Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

 
देशभर में लोकप्रिय हो रहे हैं ग्वालियर में बने बायो टॉयलेट
 

ग्वालियर, मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में इज़ाद किये गये बॉयो-टॉयलेट अब पूरे देश में लोकप्रिय हो गये हैं। देश के अन्य शहरों में शौचालय के इस मॉडल को अपनाने की होड़ मची है। देश-विदेश के नगरीय निकायों के प्रतिनिधि मंडल इस मॉडल को देखने ग्वालियर आ रहे हैं। कम खर्चे में तैयार इन बॉयो-टॉयलेट्स को देखकर सभी दंग रह जाते हैं। पिछले दिनों देश के 50 नगरों से आए दल के सदस्य भी इन बॉयो-टॉयलेट को देखकर अचंभित रह गए। उनके आश्चर्यचकित होने की वजह यह थी कि बॉयो-टॉयलेट के जरिए न केवल कम खर्चे में और वैज्ञानिक तरीके से ह्यूमन वेस्ट का निष्पादन हो रहा है, बल्कि पानी की भी बचत हो रही है।
नवी मुम्बई महानगरपालिका से आए सेनेटरी ऑफीसर श्री दिनेश एवं नई दिल्ली की महा-नगरपालिका के अधिकारी श्री इकबाल सिंह का कहना था कि सार्वजनिक शौचालय में बदबू नहीं होना सबसे बड़ी खासियत है।
स्वच्छ भारत अभियान के अहम हिस्से के रूप में ग्वालियर जिले में बॉयो-टॉयलेट का नवाचार हुआ है। जिला पंचायत ग्वालियर में पदस्थ परियोजना अधिकारी श्री जय सिंह नरवरिया ने बॉयो-टॉयलेट की इस तकनीक को खोजा है। सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गोद लिए गए गाँव जयापुर में भी ग्वालियर के बॉयो-टॉयलेट मॉडल को अपनाया गया है। इसी तरह, ग्वालियर जिले में केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा गोद लिए गए गाँव चीनौर में भी इसी पद्धति से बॉयो-टॉयलेट बनवाए गए हैं।
कम खर्चे में बन जाता है बॉयो-टॉयलेट
बॉयो-टॉयलेट बनाने में उतना ही खर्चा आता है जितना खर्च साधारण शौचालय के निर्माण में आता है। व्यक्तिगत शौचालय 15 हजार रुपये में और 10 सीट का सार्वजनिक शौचालय लगभग 50 हजार रुपये में तैयार हो जाता है। इस तकनीक से ग्वालियर जिले के ग्राम उदयपुर, टेकनपुर, सौजना, चराईडांग, सुरेहला व चीनौर सहित विभिन्न ग्रामों में तीन सौ बॉयो-टॉयलेट बनाए जा चुके हैं, जो सफलतापूर्वक उपयोग हो रहे हैं।