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सफलता की कहानी

  

भारत को घर और रोजगार दोनो मिले

भोपाल : मंगलवार, अक्टूबर 10, 2017, 16:24 IST

भारत सिंह और उनकी पत्नी मोहर बाई विदिशा जिले के ग्राम पिपरिया पाराशर में रहते हैं। इनके पास ना घर था ना रोजगार। सरपंच सुश्री प्रीति शर्मा के सहयोग से इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना में अपना पक्का घर मिला। साथ ही आजीविका मिशन से अगरबत्ती उद्योग शुरू करने में भरपूर मदद भी मिली।

अब भारत सिंह का परिवार स्वंय के घर में रहने लगा है। रोजगार के लिए दूसरो पर आश्रित भारत सिंह का परिवार आजीविका मिशन के सम्पर्क में आया। इन्होंने आशा स्व-सहायता समूह का गठन किया जिसमें 12 सदस्य हैं। शुरू में इन्होंने अल्प बचत कर समूह के सदस्यों में बचत की भावना को बढ़ावा दिया। इसके बाद समूह की सदस्य एवं भारत सिंह की पत्नी मोहर बाई ने गांव में ही अगरबत्ती का उद्योग शुरू करने की मंशा जाहिर की।

मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना के तहत ग्यारसपुर की यूको बैंक के माध्यम से एक लाख रूपए का लोन मोहर बाई को स्वीकृत हुआ। मोहर बाई ने 60 हजार रूपए की अगरबत्ती बनाने की आटोमेटिक मशीन एवं 20 हजार रूपए की सामग्री खरीदी। इसके पहले बकायदा उन्होंने अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

अब पिपरिया पाराशर गांव में मोहर बाई और भारत सिंह 'अगरबत्ती उद्योग वाले' नाम से जाने जाते है। आशा ब्रांड के नाम से अगरबत्ती का विक्रय विदिशा शहर के साथ-साथ हाट बाजारों में समूह के सदस्यों द्वारा किया जा रहा है। मोहरबाई ने बताया कि अगरबत्ती के पैकेट 5, 10 और 20 रूपए में आसानी से बिक जाते हैं। हर रोज 150 से 200 रूपए की अगरबत्ती बिक रही है। मोहरबाई द्वारा प्रत्येक माह 5 हजार रूपए की किश्त बैंक में अदा की जा रही है।

सफलता की कहानी (विदिशा)

 
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