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एग्रीकल्चर टॉस्क फोर्स की बैठक
मध्यप्रदेश में भण्डारण क्षमता और प्रोसेसिंग इकाइयाँ बढ़ायी जायेंगी
किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये किये जायेंगे दीर्घकालीन उपाय
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल में एग्रीकल्चर टॉस्क फोर्स की बैठक को संबोधित करते हुये।

मध्यप्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपाय किये जायेंगे। तात्कालिक उपाय से किसानों को राहत पहुँचाने का काम जारी रहेगा। दीर्घकालिक उपाय में भण्डारण क्षमता बढ़ाई जायेगी और अधिकतम प्रोसेसिंग इकाइयाँ लगायी जायेंगी। साथ ही फसलों का मूल्य संवर्धन कर ग्लोबल मार्केट का लाभ लिया जायेगा। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में एग्रीकल्चर टॉस्क फोर्स की बैठक को संबोधित करते हुए कही।

भोपाल, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन में वृद्धि देश में एक कीर्तिमान बना है। इसके साथ किसानों की उपज का मूल्य गिरने की समस्या भी सामने आई है। इसके समाधान की आदर्श व्यवस्था की जायेगी। इसके अंतर्गत ऐसी नीति बनाई जायेगी, जिसमें कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था रहेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पिछले पाँच सालों में खाद्यान्न का उत्पादन दोगुना हो गया है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ा है। बीज प्रतिस्थापन की दर 30 प्रतिशत हो गयी है। खाद के अग्रिम भण्डारण की व्यवस्था की गई है। उत्पादन बढ़ाने के सभी पक्षों पर तेजी से काम किया गया है, जिससे उत्पादन बढ़ा है। उत्पादन बढ़ने के बाद भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने की समस्या सामने आई है। इसके लिये तात्कालिक उपाय किये गये हैं।

कृषि विशेषज्ञों के सुझाव
  • डॉ. अशोक गुलाटी - कृषि उत्पादों के लिये भण्डारण क्षमता 5 से 10 गुना बढ़ायी जाये। इसके लिये निवेश किया जाये। कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिये डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से लिंकेज किया जाये। गुजरात में दुग्ध उत्पादन के लिये चलाये गये ऑपरेशन फ्लड की तरह मध्यप्रदेश में सब्जी उत्पादन के लिये ऑपरेशन वेजीस चलाया जाये।
  • डॉ. पंजाब सिंह- मध्यप्रदेश की समस्या को चुनौती के रूप में लें। फूड प्रोसेसिंग में निवेश के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को रोज़गार दें। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उसकी सुरक्षा के उपायों पर ध्यान दें।
  • श्री प्रशांत अग्रवाल- भण्डारण और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में युवाओं के प्रशिक्षण पर ध्यान दें। प्रशिक्षण की व्यवस्था जिला स्तर पर हो। ग्राम स्तर पर सब्जी मंडियों में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था हो।
  • डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह- कृषि यंत्रों के कस्टम हायरिंग की तरह भण्डारण और प्रोसेसिंग में भी व्यवस्था की जाये। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग और भण्डारण के लिये अधोसरंचना विकसित की जाये।
  • डॉ. आर.के. पाटिल- गाँवों में प्रोसेसिंग की छोटी इकाईयाँ स्थापित की जायें। प्रोसेस्ड फूड के लिये उत्पाद तैयार किये जायें।
अन्य सुझाव
  • िसानों के लिये समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाये। भण्डारण क्षमता बढ़ाई जाये।
  • क्वालिटी फूड पर ध्यान देना चाहिये। जैविक उत्पादों के लिये बेहतर अवसर।
  • भण्डारण क्षमता के लिये राष्ट्रीय संस्थान व्यवस्था करें। किसान, कृषि उत्पादों के मूल्यों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं हों, ऐसी व्यवस्था की जाये।
  • प्याज और टमाटर जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग इकाई जिलों में स्थापित हों।
  • वैश्विक बाजार में निर्यात किये जाने योग्य उत्पाद तैयार करने के संयंत्र स्थापित किये जायें।