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समिट में प्रस्तुत स्वास्थ्य नवाचार सभी राज्यों में लागू होंगे
 

इंदौर, चतुर्थ राष्ट्रीय स्वास्थ्य नवाचार समिट में प्रस्तुत नवाचारों को अब हर प्रदेश में लागू किया जायेगा। इन्दौर के ब्रिलियेंट कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय स्वास्थ्य नवाचार समिट के अंतिम दिन भी विभिन्न प्रदेशों के नवाचार प्रस्तुत किये गये। समिट में प्रस्तुत सबसे अधिक नौ नवाचार मध्यप्रदेश द्वारा प्रस्तुत किये गये।

मध्यप्रदेश के नौ नवाचारों में कैंसर कीमोथैरेपी उपचार, डायलिसिस निःशुल्क सुविधा, ई-औषधि, महिला स्वास्थ्य शिविर, स्वास्थ्य संवाद केन्द्र, दस्तक अभियान, एचआर एमआईएस, मानसिक स्वास्थ्य (मनकक्ष) और बांझपन का निःशुल्क उपचार शामिल है।

छत्तीसगढ़ में टी.बी. के मरीजों का डॉट्स पद्धति का उपचार सुनिश्चित करने के लिए निजी दवा विक्रेताओं से टी.बी. की दवा खरीदने वालों की जानकारी एकत्र करने की व्यवस्था की गई है। इससे उन मरीजों तक जाकर उन्हें डॉट्स उपलब्ध करवाई जा सकेगी। टी.बी. मरीजों में कुपोषण की समस्या को हल करने के लिए ‘मुख्यमंत्री क्षय पोषण योजना’ भी शुरू की गई है। इसमें कुपोषित क्षय रोगियों का पोषण स्तर सुधारने के लिये शासकीय सहायता दी जाती है।

प्रसव पूर्व लिंग चयन तथा परीक्षण तकनीकों के माध्यम से गर्भस्थ शिशु का लिंग पता करने एवं बेटी होने की दशा में भ्रूण हत्या करवाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से राजस्थान में ‘मुखबिर योजना’ शुरू की गई। योजना में निजी चिकित्सा संस्थाओं में भ्रूण लिंग परीक्षण की सही सूचना देने वालों को पुरस्कृत किया गया है।

केरल में मेडिको लीगल कोर्ट

केरल शासन के यौन अत्याचारों से पीड़ित महिलाओं के चिकित्सकीय परीक्षण की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिये नियमों में आवश्यक सुधार किया गया है। इसके लिये मेडिको लीगल कोर्ट बनाया गया है तथा परीक्षण के लिये सहमति और प्राथमिक उपचार के मापदण्ड तैयार किये गये हैं।

आंध्रप्रदेश शासन ने ‘स्वास्थ्य विद्या वाहिनी’ शुरू की है। इसमें मेडिकल कॉलेज के एम.बी.बी.एस. के छात्र गाँव में जाकर आंगनवाड़ी केन्द्रों, स्कूलों तथा गृह भेंट के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली, स्वच्छता एवं पोषण आदि की जानकारी नागरिकों को देते हैं। आंध्रप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की साफ-सफाई की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी एक व्यवस्था स्थापित की गई है। इसमें प्रत्येक सरकारी अस्पतालों की साफ-सफाई की रिपोर्ट दिन में 3 बार दी जाती है। पर्यवेक्षक द्वारा साफ-सफाई को श्रेष्ठ, सामान्य एवं असंतोषजनक श्रेणी में प्रतिवेदित किया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर तत्काल आवश्यक कार्यवाही की जाती है। स्वास्थ्य संस्थाओं की स्वच्छता को मुख्यमंत्री द्वारा भी मॉनिटर किया जाता है।

उत्तरप्रदेश द्वारा एक्स-रे जैसे उपयोगी चिकित्सकीय उपकरणों से होने वाले विकरणों से सुरक्षा के लिये किये जा रहे आवश्यक प्रयासों पर आधारित प्रस्तुतीकरण किया गया। मेघालय के दल द्वारा अस्पतालों से प्रतिदिन निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन के विषय में प्रस्तुतीकरण किया गया। अस्पतालों से निकलने वाले द्रव्य अपशिष्ट पदार्थ के सुरक्षित प्रबंधन के लिए मेघालय में विशेष नवाचार अपनाया गया है।

प्रदेश के जिले पुरस्कृत

समिट के अंतिम दिन प्रदेश में ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न जिलों तथा निजी चिकित्सकों की संस्थाओं को उनके योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया।
उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ के क्रियान्वयन में जिला अनूपपुर को प्रथम, रायसेन को द्वितीय तथा डिण्डोरी एवं मण्डला को संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। सामान्य जिलों की श्रेणी में मंदसौर को प्रथम, जबलपुर को द्वितीय तथा सीहोर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।

अभियान में सक्रिय सहयोग के लिए निजी चिकित्सकों की संस्थाओं ए.एम.पी. डॉ. माधुरी चन्द्रा, ओ.जी.एस. डॉ. वन्दना कुन्दरगी, आई.एम.ए. डॉ. आजाद एवं आई.आर.आई.ए. के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। वहीं निजी स्तर पर अभियान में योगदान देने के लिए उच्च प्राथमिकता वाले जिलों की श्रेणी में मण्डला जिला की डॉ. वर्षा आर्य, छतरपुर की डॉ. रेखा अग्रवाल तथा डॉ. रामबरन बुद्धा को सम्मानित किया गया।