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मौसमी सब्जियों की निर्जलीकरण इकाई से महिलायें प्रारंभ कर सकती हैं स्वरोज़गार
 

  संतुलित आहार में साग-सब्जियों का महत्वपूर्ण योगदान है, यह भोजन के पाचन तथा पाचन क्रिया में निर्मित अम्लों को निष्क्रिय करने में सहायक होती हैं। सब्जियों से हमें विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण जैसे कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम तथा रेशे प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं। प्रति व्यक्ति को 280 ग्राम सब्जियों का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए, लेकिन हमारे देश में इसकी उपलब्धता कुल 140 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन है।
भारत में सब्जियों का उत्पादन
भारत में 175 प्रकार की सब्जियाँ उगाई जाती हैं, जिनमें पत्तेदार सब्जियाँ 42 तथा जड़ वाली 41 प्रकार की सम्मिलित हैं। विश्व स्तर पर भारत सब्जियों के उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है, तथा 13 प्रतिशत भागीदारी निभाता है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार वर्ष 2015-2016 में भारत में सब्जियों का कुल उत्पादन 166608.16 हजार टन, 9574.38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से प्राप्त हुआ, जबकि मध्यप्रदेश में सब्जियों का उत्पादन 14797.74 हजार टन, 703.39 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल से प्राप्त हुआ। भारत में कुल उत्पादित सब्जियों में से आलू का उत्पादन 29 प्रतिशत, बैंगन 9 प्रतिशत, टमाटर 8 प्रतिशत, प्याज तथा फूल गोभी 6 प्रतिशत, मटर 2 प्रतिशत, भिण्डी 4 प्रतिशत तथा अन्य सब्जियों के उत्पादन का योगदान है।
अनुसंधानों से पता चला कि 20-30 प्रतिशत तक सब्जियां खेत से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के दौरान खराब हो जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में सब्जियों का परिरक्षण ही एक श्रेष्ठ उपाय है। जिससे सब्जियों को ज्यों का त्यों या अन्य पदार्थों में परिवर्तित कर लम्बे समय तक बिना पौष्टिक नुकसान के भण्डारित करके रख सकते हैं तथा बेमौसम में इन सब्जियों का उपयोग करके भोजन के उचित पोषण मान को बनाए रखा जा सकता है।
परिरक्षण
सब्जी परिरक्षण, खाद्य प्रौद्योगिकी की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत सब्जियों के प्रसंस्करण एवं परिरक्षण करके परिवहन तकनीकी हृास को कम किया जाता है। परिरक्षण का विकास व विस्तार सब्जी उत्पादकों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य दिलवाने के लिए, उपभोक्ताओं को सालभर सब्जियाँ उपलब्ध कराने के लिए, संतुलित आहार पोषण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए, सैनिकों की खाद्य पूर्ति के लिए, विदेशों को निर्यात करने के लिए, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं के रोज़गार के अवसर प्रदान करने के लिए आवश्यक है।
परिरक्षण का मुख्य उद्देश्य उन सूक्ष्म जीवाणु तथा एन्जाइम को नष्ट करना या उनकी गतिविधियों को रोकना है, जो सब्जियों में एक निश्चित समय के पश्चात् रंग एवं स्वाद बदलने में सहायक होते हैं।
