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परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध के लिए पहली वैश्विक संधि पर हुआ मतदान

भारत सहित आठ देशों ने नहीं लिया हिस्सा परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध से संबंधित पहली वैश्विक संधि की मंजूरी के लिए संयुक्त राष्ट्र में 120 से अधिक देशों ने मतदान किया, लेकिन भारत, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान समेत आठ अन्य परमाणु संपन्न देशों ने परमाणु हथियार प्रतिबंध के कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज को लेकर इस मतदान से दूरी बनाई। परमाणु अप्रसार के लिए कानूनी तौर पर बाध्यकारी पहली बहुपक्षीय परमाणु हथियार निषेध संधि को लेकर 20 वार्ताओं
122 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया।
जबकि नीदरलैंड्स ने इसके खिलाफ मतदान किया।
सिंगापुर मतदान की प्रक्रिया से बाहर रहा।
का दौर चला। ज्ञात रहे कि परमाणु हथियारों पर रोक के मकसद से इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने के संबंध में इस साल मार्च में इसका मूल सत्र आयोजित हुआ था।
परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन की
शा में पिछले साल अक्टूबर में परमाणु हथियारों पर रोक के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज को लेकर वार्ता हुई थी और इससे संबद्ध संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव पर 120 से अधिक राष्ट्रों ने मतदान किया था। भारत इस प्रस्ताव से दूर रहा था। भारत ने इस प्रस्ताव से दूर रहने के पीछे तर्क दिया था कि ऐसा
संदेह है कि प्रस्तावित सम्मेलन परमाणु अप्रसार पर संधि को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की उम्मीद पर खरा उतरेगा। लेकिन भारत ने परमाणु अप्रसार को लेकर वार्ताएँ शुरू करने का हमेशा समर्थन किया। भारत इस पर कायम था कि जेनेवा में हुई कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट एकमात्र बहुपक्षीय परमाणु अप्रसार वार्ता का मंच है।