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नये भारत के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
 

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जिन्हें बाबा साहेब के नाम से भी जाना जाता है, उनकी 14 अप्रैल 2018 को 127वीं जयंती है। यह दिन समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। जीवनभर समानता के लिये संघर्ष करने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को समानता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। डॉक्टर अंबेडकर विश्वभर में अपनी प्रकांड विद्वत्ता के लिये जाने जाते हैं। डॉक्टर अंबेडकर की गिनती नये भारत के निर्माता के रूप में भी की जाती है।

बाबा साहेब ने देश के निर्धन और वंचित समाज को न सिर्फ प्रगति का रास्ता दिखाया, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा की राह और उसकी महत्ता भी बताई। उन्होंने युवा वर्ग के लिये ‘शिक्षा, संगठन और संघर्ष करो’ का तीन सूत्रीय उद्देश्य तय किया था। वे आह्वान करते थे कि ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’, साथ ही पढ़ो और पढ़ाओ। उनके आह्वान को युवा वर्ग की समस्त जीवन शैली में शिक्षा के महत्व के रूप में देखा गया है। इस सूत्र वाक्य का स्पष्ट अर्थ है कि संगठित होने और न्याययुक्त संघर्ष करने के लिये प्रथम शर्त समाज के हर व्यक्ति का शिक्षित होना है। उनका मानना था कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ‘बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय’ होना चाहिये। बाबा साहेब के सिद्धांतों में सामाजिक एकता और समरसता सर्वोपरि रही है। उनका मानना था कि कोई भी समुदाय स्वयं को केवल तभी गतिमान रख सकता है, जब उसमें एकता और भाईचारे की भावना दिखाई दे। उनका मानना था कि अगर समाज में समता और समरसता बनी रहेगी, तो इससे मिलने वाली ताकत उस समाज और देश को बलशाली बनाने में मददगार होगी, जिसके वे निवासी हैं। उनका मानना था कि परस्पर सहयोग की भावना देश को मजबूत बनाती है और शिक्षित नागरिक उस देश को गौरवशाली बनाते हैं। इसके अलावा बाबा साहेब ने लोगों को आत्मसम्मान से जीने का संदेश भी दिया। उनका मानना था कि चाहे व्यक्ति गरीब हो या अमीर, शिक्षित हो या अशिक्षित उसे आत्मसम्मान से जीने का अधिकार है। उन्होंने संदेश दिया था कि अपने स्वाभिमान को खोकर जीवित रहना अपमानजनक है। 29 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र भारत के नये संविधान की रचना के लिये गठित प्रारूप समिति का अध्यक्ष बाबा साहेब को बनाया गया था। उनके द्वारा तैयार किये गये संविधान पाठ में संवैधानिक गारंटी के साथ नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पहल भी की गई है, जो भारत के गौरवशाली निर्माण के लिये उनकी मानसिक प्रतिबद्धता को उजागर करती है। विवेकशील समधर्मी समाज के निर्माण में बाबा साहेब का योगदान प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। बहुजन सुखाय की उनकी कोशिश भारत को निरंतर आगे बढ़ाने में कामयाब हो रही है।

आज नये विकसित भारत को उनके द्वारा शिक्षा की जलाई गई ज्योत से नई राह दिखाई दे रही है। खासकर दुनिया भर में भारत की युवा प्रतिभाओं को सराहा जा रहा है। शिक्षा और विज्ञान की तरक्की में बाबा साहेब के सिद्धांत परिलक्षित हो रहे हैं। उनकी जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।

शुभकामनाओं सहित!