सब्जियों का निर्जलीकरण
निर्जलीकरण सब्जियों के परिरक्षण की सबसे प्राचीन एवं महत्वपूर्ण विधि है। सब्जियों में 80-90 प्रतिशत तक जल रहता है। सब्जियों से पूर्ण नियंत्रण में जल के अंश को अलग कर देना निर्जलीकरण कहलाता है। निर्जलीकरण का मुख्य उद्देश्य सब्जियों से उस सीमा तक जल को हटाना है, जहां पर सूक्ष्मजीव जीवित न रहे, जो सब्जियों के हृास में सहायक होते हैं। निर्जलीकरण से सब्जी के कुल ठोस पदार्थ की सांद्रता बढ़ जाती है जबकि भार एवं मात्रा कम हो जाती है। लगभग सभी सब्जियों को सुखाया जा सकता है। निर्जलित उत्पाद पकने पर पुनः शोषित हो जाते हैं इसलिए सभी निर्जलित उत्पादों का उपयोग, स्वाद एवं खुशबू में किसी परिवर्तन के बिना सब्जी बनाने में कर सकते हैं।
निर्जलीकरण की विधि
सब्जियों को विभिन्न विधियों से निर्जलीकृत कर सकते हैं, जैसे धूप में सुखाना- इस विधि में सब्जियों को धूप में सुखाया जाता है। यह विधि प्राकृतिक वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें ताप, वायुवेग तथा आर्द्रता नियंत्रित नहीं रहती है। यह विधि सस्ती तथा सरल है। इसमें सब्जियों को सुखाने के लिए किसी उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। घरों में लघु पैमाने पर सब्जियों को सुखाने के लिए इस विधि का उपयोग किया जाता है। सौर शोषक में सब्जियों को सुखाने से रंग में परिवर्तन एवं पोषक गुणों का हृास कम होता है। धूप में सुखाई गई सब्जियों में पोषक गुणों का हृास अधिक होता है, अपेक्षाकृत ड्रायर में सुखाई गई सब्जियों के।
हिम शुष्कन
हिम शुष्कन से तात्पर्य, खाद्य पदार्थों को हिमीकरण करके सुखाना है अर्थात् सब्जियों के अव्यवस्थित जल को कम तापक्रम द्वारा बर्फ में परिवर्तित करना और बर्फ के रूप से ही उसको वाष्प के रूप में परिवर्तित कर अलग करने की क्रिया को हिम शुष्कन कहते हैं। हिम शुष्कन सब्जियों में श्रेष्ठ पुनर्निर्माण उनके न सिकुड़ने, कोमलता एवं आयतन वृद्धि के कारण होता है। हिम शुष्कित सब्जियां अधिक गुणकारी, स्वादिष्ट तथा सुगंधित होती हैं, अपेक्षाकृत अन्य निर्जलीकृत सब्जियों के। मटर, पालक आदि को हिमीकरण द्वारा निर्जलीकृत करते हैं ।
सब्जियों के निर्जलीकृत का रेखाचित्र
सब्जियों का चुनाव

धोना, छीलना एवं काटना

ब्लीचिंग (4-8 मिनट तक)गंधक के घोल में भिगोकर रखना
(8-10 मिनट तक 0.1-0.25 प्रतिशत पोटेशियम मेटाबाई सल्फाइट का घोल)

सुखाना (धूप/छांव/शोषक, शोषक का तापक्रम 60-70 डिग्री सें.ग्रे. 8-10 घंटे तक)
सुखाने की अवस्था का परीक्षण (नमी कम से कम 7-9 प्रतिशत)
पैकिंग (वायु तथा नमी रोधक पन्नी में)
भंडारण (स्वच्छ व साफ हवादार कक्ष)
सब्जियों का विवर्णीकरण
सब्जियों के निर्जलीकरण में विवर्णीकरण एक आवश्यक क्रिया है। सब्जियों को गंधक के लवण जैसे पोटेशियम मेटा बाई सल्फाइट, सोडियम मेटाबाई सल्फाइट आदि के घोल में उचित समय तक डुबोया जाता है, जिससे कि सब्जियों में गंधक का अवशोषण हो सके इसे सल्फिटिंग कहते हैं। इस प्रक्रिया से सब्जियों में रंग विद्यमान रहता है। इसके बाद सुखाया जाता है।
