Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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ज्वॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए)
ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका हुआ बाहर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु संधि से अलग होने की घोषणा की और कहा कि अब इस दिशा में अमेरिका स्वतः निर्णय लेने के लिए आजाद है। इसके कुछ समयांतराल बाद ही अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये। माना जा रहा है कि ट्रंप के इस फैसले से भारत सहित कई देशों पर प्रभाव पड़ेगा। ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने के पूरे आसार हैं। फ्रांस, जर्मनी, चीन और ब्रिटेन ने ट्रंप के इस निर्णय पर अफसोस जताया। वहीं इज़राइल ने अमेरिका के इस कदम को स्वागत योग्य बताया, जबकि दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अमेरिका के ईरान परमाणु करार से अलग होने के बाद कहा कि यह संभावना पिछले कुछ माह से बन रही थी, ईरान दुनिया भर के साथ अपने रिश्ते और करार बराबर बनाए रखेगा।
भारत पर असर - तेल कीमतों में इजाफा व चाबहार प्रोजेक्ट पर असर।
ईरान न्यूक्लियर डील पर असर

इस डील पर सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस ने हस्ताक्षर किए थे और जर्मनी भी इसमें शामिल था। इसके तहत ईरान परमाणु कार्यक्रम के बड़े हिस्से को बंद करने और निगरानी कराने पर राजी हो गया था।
ट्रंप के फैसले पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ट्वीट कर कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह गलत फैसला है, यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों, वैज्ञानिकों और अंतर्राष्ट्रीय महाशक्तियों के बीच का फैसला है। हालांकि यूरोपीय शक्तियों ने ईरान परमाणु समझौते पर ‘अपनी वचनबद्धता’ जारी रखने का संकल्प लिया है।
ट्रंप के ईरान समझौते से बाहर होने के कुछ घंटों बाद ही इज़राइल ने सीरिया स्थित ईरान के सैन्य कैंप पर मिसाइल हमला कर दिया। इस हमले में 9 ईरानी सैनिक मारे गए हैं। ट्रंप के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के समझौते से हटने के बावजूद विश्व शक्तियों के साथ परमाणु समझौते के प्रति वचनबद्ध हैं। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौते के अनुसार उन्हें लाभ नहीं मिला तो ईरान यूरेनियम संवर्धन को फिर से शुरू कर देगा।
    अमेरिका के इस फैसले पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है, उन्होंने कहा कि ज्वॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) से अलग होने से अमेरिका की छवि पर असर पड़ेगा।
    यह संधि ओबामा कार्यकाल के दौरान हुई थी।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपने प्रचार एजेंडे में इस घोषणा को किया था शामिल।
        जुलाई 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्यों एवं जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के बीच वियना में ईरान परमाणु समझौता हुआ था।