| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | हिन्दी | English | संपर्क करें | साइट मेप
You Tube
पिछला पृष्ठ

सफलता की कहानी

  

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ने लौटाई बच्चों की खोई मुस्कान

भोपाल : बुधवार, नवम्बर 1, 2017, 16:45 IST

राज्य शासन द्वारा संचालित राष्ट्रीय बाल स्वाथ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ने डिण्डोरी जिले के 4 बच्चों की न केवल खोई मुस्कान लौटाई है बल्कि उनके परिवारों में भी खुशी का माहौल वापस आ गया है। आरबीएसके में 3 वर्ष की अंजली मेहरा धुर्रा गांव, 2 वर्ष के तनिष्क बर्मन ग्राम विक्रमपुर, 5 वर्ष की कु. जागेश्वरी सिंह ग्राम आनाखेड़ और 2 वर्षीय धनंजय सिंह ग्राम भाजीटोला गंभीर हृदय रोग से ग्रसित थे। आरबीएस के मोबाइल दल ने न केवल इन बच्चों को खोजा बल्कि कार्यक्रम के तहत मुंबई में इनके ऑपरेशन के लिये हरसंभव मदद की। मोबाइल दल जिले के स्कूल और आँगनबाड़ी केन्द्रों में भ्रमण कर 18 वर्ष तक के गंभीर रोग से ग्रसित बच्चों को चिन्हित कर शासन द्वारा चिन्हित अस्पतालों में उनके उपचार के लिये मदद करता है।

तनिष्क के पिता श्री दुर्गेश बर्मन ने बताया कि मुंबई में हुए सफल ऑपरेशन के बाद उनका बच्चा अच्छी जिन्दगी जीने लगा है। पहले तनिष्क अन्य बच्चों की तरह खेलकूद नहीं पाता था और उनके पास इतनी राशि भी नहीं थी कि बड़े शहर के अस्पताल में अपने बच्चे का ऑपरेशन करा सकें। एक दिन मोबाइल दल ने उनसे सम्पर्क कर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके बाद दुर्गेश बर्मन ने जिला चिकित्सालय से सम्पर्क किया। फिर मुंबई के अस्पताल में तनिष्क का नि:शुल्क उपचार किया गया। अब तनिष्क सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद रहा है।

इसी तरह कु. अंजली, धनंजय और कु. जागेश्वरी के माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे गंभीर हृदय रोग से पीड़ित होने के कारण सामान्य बच्चों की तरह न तो हंसते-खेलते थे और न ही सामान्य बच्चों जैसा व्यवहार करते थे। ऑपरेशन के बाद स्थिति पूरी बदल गई है। बच्चों की खुशी और स्वास्थ्य देखकर इन बच्चों के परिवार की चिंताएँ अब कम हो गई हैं।

सफलता की कहानी (डिण्डोरी)

 
सफलता की कहानी
बहुत पसंद किये जा रहे हैं लईक के प्लास्टिक बैग
रामसुख ने बंजर जमीन में शुरू की अनार की खेती
रूबी खान ने खरगोन में स्थापित किया है नीम उद्योग
प्रधानमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना से ऊषारानी बारस्कर बनी उद्योगपति
"रोशनी" की नई किरण रजनी बाई
अनवर मियाँ अब ड्रायवर नहीं, ई-ऑटो के मालिक हैं
स्वरोजगार स्थापित कर झल्लूराम ने दिया दूसरों को रोजगार
अयूब खां ने प्लास्टिक मल्चिंग विधि अपनाकर खेती को बनाया लाभ का धंधा
उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्र की मिसाल है ग्राम छतरपुरा का सरकारी स्कूल
बीड़ ग्राम में मछली पालन बना अतिरिक्त आमदनी का सशक्त जरिया
महिला स्व-सहायता समूहों ने ग्रामीणों को साहूकारों से दिलाई मुक्ति
बसन्तेश्वरी कस्टम हायरिंग सेन्टर का मालिक बना अनिल गुजराती
"कम्प्यूटर वाली दीदी" बनी मेघा
वेल्डर-फिटर की ट्रेनिंग के बाद 40 युवाओं को मिला देश की प्रतिष्ठित कम्पनी में रोजगार
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ने लौटाई बच्चों की खोई मुस्कान
डेयरी और गौशाला का मालिक है ग्रेजुएट शैलेष
"अमरदीप मसाला बना स्व-सहायता समूह की पहचान
चेहरे के साथ जिंदगी भी हुई खूबसूरत
स्वच्छता एवं आंगनबाड़ी गतिविधियों की ब्राँड एम्बेसेडर बनी काशीबाई
न बेरोजगार न कर्जदार, अब मालिक है धीरज कुमार
बलराम ताल ने भरी परिवार में खुशियाँ
दिव्यांग रतनलाल भील को मिला पक्का घर
युवा उद्यमी सीमा बनी सशक्त महिला की मिसाल
आत्म निर्भर हुए दिव्यांग मुकेश
सार्टेक्स प्लांट की मालकिन है अंजू भंसाली
रेखा पन्द्राम की मेहनत रंग लाई : कोदो-कुटकी की फसल से किसान हुए आत्म-निर्भर
स्टील फेब्रिकेशन वर्क्स की मालकिन है ज्योति
अच्छे स्कूल में पढ़ रही हैं ज्योति और जानकी की बेटियॉं
ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है सम्मानजनक रोजगार
ग्राम पथरिया का होनहार वीरेन्द्र बन रहा है डाक्टर
1 2 3 4 5 6 7 8 9