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मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना को मंजूरी

वर्ष 2016-17 की विद्युत दरों में उपभोक्ता को 7900 करोड़ की सब्सिडी दी जायेगी मंत्रि-परिषद का निर्णय

भोपाल : मंगलवार, अगस्त 2, 2016, 19:02 IST

मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना के जरिये ऐसे क्षेत्रों में किसानों को बिजली उपलब्ध करवाई जायेगी जहाँ स्थायी विद्युत पंप कनेक्शन देने की व्यवस्था नहीं है अथवा वहाँ विद्युत अधोसंरचना का विकास नहीं हुआ है। इस योजना को आज मंत्रि-परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई। इसके साथ ही मंत्रि-परिषद ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2016-17 में लागू विद्युत दरों में उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया है। इस निर्णय से राज्य शासन 7900 करोड़ रूपये विद्युत वितरण कंपनियों को देगी। इसका सर्वाधिक लाभ कृषकों को मिलेगा। विद्युत दरों में छूट से कृषकों को 7600 करोड़ की सब्सिडी मिलेगी।

मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया है कि कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये सोलर पम्प के जरिये ऐसे क्षेत्रों में बिजली उपलब्ध करवायी जायेगी, जहाँ विद्युत अधोसंरचना का विकास नहीं किया जा सका है। मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृत योजना को समूह अथवा क्लस्टर बनाकर लागू करने में प्राथमिकता दी जायेगी। योजना का लाभ ऐसे ग्राम, टोले, वन-क्षेत्र और ऐसे स्थलों को मिलेगा, जो वर्तमान में अविद्युतीकृत हैं और अगले दो-तीन वर्ष तक वहाँ परम्परागत रूप से बिजली पहुँचने की संभावना नहीं है। योजना का लाभ लेने के लिये उपरोक्त क्षेत्रों की विद्युत लाइन से कम से कम 300 मीटर दूरी जरूरी है। इसके साथ ही नदी या बाँध के समीप ऐसे स्थान, जहाँ पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो और फसलों के चयन के कारण जहाँ वॉटर पम्पिंग की आवश्यकता अधिक रहती है (जैसे बुरहानपुर का केला क्षेत्र) और कृषकों को बिजली की वास्तविक खपत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 1500 यूनिट प्रति एच.पी. से अधिक होती है, में योजना का लाभ मिलेगा। योजना उन जिलों में भी क्रियान्वित की जाना प्रस्तावित है, जहाँ विद्युत वितरण कम्पनियों की वाणिज्यिक हानि काफी अधिक है। उन क्षेत्रों में भी सोलर पम्प लगाने को प्राथमिकता दी जायेगी, जहाँ विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा अधिक वाणिज्यिक हानियों के कारण ट्रांसफार्मर हटा लिये गये हैं और परिणामत: क्षेत्र के किसान असंयोजित हैं।

मंत्रि-परिषद ने सोलर पम्पिंग को प्रोत्साहन देने के लिये योजना में 80 प्रतिशत तक के अनुदान पर कृषकों को पम्प मुहैया करवाने का निर्णय लिया है। इसमें हितग्राही का अंश सोलर पम्प की लागत का सिर्फ 20 प्रतिशत होगा। योजना में 3 एच.पी. तक डी.सी. पम्प ही उपयोग किये जायेंगे, इससे अधिक क्षमता के दोनों ए.सी. और डी.सी. पम्प प्रयोग किये जायेंगे। पाँच एच.पी. से अधिक क्षमता के सोलर पम्पों पर राज्य अनुदान एवं निर्धारित केन्द्रांश ही लागू होगा। प्रत्येक क्षमता के ए.सी.-डी.सी. एक ही दर पर हितग्राहियों को दिये जायेंगे। योजना में व्यक्तिगत हितग्राहियों के साथ ही किसानों के समूहों को भी लाभान्वित किया जायेगा। योजना में स्थापित सोलर पंप संयंत्र में पाँच वर्ष की गारंटी के साथ रख-रखाव भी सम्मिलित होगा। इस योजना का क्रियान्वयन ऊर्जा विकास निगम द्वारा कृषि विभाग के समन्वय से किया जायेगा।

विद्युत दरों में उपभोक्ताओं को सब्सिडी

मंत्रि-परिषद ने आज वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिये लागू विद्युत दरों में सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया है। इसके अनुसार 30 यूनिट तक के मासिक खपत वाले घरेलू उपभोक्ता को प्रति यूनिट 90 पैसे की सब्सिडी जारी रहेगी। स्थायी संयोजन वाले फ्लेट रेट कृषि उपभोक्ताओं को प्रति हार्स-पॉवर प्रतिवर्ष मात्र 1400 रुपये की दर से बिजली का बिल देना पड़ेगा। शेष राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी से की जायेगी। अनुसूचित-जाति एवं जनजाति के कृषि उपभोक्ताओं को एक हेक्टेयर तक की भूमि और 5 हार्स-पॉवर तक के पम्प पर नि:शुल्क बिजली दी जायेगी। राज्य शासन इसकी प्रतिपूर्ति विद्युत वितरण कम्पनी को करेगा। अस्थायी संयोजन वाले कृषि उपभोक्ताओं को एक रुपये 75 पैसे प्रति यूनिट की दर से सब्सिडी मिलेगी। स्थायी तथा अस्थायी, दोनों श्रेणी के कृषि उपभोक्ता के लिये फिक्स मासिक शुल्क एवं एफसीए (ईंधन लागत समायोजन) का पूर्ण भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। नगरपालिका और नगर पंचायत की निम्न-दाब सड़क बत्ती योजना के लिये नियत प्रभार पर राज्य शासन द्वारा 95 रुपये प्रति किलोवॉट प्रतिमाह की सब्सिडी दी जायेगी। उच्च-दाब उदवहन समूह सिंचाई उपभोक्ताओं को वार्षिक न्यूनतम प्रभार से छूट देते हुए एक रुपये 90 पैसे प्रति यूनिट की सब्सिडी ऊर्जा प्रभार में दी जायेगी। गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले अनुसूचित-जाति एवं जनजाति के एक बत्ती कनेक्शन उपभोक्ताओं से प्रतिमाह 25 यूनिट तक विद्युत प्रभार नहीं लिया जायेगा। पॉवर लूम उपभोक्ताओं को 25 हार्स-पॉवर तक एक रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट की सब्सिडी ऊर्जा प्रभार में दी जायेगी।

विद्युत नियामक आयोग द्वारा लागू की गयी विद्युत दरों में उपभोक्ताओं को उपरोक्त छूट दिये जाने पर राज्य शासन द्वारा विद्युत वितरण कम्पनियों को 7,900 करोड़ से अधिक की सब्सिडी दी जायेगी। इससे सर्वाधिक प्रदेश के कृषि उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, जिनकी सब्सिडी लगभग 7,600 करोड़ रुपये होगी।

 
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