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पर्यावरण मंत्री ने किया मीडिया प्रतिनिधियों की राज्य-स्तरीय कार्यशाला का समापन

एप्को ने लांच किया जलवायु परिवर्तन पर दो सदी की जानकारी देने वाला पोर्टल

भोपाल : बुधवार, नवम्बर 29, 2017, 19:58 IST
 

पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) द्वारा जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों के विरुद्ध और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जल्दी ही एक पुस्तक का प्रकाशन किया जाएगा। पुस्तक में प्रदेश के जिलों में अपने जमीनी अनुभवों के आधार पर लिखने वाले पत्रकारों के विचार, सफलता की कहानियाँ, अनूठी पहल और अनुभवों पर आधारित आलेखों का संकलन होगा। एप्को द्वारा आलेख एक जनवरी, 2018 तक ecoevents.epco@gmail.com पर आमंत्रित किये गए हैं। प्रकाशित होने वाले लेखों के लेखकों को 5 हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा।

पर्यावरण मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य ने यह बात आज भोपाल में जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण पर हुई एक दिवसीय राज्य-स्तरीय मीडिया कार्यशाला का समापन करते हुए कही। श्री आर्य ने कहा कि अधिक से अधिक पेड़ लगाकर शिक्षकों और बच्चों को कार्यक्रम से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण के प्रयास किये जा रहे हैं। कार्यशाला में प्रदेश के जलवायु परिवर्तन पर लिखने वाले पत्रकारों ने भाग लिया। एप्को के महानिदेशक एवं प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री अनुपम राजन और दैनिक भास्कर, नई दिल्ली के राजनैतिक सम्पादक श्री अभिलाष खाण्डेकर भी उपस्थित थे।

महानिदेशक श्री अनुपम राजन ने कहा कि पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन आज एक ज्वलंत समस्या बन चुका है। पृथ्वी का तापमान दो डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक न बढ़ पाए, इसके लिए 170 देश एकजुट हुए हैं। एप्को द्वारा भावी पीढ़ी को जलवायु परिवर्तन के खतरों से आगाह करते हुए और पर्यावरण संरक्षण की ओर प्रेरित करने के लिए एक हजार शिक्षकों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये शिक्षक ईको क्लब के माध्यम से एक लाख बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। बच्चे अपने आसपास के वातावरण में जागरूकता लाएंगे। श्री राजन ने मीडिया प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि उनके सुझावों पर अमल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम अपनी दिनचर्या में कागज, पानी, बिजली आदि की छोटी-छोटी बचत कर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। श्री राजन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी कार्यों के कारण एप्को को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है।

श्री अभिलाष खाण्डेकर ने कहा कि पर्यावरण संचालनालय बने। साथ ही एप्को द्वारा संभाग स्तर पर भी कार्यालय खोले जाएं। जलवायु परिवर्तन पर देश में सबसे पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाला मध्यप्रदेश का एप्को ही था। उन्होंने कहा कि पेड़ घटने से यदि जलग्रहण क्षेत्र खत्म हो गया तो नदियाँ ही खत्म हो जाएंगी। कार्यशाला में भाग ले रहे प्रतिनिधियों ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रतिभागियों ने कहा इससे न केवल एक मार्गदर्शन मिला है बल्कि आपसी अनुभवों को साझा कर नई चीजें सीखने और समझने को मिली हैं।

नईदुनिया धार के पत्रकार श्री विजय पाटिल ने सीताफल से रोजगार, नईदुनिया खरगोन के श्री विवेकवर्धन श्रीवास्तव ने इंदिरा सागर की नहरों से तापमान में आयी कमी, पत्रिका नरसिंहपुर के श्री अजय खरे ने रेत खनन से जल-जंतुओं पर संकट, पानी की कमी का उल्लेख किया। पीटीआई इंदौर के श्री हर्षवर्धन कटारिया ने कहा कि झाबुआ जिले में मिलने वाला नूरजहाँ आम पहले 7 किलो का होता था। अब जलवायु परिवर्तन के चलते मात्र साढ़े तीन किलो का रह गया है। राज्य पक्षी खरमोर विश्व की सबसे संकटग्रस्त 100 प्रजातियों में शामिल हो गया है। दैनिक आलोक रीवा के श्री रमेन्द्र पाण्डे ने कहा कि प्रकृति के विरुद्ध युद्ध और विकास का दुष्परिणाम है जलवायु परिवर्तन। उन्होंने कभी प्राकृतिक रूप से समृद्ध रहे विंध्य क्षेत्र की जैव-विविधता, सुंदरजा आम के संकट के लिए खनन को दोषी ठहराया। सीहोर जी न्यूज के श्री अनिल सक्सेना और श्री राघवेन्द्र चतुर्वेदी, ग्वालियर स्वदेश के श्री विनोद दुबे, अशोकनगर के श्री लखन शर्मा, टाइम्स ऑफ इण्डिया खरगोन के श्री अनिमेष जैन, श्री पुहुप सिंह भारत, भास्कर रायसेन के श्री विष्णु यादव, कृषक जगत के श्री सचिन बोन्द्रिया आदि ने भी पर्यावरण संरक्षण के लिए काफी सारगर्भित सुझाव रखे।

पर्यावरण मंत्री श्री आर्य ने जलवायु परिवर्तन पर एप्को द्वारा प्रदेश में पहली बार तैयार किये गए पोर्टल climatechange.mp.gov.in का भी शुभारंभ किया। पोर्टल में जलवायु परिवर्तन से संबंधित जानकारी, शोध, प्रतिवेदन, नीति आदि की जानकारी रहेगी, जिसका फायदा शोधार्थियों, स्वैच्छिक संगठनों और नीति निर्धारकों को मिलेगा। पोर्टल में बच्चों के लिए रोचक ढंग से फोटो, कहानियों और कॉमिक्स के जरिए जानकारी दी गई है। पोर्टल में मध्यप्रदेश में पिछले 100 सालों में हुए जलवायु परिवर्तन और आने वाले समय में अनुमानित तापमान की जानकारी होगी। किसी भी जिले का तापमान, वर्षा, आद्रता आदि देखी जा सकती है। वर्ष 2070 से 2100 तक जिले जलवायु परिवर्तन से किस तरह प्रभावित होंगे, इसे भी देखा जा सकता है।

 
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