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मानवीय संकट का सामना कर रही है दुनिया : संयुक्त राष्ट्र

 

संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव एवं समन्वयक मानवीय मामले और आकस्मिक सहायता विकास स्टीफन ओ ब्राइन ने कहा है कि वर्ष 1945 में इस वैश्विक संस्था की स्थापना के बाद दुनिया अब तक के सबसे बड़े मानवीय संकट का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दुनिया के चार देशों में दो करोड़ से ज्यादा लोग भुखमरी और अकाल का सामना कर रहे हैं। स्टीफन ओ ब्राइन ने 11 मार्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि साझा और समन्वित वैश्विक प्रयासों के बिना लोग भूख से मर जाएंगे और कई अन्य लोग बीमारी से पीड़ित होंगे। उन्होंने तबाही को रोकने के लिए यमन, दक्षिण सूडान, सोमालिया और पूर्वोत्तर नाइजीरिया में राहत कोष भेजने की अपील की।

ओ ब्राइन ने कहा, सटीक ढंग से कहें तो हमें जुलाई तक 4.4 अरब डॉलर चाहिये। उन्होंने कहा कि अधिक धन नहीं भेजा गया तो बच्चे कुपोषण से कमजोर हो जाएंगे और स्कूल नहीं जा पाएंगे। आर्थिक विकास के लाभ उलट जाएंगे और रोज़गार, भविष्य तथा उम्मीद खो जाएगी। संयुक्त राष्ट्र और खाद्य संगठनों ने अकाल को परिभाषित करते हुए कहा है कि यह वह स्थिति है, जब पाँच साल से कम उम्र के 30 प्रतिशत से अधिक बच्चे सूक्ष्म कुपोषण का शिकार होते हैं।