Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh

 
विज्ञान मेला
 

भारतीय शास्त्रों में वैज्ञानिक अवधारणायें और विचार अपनी सम्पूर्णता के साथ अभिव्यक्त किये गये हैं। भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी वैज्ञानिक सोच के मामले में अपने समय में अग्रणी थे, गांधी जी ने स्वदेशी विज्ञान पर जोर दिया था। उनका मानना था कि ऐसे आविष्कार एवं यंत्र तैयार किये जायें, जो आम-जन के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ देश की उन्नति में भी सहायक हों। यह बात विगत दिनों मध्यप्रदेश की नवनियुक्त राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने भोपाल स्थित भेल दशहरा मैदान में सातवें भोपाल विज्ञान मेले के शुभारंभ के दौरान कही।

भारतीय परम्परा में मेलों का अपना महत्व है। देश के विभिन्न स्थानों में आयोजित होने वाले इन मेलों से लोगों को एक-दूसरे के विचारों को जानने-समझने का मौका मिलता है। विज्ञान मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नित नये आविष्कारों और विकास से जन-सामान्य को अवगत कराना तो है ही, साथ ही युवा पीढ़ी के लिये विज्ञान के क्षेत्र में कैरियर की भावी संभावनाओं को तलाशना भी है। आज देश में ऊर्जा संकट, जल संकट और वायु प्रदूषण आदि में शोध करने की जरूरत है, जिससे आम-जन के जीवन को सरल एवं सुगम बनाया जा सके। विश्व के जितने भी विकसित देश हैं, आज वे विकसित इसलिये हैं, क्योंकि उन्होंने विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोधपरक कार्यों को बढ़ावा दिया है। विज्ञान से प्रगति की अवधि समय के साथ कम होती जा रही है। पहले के समय में विज्ञान के क्षेत्र में जो परिवर्तन सौ वर्षों में देखने को मिलता था, वह परिवर्तन अब दस वर्षों में ही देखने को मिल रहा है। भारत के लिये यह गर्व का विषय है कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। आज भारत अपने स्वयं के उपग्रह भेजने के साथ-साथ अन्य विकसित देशों के भी उपग्रह अंतरिक्ष में भेज रहा है। भारतीय युवाओं ने कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भी अपना दबदबा कायम किया है, इसका प्रमाण है कि विश्व की कम्प्यूटर क्षेत्र में काम करने वाली विभिन्न अग्रणी कंपनियों में भारतीय युवाओं का प्रतिशत सर्वाधिक है। हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी युवा वैज्ञानिकों के रोल मॉडल हैं। डॉ. कलाम के नेतृत्व में ही देश का मिसाइल कार्यक्रम सफलता पूर्वक क्रियान्वित किया जा सका।

आज देश के युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में स्वदेशी भाव को जीवित रखने की जरूरत है। पश्चिमी देशों की नकल करने के स्थान पर विज्ञान के क्षेत्र में स्वयं के शोध एवं नये आविष्कार करने की जरूरत है, ताकि भारत विश्व गुरु की श्रेणी में आकर समस्त क्षेत्रों में विश्व का नेतृत्व कर सके। यह तभी संभव है, जब हम सब मिलकर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने का सार्थक प्रयास करें। इस लक्ष्य की प्राप्ति में विज्ञान मेले जैसे आयोजन बहुत सहायक सिद्ध होते हैं।

शुभकामनाओं सहित।