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रिज़र्व बैंक ने नहीं किया नीतिगत दरों में बदलाव
 

नई दिल्ली, कच्चे तेल और खाद्यान्नों के दाम बढ़ने से महंगाई की आशंका के चलते भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार चौथी बार रेपो दर में यथास्थिति बनाये रखी। इससे पहले पिछले साल अगस्त में रेपो दर में चौथाई फीसदी कटौती की गई थी। तब से यह 6 फीसदी पर बनी हुई है। हालांकि, केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि 2018-19 में जीडीपी विकास दर बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो जाएगी। मालूम हो, रेपो दर वह दर होती है, जिस पर बैंक अपनी तत्कालिक जरूरतों के लिए रिज़र्व बैंक से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। जबकि रिवर्स रेपो दर वह दर होती है, जिस पर रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों से नकदी उधार लेकर उनके पास उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को सोखता है। रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के नेतृत्व में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को उम्मीद है कि निवेश गतिविधियां बढ़ने से चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि की दर बढ़कर 7.4 फीसदी तक पहुंच जाएगी। इस वित्त वर्ष में यह 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। एमपीसी ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के 4.7 प्रतिशत से 5.1 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है। जानकारों के मुताबिक, मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर को पूर्वस्तर पर बरकरार रखे जाने से आवास और वाहन कर्जदारों की मासिक किस्तों पर कोई असर नहीं होगा।