Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

राष्ट्रीय बालरंग समारोह
बच्चों को सांस्कृतिक प्रस्तुति का अवसर देता है बालरंग - कुँवर विजय शाह
प्रदेश में स्कूल बैण्ड को प्रोत्साहित करने के लिये दी जायेगी मदद

भोपाल, राष्ट्रीय बालरंग समारोह पिछले कुछ वर्षों में देशभर के प्रतिभाशाली स्कूली बच्चों को सांस्कृतिक प्रस्तुति देने का सशक्त मंच बनकर उभरा है। यह बात स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह ने भोपाल स्थित इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित राष्ट्रीय बालरंग समारोह को संबोधित करते हुए कही। साथ ही उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में स्कूल बैण्ड को प्रोत्साहित करने के लिये पहले चरण में 118 सरकारी स्कूलों को मदद दी जायेगी।

स्कूल शिक्षा मंत्री कुँवर विजय शाह ने उद्घाटन समारोह में कहा कि बालरंग में विभिन्न राज्यों से आये बच्चों से सभी को देश की विविधतापूर्ण संस्कृति को जानने का बेहतर अवसर मिलता है। उन्होंने जीवन में स्वच्छता के महत्व के बारे में भी बच्चों को बताया। स्कूल शिक्षा मंत्री ‘स्कूल बैण्ड’ प्रतियोगिता स्थल पर भी पहुँचे। उन्होंने कहा कि बैण्ड हमें संगीत के साथ-साथ अनुशासन की भी सीख देता है। राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के निदेशक प्रोफेसर सरित के. चौधरी ने कहा कि मानव संग्रहालय देशभर में मानव जीवन की विरासत को समझने के एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में पहचाना जाता है। यहाँ आये बच्चे इस संग्रहालय को देखकर अपने ज्ञान को बढ़ाएँगे। संचालक लोक शिक्षण श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने बालरंग समारोह में होने वाली गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि स्कूल के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति, धरोहर एवं राष्ट्रीय एकता से परिचित कराना बालरंग का उद्देश्य है।

  • राष्ट्रीय बालरंग समारोह में पहली बार स्कूली बैण्ड को किया गया शामिल।
  • समारोह में प्रदेश के 10 हजार और 26 राज्यों के 550 स्कूली बच्चे ले रहे हैं हिस्सा।

दिव्यांग बच्चों के लिये विशेष प्रतियोगितायें आयोजित

राष्ट्रीय बालरंग समारोह में 13 राज्यों, आठ पूर्वोत्तर राज्यों और पाँच केन्द्र शासित प्रदेशों के स्कूली बच्चे शामिल हुए। समारोह में कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग में साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ हुईं। मदरसों एवं संस्कृत विद्यालयों के साथ-साथ दिव्यांग बच्चों के लिये विशेष प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं।

राष्ट्रीय बालरंग समारोह में मुख्य आकर्षण लोक-नृत्य रहा। लोक-नृत्य के माध्यम से स्कूल के बच्चे अपने राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। पहले स्थान पर आने वाली प्रतिभागी टीम को 51 हजार, द्वितीय को 31 हजार और तृतीय स्थान पर रहने वाली टीम को 21 हजार रुपये की राशि से पुरस्कृत किया गया।