Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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स्व-सहायता समूहों से सशक्त होती महिलाएं
 

समाज में महिला सशक्तिकरण के माध्यम से परिवर्तन की लहर आई है, जिससे अब समाज का नज़रिया भी बदल रहा है। मध्यप्रदेश ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नया इतिहास बनाया है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत पंडित दीनदयाल अंत्योदय योजना चलाई जा रही है, जिससे एक ओर जहां महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर महिला व्यवसायियों को स्वरोज़गार के लिये प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। स्व- सहायता समूहों में कार्य करते हुये महिलाओं की विभिन्न मुद्दों पर समझ बढ़ी है। अब वह बढ़-चढ़कर ग्राम सभाओं, सामुदायिक मुद्दों और विकास की गतिविधियों में हिस्सेदारी कर रही हैं। स्व-सहायता समूहों के गठन के पूर्व महिलायें जहाँ सिर्फ चौके-चूल्हे तक सीमित थीं, वहीं आज इन समूहों के गठन के उपरान्त वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुई हैं। आज निर्णयों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देने लगी है।

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये राज्य सरकार ने तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम चलाया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समूहों को सामाजिक समानता, न्याय और विकास की गतिविधियों के लिये सशक्त किया जा रहा है, जिससे कि वह शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत में पूर्ण भागीदारी करते हुये महिलाओं के विरुद्ध हिंसा व अपराध को समाप्त कर सकें। इसमें जेंडर स्वास्थ्य, जेंडर सेनिटेशन, जेंडर नेतृत्व क्षमता का विकास और जेंडर आजीविका जैसे कार्यक्रमों को भी जोड़ा गया है। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोज़गार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिये लघु-कुटीर उद्योग, पशुपालन एवं हस्तशिल्प जैसे परंपरागत व्यवसायों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के उपरांत न केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, बल्कि उनके उत्पादों की बिक्री में सहयोग भी प्रदान किया जाता है।

प्रदेश में आजीविका मिशन के तहत करीब 23 लाख परिवारों को 2 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जबकि तेजस्विनी कार्यक्रम में 16 हजार से अधिक स्व-सहायता समूहों में 2 लाख से अधिक महिलायें जुड़ी हैं। इन स्व-सहायता समूहों द्वारा साबुन निर्माण, गुड़, मूंगफली चिक्की निर्माण, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, हथकरघा कार्य, मुर्गीपालन एवं कृषि आधारित विभिन्न कार्य किये जा रहे हैं।

महिला स्व-सहायता समूह सिर्फ ग्रामीण विकास में ही अपना योगदान नहीं दे रहे हैं, बल्कि इनका यह योगदान शहरों के विकास को भी गति दे रहा है। शहरों के विकास का रास्ता भी गाँवों के विकास से ही तय होता है।

प्रदेश के लिये यह गर्व का विषय है कि प्रदेश की 5 हजार से अधिक महिलायें कृषि सामुदायिक स्रोत व्यक्ति के रूप में अन्य राज्यों जैसे हरियाणा, उत्तरप्रदेश व छत्तीसगढ़ में कम लागत की कृषि एवं जैविक कृषि का प्रशिक्षण ग्रामीणों को दे रही हैं।

अब सरकार द्वारा महिलाओं के स्व-सहायता समूहों के फेडरेशन को टेक होम राशन निर्माण की फैक्ट्री चलाने की जिम्मेदारी देने के साथ-साथ उनके उत्पादों की बिक्री के लिये बड़े शहरों में बाजार स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। महिला स्व- सहायता समूहों के फेडरेशन को मिलने वाले 5 करोड़ रुपये तक के लोन की बैंक गारंटी सरकार लेगी और साथ ही राज्य आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित और अन्य स्व-सहायता समूहों द्वारा लिये गये ऋण पर देय ब्याज का तीन प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति सरकार स्वयं करेगी। अब उन्हें कोई स्टाम्प शुल्क नहीं देना होगा।

स्व-सहायता समूहों की सदस्य पूरी मेहनत और लगन से काम करके निर्धनता से उबर कर स्वयं अच्छा जीवन जीने का प्रयास कर रही हैं, वहीं प्रदेश के विकास में भी अपना अमूल्य योगदान दे रहीं हैं। इनके योगदान से आने वाले समय में निश्चित ही प्रदेश के विकास की गति तेज होगी।

नूतन वर्ष की शुभकामनाओं सहित!