Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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राज्य स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार समारोह
जन अभियान से बदली जा सकती है स्वच्छता के प्रति मानसिकता - मुख्यमंत्री
राज्यों को खुले में शौच से मुक्त बनाने में केंद्र सरकार करेगी वित्तीय मदद - उमा भारती
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती भोपाल में ‘राज्य स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार’ वितरित करते हुये।

मध्यप्रदेश 2 अक्टूबर 2018 तक खुले में शौच से मुक्त प्रदेश बन जायेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता को जन अभियान का स्वरूप दिया है। इस जन अभियान के जरिये लोगों की स्वच्छता के प्रति मानसिकता बदली जा सकती है। प्रदेश के लोगों ने स्वच्छता के महत्व को स्वीकारा है। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य स्तरीय स्वच्छता पुरस्कार समारोह’ को संबोधित करते हुये कही। समारोह में केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। केंद्र सरकार राज्यों को पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिये भरपूर वित्तीय मदद देगी।

भोपाल, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वच्छता के लिए प्लास्टिक का उपयोग अत्यंत हानिकारक है। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने स्वच्छाग्रहियोंे को संकल्प दिलवाया कि वे धीरे-धीरे प्लास्टिक का उपयोग करना छोड़ दें। साथ ही नागरिकों को भी इसके लिये प्रेरित करें।

मुख्यमंत्री ने असंगठित श्रमिक कल्याण योजना की चर्चा करते हुये स्वच्छाग्रहियों का आह्वान किया कि वे इस योजना के क्रियान्वयन में पूरा सहयोग करें। उन्होंने बताया कि इस योजना में हर गरीब का अपना मकान होगा, उसे आवासीय भूमि का पट्टा मिलेगा। उनका मुफ्त में इलाज होगा। श्रमिकों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये और सामान्य मृत्यु पर दो लाख रुपये उसके आश्रितों को मिलेंगे।

समारोह में केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि देश को 2 अक्टूबर, 2019 तक पूरी तरह खुले में शौच जाने से मुक्त बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को वर्ष 2014 से अब तक 3 हजार 180 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। वित्त आयोग से स्वच्छता के लिये अलग से धनराशि निर्धारित करने का आग्रह किया जायेगा, जिससे खुले में शौच जाने से मुक्त घोषित होने के आगे की गतिविधियों को क्रियान्वित किया जा सके।

सुश्री उमा भारती ने कहा कि प्लास्टिक स्वच्छता का सबसे बड़ा शत्रु है। उन्होंने नागरिकों का आह्वान किया कि सड़क पर किसी भी प्रकार का प्लास्टिक का सामान अथवा पॉलीथीन नहीं फेकें, इससे गौ-धन की हानि होती है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की शुरुआत स्व-प्रेरणा से होती है। इसलिये खुले में शौच जाने से मुक्त हो चुकी ग्राम पंचायतों के सरपंचों की यह जिम्मेदारी है कि वे अब ओडीएफ के आगे की गतिविधियों की तैयारी करें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वच्छता निरंतर चलने वाला काम है। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय के सचिव श्री परमेश्वरन अय्यर ने बताया कि वर्ष 2014 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से पहले देश में 55 करोड़ लोग खुले में शौच जाते थे। मात्र साढ़े तीन साल में इनकी संख्या घटकर 20 करोड़ रह गई है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन सालों में देश को स्वच्छ बनाने के अभियान में जितना काम हुआ, उतना बीते सात दशकों में भी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि 400 जिले और साढ़े तीन लाख गांव खुले में शौच जाने से मुक्त हो गये हैं।

  • मध्यप्रदेश में प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिये चलाया जायेगा विशेष अभियान।
  • समारोह में भारत सरकार की गोवर्धन योजना का किया गया शुभारंभ।
  • यह योजना नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायत कोदसा और ग्वालियर जिले की ग्राम पंचायत चिरुली से हुई शुरू।