस्पतालों में औषधि प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं। हालांकि औषधि वितरण के कार्य के लिए कानूनी तौर पर फार्मेसी में डिप्लोमा की योग्यता पर्याप्त है, लेकिन सरकारी क्षेत्र एवं कार्पोरेट अस्पतालों में सेवा क्षेत्र में क्रय व्यवस्था में फार्मेसी में डिग्री को वरीयता दी जाती है।
सरकारी विश्लेषक
के रूप में कैरियर
विनिर्माण इकाइयों के अथवा खुदरा औषधि भंडार से लिए गए औषधियों के नमूनों की सरकारी औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जाँच की जाती है। स्नातक फार्मासिस्ट इन सरकारी प्रयोगशालाओं में सरकारी विश्लेषक के रूप में कार्य करते हैं। इन फार्मासिस्टों को सरकारी विश्लेषक या मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में दवाओं के परीक्षण से संबंधित प्रशिक्षण लेना आवश्यक होता है।
फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट एवं टेक्नोलॉजी के विभिन्न कोर्स संचालित करने वाले प्रमुख विश्वविद्यालय/संस्थान इस प्रकार हैं-
  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर।
  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल।
   जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर।
   डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर।
   विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन।
  इंस्टीट्यूट ऑफ फॉर्मा एंड हेल्थकेयर मार्केटिंग, नई दिल्ली।
   महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक।
  दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
  नर्सी मुन्जी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई।
  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉर्मास्युटिकल मार्केटिंग, लखनऊ।
  पोद्दार मैनेजमेंट एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, जयपुर।
श्रीमती मीना भंडारी
(लेखिका सुप्रसिद्ध कैरियर काउंसलर हैं)