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राज्य प्रशासनिक सेवा
 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले दिनों राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा जनता की सेवा का सशक्त माध्यम है। इस सेवा में लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं और लोक सेवाओं के प्रदाय के प्रति सचेत और संवेदनशील बने रहना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के लिये हमेशा उपलब्ध रहें और निर्विकार भाव से उनकी सेवा करें। सेवा तभी हो सकती है, जब सेवाभाव अंतर्मन से उपजे। सेवा कभी भी बलपूर्वक नहीं हो सकती है। सार्वजनिक जीवन में काम करते हुये यह अनुभव होगा कि लोक कल्याण ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री जी ने यह बहुत ही महत्वपूर्ण विचार प्रशिक्षुओं के समक्ष रखे हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा में आने वाले युवाओं के लिये उनकी यह सीख मार्गदर्शक है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर जो भी बातें कही हैं, वह नये प्रशिक्षुओं को सफल प्रशासनिक अधिकारी बनाने में मददगार साबित होंगी। आज समाज में जन-जागरूकता भी काफी बढ़ी है। इसके कारण प्रशासन के लोगों की जवाबदेही भी बढ़ जाती है। यह आवश्यक हो जाता है कि आम जन आकांक्षाओं पर खरे उतर सकें। इसके लिये आवश्यक है कि आप तटस्थता और निष्पक्षता के साथ जन कल्याण को प्राथमिकता दें। यहाँ पर यह भी महत्वपूर्ण है कि आपकी कार्यशैली इस प्रकार की हो कि आपके प्रति एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में समाज में एक विश्वास पैदा हो सके। आम जन यह भरोसा कर सके कि आप पक्षपात और दबाव के बिना कार्य करते हैं। यह विश्वास जब किसी अधिकारी को प्राप्त हो जाता है, तो यहीं से उसकी सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

जब हम एक कल्याणकारी राज्य की बात करते हैं, तो हम देखते हैं कि आज सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की गतिविधियां काफी जटिल हो गई हैं। ऐसी स्थिति में जब एक प्रशासनिक अधिकारी संवेदनशील होकर लोगों के साथ सहानुभूति ही नहीं बल्कि तदानुभूति रखते हुये कार्य करता है, तो उसे सफलता प्राप्त होती है। आज प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिबद्धता पर भी काफी चर्चा होती है। प्रतिबद्धता में मुख्य बात यही है कि अधिकारियों की संविधान के मूल्यों और आदर्शों में प्रतिबद्धता होनी चाहिये।

ऐसे अधिकारी ही जनता में अधिक पसंद किये जाते हैं, जो कि संविधान की मूल भावना को समझकर उसके अनुरूप नीतियों और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करते हैं। यह सवाल भी आज बार-बार उठाया जाता है कि अच्छी-से-अच्छी योजनायें और कार्यक्रम उस समय तक अपना अच्छा प्रभाव या परिणाम नहीं दे सकते हैं, जब तक कि उनका बेहतर क्रियान्वयन न हो सके। इन कार्यक्रमों का सफल क्रियान्वयन प्रशासनिक अधिकारियों की दक्षता और क्षमता पर ही निर्भर करता है। इसके लिये ही 3E, Effectiveness, Economy और Efficiency की बात की जाती है। यह तीनों बाते आपको अधिक लोकप्रिय बनाती हैं।

आज उन अधिकारियों को अधिक बेहतर माना जाता है, जो सरकार के द्वारा तय किये गये कार्यक्रमों को संविधान के अनुरूप समझते हुये बेहतर ढंग से क्रियान्वित करते हैं। एक अच्छे प्रशासनिक अधिकारी की पहचान इसी से होती है कि वह सभी के बीच कितना बेहतर सहयोग एवं समन्वय स्थापित कर सकता है। एक अच्छा प्रशासनिक अधिकारी अंतःक्रिया पर बल देता है। यह अंतःक्रिया जन-प्रतिनिधियों, समाज के विभिन्न सदस्यों और अपने सहयोगियों के बीच आवश्यक होती है, जो कि आपकी समझ को बेहतर एवं व्यावहारिक बनाती है।

आज बहुत से युवा प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिये तैयारी कर रहे हैं। अपनी मेहनत और लगन के कारण उनको विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होगी और वह जल्द ही राज्य प्रशासनिक सेवाओं में कार्य करना प्रारंभ करेंगे। वह सभी यदि अभी से इन विचारों को अपना मूल मंत्र बनायेंगे, तो निश्चित रूप से उन्हें अपना कार्य करने में आसानी होगी। इससे वह एक सफल एवं लोकप्रिय प्रशासनिक अधिकारी बन सकेंगे। आइये इन बातों को अपनी सफलता का मूल मंत्र बनायें।