अदरक
अदरक को सुखाने में अन्य सब्जियों की अपेक्षा कुछ भिन्नता होती है, इसे धूप या शोषक में सुखा सकते हैं। अच्छी तरह विकसित अदरक को पानी में भीगोकर 24 घंटे रखें। इसके बाद अदरक को छील कर इसे 2 प्रतिशत चूने के घोल में 24 घंटे भिगोकर रखें, अदरक को चूने के पानी से निकालकर आंशिक रूप से सुखा लें। 12 घंटे तक गंधक का धुआँ देने के पश्चात् अदरक को 600क् ताप पर सुखाएँ, सूखने में 3-4 घंटे लगते हैं। अदरक को सुखाने पर सोठ 4:1 के अनुपात में तैयार होती है। निर्जलीकरण के लिए अदरक की क्र-41 तथा यमुना सफेद-3 किस्में उपयुक्त हैं।
प्याज
सफेद प्याज, जो कि अधिक तीखी तथा जिसमें सूखने पर अधिक सूखा पदार्थ मिलता है, मुख्य रूप से निर्जलीकृत की जाती है। बम्बई सफेद, पूसा व्हाइट राउण्ड तथा उदयपुर-102 किस्में सुखाने के लिए सर्वोत्तम हैं। प्याज की ऊपर की पत्तियाँ, ऊपर का नुकीला भाग तथा नीचे जड़ को अलग कर लें तथा धोकर इसके 0.25 सें.मी. मोटे टुकड़े करके 10 मिनिट तक 5 प्रतिशत नमक के घोल में रखें। भीगे प्याज के इन टुकड़ों को 5-7 किलो प्रति वर्ग मीटर फैलाकर 60-650क् तापक्रम पर सुखाएँ। सुखाने में 12 घंटे लगते हैं, तथा सूखने पर सूखे पदार्थ का अनुपात 10:1 होता है।
पालक
रोग एवं कीड़े मुक्त पालक की पत्तियों को अच्छे से धो लें, 5 मिनट तक वाष्प में विवर्णीकरण कर, 4-5 कि.ग्रा. प्रति वर्ग मीटर में फैलाकर 60-620क् पर सुखाएँ। इसे सूखने में 7-8 घंटे लगते हैं, सूखे पदार्थ का अनुपात 22:1 होता है।
गाजर
पीले किस्म की गाजर को छीलकर व धोकर उसके रेशे अलग कर लेवें। 0.5 सें.मी. टुकड़ों को 2 प्रतिशत नमक के घोल में 2-4 मिनिट तक ब्लीचिंग करें। 5-7 कि.ग्रा. प्रति वर्ग मी. फैलाकर 68-700क् ताप पर सुखाएँ। इसे सूखने में 14-16 घंटे लगते हैं। निर्जलीकृत उत्पाद का अनुपात 18:1 होता है।
मटर
आर्किल मटर की किस्म निर्जलीकरण के लिए उपयुक्त है। मटर को धोकर दाने निकाल लीजिए। दाने को 1-2 मिनट ब्लीचिंग करके 5-10 कि.ग्रा. प्रति वर्ग मी. फैलाकर 620 क् ताप पर सुखाएँ।
लाल मिर्च
मिर्च अधिकांशतः धूप में ही सुखाई जाती है। अच्छी पकी हुई मिर्च लाल, नारंगी रंग की लेनी चाहिये। जवाहर 283 मिर्च की किस्म सुखाने के लिए उत्तम होती है। सुखाने का तापक्रम 60-680 क् होना चाहिए।
मेथी की भाजी
बड़े पत्तों वाली, कीड़ों व बीमारियों से मुक्त भाजी लें, अच्छी तरह पानी से धोकर मोटे डंठल अलग कर लेवें। 2 प्रतिशत नमक के घोल में 15 सेंकड तक ब्लीचिंग करिये। 4 से 5 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर फैलाकर 60 से 700क् तापक्रम पर या धूप में सुखाएँ।
करेला
पूर्ण विकसित करेले को अच्छे से धो लें, हल्के रूप में लेकर छिलका उतार लें। 0.6 सें.मी. मोटे टुकड़े कर 7 से 8 मिनट तक उबलते पानी में विवर्णीकरण के पश्चात् 66 से 71 डिग्री सें. तापक्रम पर सुखाएँ। सूखने में 7 से 8 घंटे लगते हैं। निर्जलीकृत उत्पाद का अनुपात 16:1 होता है।
बैगन
