Department of Public Relation:Government of Madhya Pradesh
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नौ द्धि-वार्षिक कमांडर सम्मेलन
सम्मेलन मजबूत नौसेना के बिना समुद्रीत का विकास संभव नहीं

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में नौसेना कमांडरों के द्विवार्षिक सम्मेलन के पहले संस्करण का उद्घाटन किया। नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नौसेना देश के समुद्री क्षेत्र की रक्षा, प्रतिबद्धता के साथ कर रही है। हमारी नौसेना का काम करने का तरीका बेहद पेशेवर है। रक्षा मंत्री ने नौसेना द्वारा समुद्री क्षेत्र में जहाज, पनडुब्बी और एयरक्राफ्ट तैनात करने के तौर तरीकों पर संतोष व्यक्त किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि नौसेना का समुद्री बेड़ा, तस्करी, राहत एवं बचाव कार्य के समय प्रभावशाली भूमिका के लिए खुद को और बेहतर बनाएगा। उन्होंने कहा कि नौसेना के त्वरित कार्यवाही के प्रयासों के परिणाम दिखाई देने लगे हैं। भारतीय नौसेना ने पिछले कुछ महीनों में हिंद महासागर क्षेत्र में विपदा के समय त्वरित कार्रवाई का शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने श्रीलंका में बाढ़ तथा बांग्लादेश और म्यांमार में समुद्री तूफान के बाद प्रभावी भूमिका निभाई है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एक राष्ट्र सच्चे अर्थों में तब तक आत्मनिर्भर नहीं बन सकता, जब तक हम खुद हथियार और रक्षा प्रणालियां विकसित नहीं करते। इस मामले में भारतीय नौसेना की भूमिका सराहनीय है, क्योंकि वह व्यापक स्तर पर शोध और विकास के स्तर पर विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर सक्रिय रूप से काम कर रही है।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशीकरण पर जोर देते हुए कहा कि जहाज निर्माण से जुड़ी 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निविदा जारी हो चुकी है और अनुबंध का कार्य अंतिम चरण में है। रक्षा मंत्री ने आशा व्यक्त की कि स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग और प्रगति करेगा तथा भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा, कमांडरों के साथ बातचीत में रक्षा मंत्री ने नौसेना के डिजीटलीकरण के प्रयासों की सराहना की।

श्रीमती निर्मला सीतारमण ने जोर देते हुए कहा कि हमारे समुद्री क्षेत्र का सीधा संबंध देश के आर्थिक विकास से है, जो कि बिना मजबूत नौसेना के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नौसेना को कोष के स्तर पर कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।