Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
 

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम
जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और संरक्षणवाद दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियां - प्रधानमंत्री

23 जनवरी को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्विट्जरलैण्ड के दावोस शहर में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए दुनिया के सामने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और देशों का आत्मकेंद्रित होने को बड़ी चुनौतियां बताया है। प्रधानमंत्री ने हिन्दी में सम्बोधित करते हुये कहा कि डब्ल्यूईएफ की 48वीं बैठक में शामिल होते हुये मुझे बहुत खुशी हो रही है। उन्होंने गर्मजोशी से स्वागत के लिये स्विट्ज़रलैंड सरकार को धन्यवाद दिया। श्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि अब डाटा पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसा लगता है कि जो डाटा पर नियंत्रण रखेगा, वह वर्चस्व बनाये रखेगा। क्लाइमेट चेंज पर प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लेशियर पीछे हटते जा रहे हैं। आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से वातावरण को बचाने के लिये भारत सरकार ने बहुत बड़ा लक्ष्य रखा गया है। 2022 तक भारत में 175 गीगावॉट

‘‘प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि मेरे घर की खिड़कियां बंद नहीं होनी चाहिये। आज भारत इसी विचार के साथ आगे बढ़ रहा है। समावेशी दर्शन भारत सरकार की हर योजना का आधार है।’’
   संबोधन से पहले दावोस में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति एलेने बर्सेट और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के चेयरमैन प्रोफेसर क्लाउस श्वाब से मुलाकात की।
   डब्ल्यूईएफ में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने दुनिया की शीर्ष कंपनियों के 40 सीईओ के साथ राउंड टेबल मीटिंग की।
   प्रधानमंत्री ने कहा इंडिया का मतलब ही बिज़नेस है, उन्होंने भारत में कारोबारी अवसरों का जिक्र भी किया।
      इस समिट में 400 सेशन हुये, इसमें तकरीबन 70 देशों के प्रमुखों सहित 350 नेताओं ने हिस्सा लिया।

रिन्युएबल (अक्षय ऊर्जा) एनर्जी के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। आतंकवाद के संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत
विश्व आर्थिक फोरम (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका मुख्यालय जेनेवा में है। इसका मिशन विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ लाकर वैश्विक, औद्योगिक और क्षेत्रीय दिशा तय करना है। इसकी स्थापना 1979 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जेनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम. श्वाब द्वारा की गई थी।

सहित दुनिया के सभी देश इसके बढ़ते रूप से चिंतित हैं, खासकर युवा पीढ़ी का आतंक के प्रति आकर्षित होना सबसे बड़ी चिंता बन गई है। आत्मकेंद्रीकरण को तीसरी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि बहुत से देश आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। ग्लोबलाइजेशन के विपरीत प्रोटेक्शनिज्म (संरक्षणवाद) की ताकत बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि क्रॉस बॉर्डर वित्तीय निवेश में कमी आई है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इकोनॉमिक फोरम के संबोधन के अंत में सभी देशों को भारत में आने का न्योता दिया।