Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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समावेशी भारत विषयक कार्यशाला
दिव्यांग कल्याण के लिये मध्यप्रदेश में बनाई गई हैं नवाचारी योजनायें
समाज और सरकार मिलकर समावेशी विकास की अवधारणा को लागू करें - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत भोपाल में ‘समावेशी भारत विषयक कार्यशाला’ के दौरान दिव्यांग बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित करते हुये।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना मध्यप्रदेश सरकार का प्राथमिक उद्देश्य है। मध्यप्रदेश में समाज और सरकार मिलकर समावेशी विकास की अवधारणा को प्रभावी तरीके से लागू कर सकते हैं। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये कई नवाचारी योजनायें चलायी जा रही हैं। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल स्थित आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगजनों के लिये ‘समावेशी भारत विषयक कार्यशाला’ को संबोधित करते हुये कही। कार्यशाला का आयोजन, राष्ट्रीय न्यास, दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार एवं सामाजिक न्याय विभाग, मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

भोपाल, श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शारीरिक अपंगता स्थाई बाधा नहीं है। दिव्यांगजन अपनी प्रतिभा और क्षमता का पूरा उपयोग कर गरिमा के साथ देश और प्रदेश के विकास में भागीदार बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग बंधुओं में क्षमता, ऊर्जा और प्रतिभा की कमी नहीं है। समाज और सरकार के थोड़े से सहयोग से वे जीवन में चमत्कार कर सकते हैं और समाज को अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बंधुओं के संपूर्ण विकास के लिये सरकार ऐसे वातावरण का निर्माण कर रही है, जिसमें वे अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग समाज के लिये कर सकें।

मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार द्वारा दिव्यांग बंधुओं के लिये अनूठी योजनायें संचालित करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश में दिव्यांग बंधुओं को इन योजनाओं का पूरा लाभ दिलाया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि इस कार्यशाला में दिव्यांगों के कल्याण के संबंध में विशेषज्ञों और समाजसेवियों द्वारा दिये गये सुझावों पर सरकार प्रभावी रूप से कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर दिव्यांग बालक बालिकाओं को प्रमाण-पत्र दिये। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने की।

  • मध्यप्रदेश में बहु-दिव्यांग व्यक्तियों के लिये पांच सौ रुपये प्रति माह पेंशन की व्यवस्था शुरू की गई।
  • यह सुविधा प्रदेश में लगभग चार लाख दिव्यांगों को मिल रही है।
  • दिव्यांगों के विवाह पर अब पचास हजार रुपये के स्थान पर दो लाख रुपये दिये जा रहे हैं।