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प्रदेश के विकास का विज़न 2023 तैयार है : मुख्यमंत्री श्री चौहान

एक्सीलेंस अवार्डस वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान

भोपाल : रविवार, दिसम्बर 17, 2017, 20:06 IST
 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश-दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का सपना और संकल्प है। विकास का विज़न 2023 तैयार हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये नवाचारी प्रयास भी किये जायेंगे। प्रदेश की कृषि विकास दर दो प्रतिशत से बढ़कर आज 29 प्रतिशत हो गई है। पिछले पाँच वर्षों से 20 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। श्री चौहान आज निजी एक चैनल द्वारा आयोजित एक्सीलेंस अवार्डस-2017 सम्मान वितरण कार्यक्रम के अवसर पर 'मध्यप्रदेश कल-आज-कल' विषय पर विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर जनसम्पर्क एवं जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों में 15 अवार्डस विजेताओं को पुरस्कृत किया।

श्री चौहान ने कहा कि समाज में बेहतर काम करने वालों को पुरस्कृत किया जाना, समाज को दिशा देने का सफल प्रयास है। उन्होंने इस दिशा में आईबीसी-24 की पहल की सराहना की। श्री चौहान ने कहा कि 12 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश की विकास दर ऋणात्मक तक हो जाती थी। बजट मात्र 21 हजार करोड़ रूपये का था, जिसमें विकास कार्यों के लिये केवल 5 हजार करोड़ रूपये उपलब्ध होते थे। प्रति व्यक्ति आय भी केवल 13 हजार रूपये होती थी। आज मध्यप्रदेश की पिछले आठ वर्षों से विकास दर 10 प्रतिशत के आस-पास है, जो देश में दूसरे नंबर पर है। सरकार की 100 रूपये की राजस्व में से 22 रूपये ब्याज में जाते थे। आज मात्र साढ़े आठ रूपये जाते हैं। आज की सड़कें देश-दुनिया में बेहतरीन हैं। उस समय सड़क में गड्ढ़े या गड्ढ़ों में सड़क तय करना मुश्किल था। विद्युत उत्पादन मात्र 2900 मेगावॉट था, जो अब 18 हजार मेगावॉट है। राज्य की कुल सिंचाई क्षमता साढ़े सात लाख हेक्टेयर थी, जो अब 40 लाख हेक्टेयर है। सिंचाई क्षमता हर वर्ष 5 लाख हेक्टेयर की दर से बढ़ रही है। नदी जोड़ने की तब कल्पना भी नहीं होती थी। आज नर्मदा और क्षिप्रा नदी जुड़ गयी हैं। गंभीर नदी को जोड़ने का कार्य प्रगति पर है।

श्री चौहान ने महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रयासों का उल्लेख करते हुये कहा कि प्रदेश में बेटी को देवी मानकर सरकार कार्य कर रही है। शासकीय कार्यक्रम के प्रारंभ में वे स्वयं बेटियों के चरण धोकर उसे माथे पर लगाते हैं। यह बेटियों के देवी स्वरूप का संदेश देने का प्रयास है। प्रदेश की 26 लाख बेटियों लखपति हैं। जब वे 21 वर्ष की होंगी तो सरकारी खजाने से 32 हजार करोड़ रूपया उनके खाते में जायेगा। स्थानीय निकायों के चुनावों में 56 प्रतिशत महिला जनप्रतिनिधि हैं। यह सरकार द्वारा निकायों के चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था से हुआ है। सरकार ने अध्यापकों के पदों पर 50 प्रतिशत, वन विभाग को छोड़कर शेष सभी सरकारी पुलिस सहित विभागों में 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कर दी है।

गरीब कल्याण एजेण्डे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही सही विकास है। सरकार ने सामाजिक न्याय की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया है। सस्ता खाद्यान्न, नि:शुल्क उपचार के साथ ही हर व्यक्ति को रहने लायक जमीन की टुकड़े का कानूनी अधिकार दिया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सात नये चिकित्सा महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। ज्यादा डॉक्टर होंगे तो ज्यादा अस्पताल बनेंगे। जहाँ अस्पताल नहीं पहुंच पायेंगे, वहाँ सर्वसुविधायुक्त मोबाईल चिकित्सालय पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुये कहा कि प्रतिभा के मार्ग में पैसा बाधा नहीं बने, इसके प्रयास हुये हैं। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना द्वारा प्रतिभावान बच्चों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाये गये हैं। समाज के हर वर्ग के कल्याण के कार्य किये गये हैं। किसानों को भरपूर मदद देने के साथ ही उनकी संतानों के लिये कृषक उद्यमी योजना भी संचालित की है ताकि खेती से रोजगार का दबाव कम हो, फसलों का वैल्यू एडीशन किया जा सके। युवाओं के लिये स्वरोजगार और उद्यमिता में सहयोग के प्रयासों का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि नवाचारी विचारों के लिये 100 करोड़ रूपये का वेंचर केपीटल फण्ड बनाया गया है। युवाओं के सपनों को साकार बनाने के लिये हरसंभव सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिक्षकों को न्यूनतम वेतन पर नियुक्ति की व्यवस्था का स्मरण कराते हुये कहा कि शिक्षा भविष्य की पीढ़ी का निर्माण करती है। जरूरी है कि शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन और बेहतर प्रशिक्षण मिले। सरकार ने इस दिशा में सार्थक प्रयास किये हैं। आज शिक्षकों को 30 से 35 हजार रूपये वेतन मिल रहा है।

श्री चौहान ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुये कहा कि ग्रामीण अंचल में शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिये ऐसे सर्वसुविधा सम्पन्न विद्यालयों की स्थापना करने की संकल्पना पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें दस-बारह किलोमीटर की परिधि में आने वाले गाँवों के तीन से चार हजार बच्चे एक साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करें। उनके आने-जाने के लिये वाहनों की व्यवस्था भी उपलब्ध रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्कूलों को बंद नहीं किया जायेगा। जहाँ नये स्कूल की माँग आयेगी, ऐसे क्षेत्रों में पॉयलेट प्रोजेक्ट के रूप में योजना को प्रारंभ किया जाना विचाराधीन है। युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिये टीसीएस, इन्फोसिस जैसी कम्पनियों और निवेशकों को राज्य में आमंत्रित किया गया है। युवाओं को उद्यमी बनाने के लिये योजनाओं का संचालन किया गया है। शहरों को स्वच्छ और बुनियादी सुविधा सम्पन्न बनाने के कार्य हो रहे हैं। देश के स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रथम 100 नगरों में मध्यप्रदेश के 22 शहर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भौतिक प्रगति के साथ ही आध्यात्मिक विकास के लिये भी सरकार प्रयास कर रही है। लोगों की जिन्दगी बनाना सरकार का दायित्व है। इसी संदर्भ में एकात्म यात्रा का आयोजन किया गया है।

इस अवसर आईबीसी-24 के सीईओ श्री विद्याधर खातवकर और एडीटर इन चीफ
श्री रविकांत मित्तल भी उपस्थित थे।

 
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