अच्छे से धोकर 0.6 सें.मी. टुकड़ों को 0.5 प्रतिशत गंधक के घोल में 90 मिनट तक डुबोकर रखें। तत्पश्चात टुकड़ों को घोल से निकाल कर 4.5 मिनट तक विवर्णीकरण करके 50 से 54 डिग्री सें.ग्रे. तापक्रम पर 8 से 9 घंटे तक सुखाएँ। निर्जलीकृत उत्पाद का अनुपात 33:1 होता है।
निर्जलीकरण मेंे सावधानियाँ :
  सदैव उच्च गुणवत्ता वाली सब्जियाँ लें, अच्छे से धोयें तथा सड़ा गला भाग अलग कर लें।
  सब्जियों का रंग खराब होने से बचाने के लिए नमक के घोल में रखें।
   सब्जियों को दुर्गंध से बचाने के लिए उबलते पानी में 2-5 मिनट रखकर ठंडा करें।
  सब्जियों को साफ-सुथरे वातावरण में सुखाएं, जब तक कि सब्जियों की नमी 7-8 प्रतिशत न हो जाए।
   सूखे उत्पाद को वायु व नमी रोधक थैली या टीन के डिब्बे में अच्छे से बंद करके रखें।
वर्ष भर निर्जलीकरण इकाईयों को चलाने के लिए अलग-अलग मौसम में अलग-अलग सब्जियों की आवश्यकता होती है, जैसे कि जनवरी-फरवरी तथा मार्च में फूल गोभी, पत्ता गोभी तथा मटर, मार्च तथा अप्रैल में लहसुन एवं प्याज; मई तथा जून में पुदीना; मीठी नीम; जुलाई,
अगस्त तथा सितम्बर में नमी अधिक होने के कारण सब्जियों के निर्जलीकरण में कठिनाई होती है फिर भी इस दौरान भिण्डी तथा बैगन को सुखा सकते हैं। अक्टूबर, नवम्बर तथा दिसम्बर में पत्तेदार सब्जियां तथा भिण्डी को सुखाकर निर्जलीकरण इकाई को वर्ष भर चला सकते हैं। निर्जलीकृत सब्जियों को बाजार में लाने के लिए, इन्हें अच्छी तरह सुखाकर नमी तथा वायुरोधक बैग में पैकिंग करके बाजार में बिकने के लिए भेंजे। निर्जलीकृत सब्जियों को स्थानीय बाजार में बेचकर अच्छी राशि प्राप्त की जा सकती है तथा बेमौसम में पौष्टिक सब्जियों की पूर्ति कर कुपोषण से बचाव किया जा सकता है। तथा उन जगहों पर आसानी से निर्जलीकृत सब्जियों को बेमौसम में प्राप्त कराया जा सकता है, जहाँ पर इनका उत्पादन नहीं होता है। सब्जियों के निर्जलीकरण की इकाई लगाने से पहले जिला उद्योग केन्द्र तथा नगरनिगम के स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है तथा खाद्य सुरक्षा नियमों का अनुसरण करना जरूरी होता है।
एन्टरप्रेन्योरशिप
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान तथा उद्यानिकी विभाग में विभिन्न सब्जियों तथा फलों के प्रसंस्करण के बारे में वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध है। प्रत्येक जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में भी वैज्ञानिक दल, कृषकों की सहायता के लिये उपलब्ध हैं। सामान्य खाद्य फसलों के अलावा सब्जियों की खेती तथा उत्पाद का प्रसंस्करण एक अमूल्य तकनीक है, जिससे कृषकों को अपनी आमदनी बढ़ाने में सहायता होगी। कृषकों को स्वरोजगार हेतु मार्गदर्शन के लिये म.प्र. शासन तथा कृषि विश्वविद्यालय सदैव तत्पर हैं।
मशीनरी प्रदायकर्ताओं के नाम
   मेर्सस ए.पी.बी. इंजीनियरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, 2, जैसोर रोड कोलकाता
   मेसर्स गन साना प्राइवेट लिमिटेड इण्डस्ट्री, मेनोट ऑफ केडल रोड, मुंबई
  मेसर्स सेन बेरी कंपनी 65/11 रोहतक रोड, नई दिल्ली-1
  मेसर्स माथुर प्लेट लिमिटेड पोस्ट बॉक्स नं. 327, मुंबई
      सेन्ट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, बैरसिया रोड, भोपाल।