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भारतीय संसद में
शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक को मिली मंजूरी

 

भारतीय संसद में 14 मार्च को शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी गई। इसमें युद्ध के बाद पाकिस्तान एवं चीन पलायन कर गए लोगों द्वारा छोड़ी गयी संपत्ति और उत्तराधिकारों के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए हैं।

लोकसभा में शत्रु संपत्ति विधेयक में राज्यसभा में किए गए संशोधनों को मंजूरी प्रदान करते हुए इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। राज्यसभा में यह पहले ही पारित हो चुका है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि किसी सरकार को अपने शत्रु राष्ट्र या उसके नागरिकों की संपत्ति रखने को व्यावसायिक हितों के लिए मंजूरी नहीं देनी चाहिए। शत्रु संपत्ति का अधिकार सरकार के पास होना चाहिए न कि शत्रु देशों के नागरिकों के उत्तराधिकारियों के पास।

  • उच्च सदन ने शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक 2016 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधनों को भी स्वीकार कर लिया।
  • इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार शत्रु संपत्ति के मालिक का कोई उत्तराधिकारी भी यदि भारत लौटता है, तो उसका इस संपत्ति पर कोई दावा नहीं होगा। एक बार कस्टोडियन के अधिकार में जाने के बाद शत्रु संपत्ति पर उत्तराधिकारी का कोई अधिकार नहीं होगा।

ज्ञात रहे कि जब किसी देश के साथ युद्ध होता है, तो उसे शत्रु माना जाता है, और शत्रु संपत्ति विधेयक 2017 को 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के संदर्भ में इसे देखा जा रहा है। इस विधेयक में युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन पलायन कर गये लोगों द्वारा छोड़ी गयी संपत्ति पर उत्तराधिकारों के दावों को रोकने के प्रावधान भी किये गये हैं।