Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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प्रदेश में दो हजार से अधिक कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना हुई
 

भोपाल, मध्यप्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिये किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने निजी क्षेत्र में कस्टम हायरिंग केन्द्र योजना प्रारंभ की है। इस योजना से किसानों को खेतों में किराये की राशि से महँगे कृषि यंत्र उपयोग करने का मौका मिल रहा है। मध्यप्रदेश कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना के मामले में देश में पहले स्थान पर है। अब तक प्रदेश में दो हजार 25 से अधिक कस्टम हायरिंग केन्द्र शुरू किये जा चुके हैं।

कृषि के वर्तमान परिदृश्य में कृषि यंत्रीकरण का महत्व बढ़ा है। इसके उपयोग से श्रम, समय एवं लागत में कमी आती है तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। ग्रामीण अंचलों में खेतिहर मजदूरों की संख्या कम होने से किसानों की दिक्कतों में इजाफा हुआ है, जिसे देखते हुए कस्टम हायरिंग केन्द्र की योजना शुरू की गई है। योजना का लाभ यह हुआ है कि अब लघु एवं सीमांत किसान भी कृषि यंत्रों का उपयोग कर रहे हैं।

कस्टम हायरिंग केन्द्र की योजना में ग्रामीण शिक्षित युवाओं को कृषि के आधुनिक यंत्रों को रखने के लिये बैंकों से ऋण दिलवाया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा केन्द्र की लागत का 40 प्रतिशत और अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सहायता अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रत्येक कस्टम हायरिंग केन्द्र में वर्षभर में 80 से 125 किसानों को मदद दी जा रही है। योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के पलायन की प्रवृत्ति पर भी रोक लगी है।