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सफलता की कहानी

  

ग्राम मौहरी के किसान रामकृष्ण बने जैविक दूत

भोपाल : सोमवार, अक्टूबर 16, 2017, 15:51 IST

खेतों में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए मध्यप्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। अनूपपुर जिले की जैतहरी जनपद के ग्राम मौहरी के किसान रामकृष्ण मिश्रा जिले में जैविक खेती के स्टार प्रचारक बन गये हैं। उनकी इस भूमिका से प्रभावित होकर आसपास के गाँव के किसानों ने भी जैविक खेती को अपनाया है।

मौहरी के किसान रामकृष्ण बताते हैं कि जैविक खेती के साथ कृषि की आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाए तो अच्छे परिणाम मिलते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के मैदानी अमले ने उन्हें वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने की सलाह दी थी। खेत में उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट नाडेप बनवाए और जैविक बीजों का प्रयोग शुरू किया। इस प्रयोग से 20 एकड़ जमीन में 2 लाख 50 हजार रुपये कीमत की धान और 2 लाख रुपये कीमत के गेहूँ का उत्पादन हुआ। रामकृष्ण मिश्रा अपने खेत में परम्परागत फसलों के साथ जायद और उद्यानिकी फसल भी ले रहे हैं। उनके खेतों में उद्यानिकी फसलों में अदरक, हल्दी और आलू की पैदावार होती है। जायद फसलों में वे अपने खेत में मूंग एवं उड़द की फसल लेते हैं। प्रगतिशील किसान रामकृष्ण मिश्रा के पास अब ट्रेक्टर और पॉवर ट्रेलर उपलब्ध है। पंक्तिबद्ध बुआई और कृषि यंत्रों का उपयोग उनकी प्रगति में काफी कारगर साबित हुआ है।

जैविक खेती के क्षेत्रफल और उत्पादन में पूरे देश में अग्रणी है मध्यप्रदेश। जैविक खेती का उद्देश्य मिट्टी, जल तथा हवा को प्रदूषित किए बिना निरंतर रूप से स्थिर उत्पादन लेना है। जैविक खेती में मिट्टी को एक जीवित माध्यम माना गया है। जैविक पद्धति मूल रूप से जैविक प्रक्रिया पर आधारित होती है। जैविक खेती न केवल जैव-विविधता बनाए रखने में सहायक है, बल्कि ईकोलॉजी के सिद्धांत के अनुरूप भी है।

सफलता की कहानी (अनूपपुर)

 
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