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सफलता की कहानी

  

प्रीति को इच्छाशक्ति ने बनाया फ्लोर मिल का मालिक

भोपाल : शनिवार, अक्टूबर 7, 2017, 19:54 IST
 

जबलपुर शहर में प्रीति सिलोरिया ने अपनी इच्छाशक्ति से फ्लोर मिल स्थापित की है। इसमें उनके जीवनसाथी जितेन्द्र ने पूरा साथ दिया है। पैसों की व्यवस्था मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से हुई।

जबलपुर से फूड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा करके विवाह के बाद वर्ष 2009 में दिल्ली में कोकाकोला कम्पनी में क्वालिटी कैमिस्ट के रूप में काम करने लगीं थी प्रीति। उनके पति जितेन्द्र भी दिल्ली में ही एक फर्म में नौकरी करते थे। प्रीति के मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की इच्छा काफी समय से थी पर इसके लिए जरूरी धनराशि का अभाव उनके उत्साह को ठण्डा कर देता था। इंटरनेट पर सर्च के दौरान प्रीति को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिली। यहीं से उसके सपनों ने आकार लेना शुरू किया। जिला उद्योग केन्द्र जबलपुर से मई 2016 में प्रीति को उद्यम स्थापना के लिए 23 लाख रुपये का ऋण मंजूर हुआ और अगस्त में बैंक ने ऋण दे दिया।

प्रीति बताती हैं कि इस नई शुरूआत के समय वो और उनके पति दोनों काफी तनाव में थे। आखिरकार प्रीति ने अपना ड्रीम प्रोजेक्ट 9 नवम्बर को शुरू किया। उनके धैर्य, साहस और जिजीविषा के चलते प्रीतिभोज आटा अस्तित्व में आया। अत्याधुनिक मशीनों से गेहूं की पिसाई कर प्रतिदिन पांच टन आटा तैयार करती हैं। उनके प्लांट में तैयार होने वाले आटे प्रीतिभोज की बेहतरीन गुणवत्ता और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों जैसी आकर्षक पैकेजिंग ने जल्द ही बाजार में जगह बनानी शुरू कर दी।

आज प्रीति का प्रोजेक्ट शुरू हुए केवल 9 माह ही हुए हैं। जबलपुर और आसपास के बाजारों में प्रीति के प्रीतिभोज ने तेजी से लोकप्रियता की पायदानें चढ़ना शुरू कर दिया है। उनके उत्पाद को जबलपुर के गणतंत्र दिवस समारोह में उद्योग केन्द्र की झांकी में जगह मिली। प्रीति बताती हैं कि इससे उनके द्वारा तैयार किए जा रहे आटे को खासी पहचान मिली है। आज उनके प्लांट में 10 कर्मचारी काम करते हैं। इस उत्पाद की वेबसाइट भी है और प्रीतिभोज नाम से उन्होंने फेसबुक पेज भी तैयार किया है।

फ्लोर मिल से संबंधित सभी इंतजामों की देखरेख ओर कर्मचारियों से काम लेने की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रीति ही संभालती हैं।

सफलता की कहानी (जबलपुर)

 
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