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सफलता की कहानी

  

डेयरी और गौशाला का मालिक है ग्रेजुएट शैलेष

भोपाल : मंगलवार, अक्टूबर 31, 2017, 16:40 IST
 

शैलेष श्रीवास्तव ग्रेजुएट है। वर्ष 2015 तक अनूपपुर जिले के अंतर्गत अमरकंटक में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रवेश-द्वार पर ढाबा चलाता था। आज 10 गायों की डेयरी का मालिक है, गौशाला भी तैयार कर ली है और विश्वविद्यालय के पास ही सांई डेली नीड्स एवं डेयरी के नाम से दुकान भी चलाता है। रोज 150 किलो गाय का दूध विश्वविद्यालय के स्टॉफ और आसपास के निवासियों को बेचता है। शैलेष को डेयरी और गौशाला का मालिक बनने में आचार्य विद्यासागर योजना का योगदान मिला।

केन्द्रीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के प्रवेश द्वार पर ढाबा चलाते हुए शैलेष ने महसूस किया कि विश्वविद्यालय परिसर से बाजार दूर होने के कारण विश्वविद्यालय परिवार और वहाँ के केंटीन संचालक को आवश्यकतानुसार दूध नहीं मिल पाता है। विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने शैलेष को डेयरी खोलने की सलाह दी, शैलेष ने भी इसके लिए अपना मन बना लिया। पशु चिकित्सा विभाग के स्थानीय अधिकारी से डेयरी व्यवसाय की तकनीकी जानकारी और जोखिम के बारे में चर्चा की क्योंकि उसके लिए यह व्यवसाय एकदम नया था।

शैलेष की रुचि और लगन से प्रभावित होकर पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी ने आचार्य विद्यासागर योजना में ऋण प्रकरण तैयार कराया और सेंट्रल बैंक ऑफ इण्डिया की लालपुर शाखा से 8 लाख रुपये का ऋण भी स्वीकृत कराया। ऋण राशि में एक लाख 50 हजार रुपये शासकीय अनुदान शामिल है।

पशु चिकित्सा विभाग ने शैलेष को दुधारु पशुओं की देखरेख, भोजन, चिकित्सा, रहने की व्यवस्था, दूध संग्रहण एवं वितरण आदि के बारे में बहुत अच्छी तरह समझाइश दी, जानकारी उपलब्ध कराई तथा प्रशिक्षण भी दिलवाया। शैलेष ने शुरू में पंजाब से होलीस्टीन (एचएफ) नस्ल की 5 गायें खरीदीं। प्राप्त प्रशिक्षण के अनुसार गायों की सेवा की तो हर गाय रोजाना 10 से 15 लीटर तक दूध देने लगी। यह दूध विश्वविद्यालय कैम्पस में ही अच्छे दाम पर बिकने लगा। छह माह बाद ही शैलेष को बैंक ने स्वीकृत ऋण की दूसरी किश्त की राशि दी तो उसने फिर 5 गाय खरीदीं।

ग्रेजुएट शैलेष श्रीवास्तव अब तक गायों की देखरेख और डेयरी संचालन में पारंगत हो चुका था। अब उसे गायों से रोजाना 150 लीटर दूध मिलने लगा है। शैलेष ने अपनी दुधारु गायों के भोजन के लिए डेयरी के पास की जमीन में पर्याप्त हरा चारा लगाया है और गौशाला भी तैयार कर ली है। खाली समय का उपयोग करने के लिए सांई डेली नीड्स एवं डेयरी के नाम से दुकान भी खोल ली है। इस दुकान में शैलेष अपने ढाबे तथा दूध से बनी खाद्य सामग्री कम दाम पर बेचता है।

सफलता की कहानी (अनूपपुर)

 
सफलता की कहानी
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