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सफलता की कहानी

  

बीड़ ग्राम में मछली पालन बना अतिरिक्त आमदनी का सशक्त जरिया

भोपाल : शनिवार, नवम्बर 11, 2017, 20:50 IST

 

अनूपपुर जिले के ग्राम बीड़ में अच्छी अतिरिक्त आमदनी के लिये ग्रामीणों में मछली पालन के प्रति रूझान बढ़ रहा है। नारायण सिंह जैसे 12 महिला एवं पुरुषों ने मिलकर मछुआ समूह बनाकर ग्राम में मछली पालन करना प्रारम्भ किया है। समूह ने ग्राम पंचायत के चार तालाबों के साथ-साथ लगभग 4.00 हेक्टेयर के नकटी जलाशय में भी मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया गया है। वर्ष 2013-14 से यह समूह मछली पालन विभाग की मदद और आपसी सहयोग से मछली बीज का तालाबों एवं जलाशय में संचयन एवं उत्पादन कर रहा है।

समूह के सदस्य स्वयं जाल की मदद से मछली निकाल कर नजदीक के लपटा, खूंटाटोला, वेंकटनगर और जैतहरी आदि गाँवों के हाट-बाजारों में बिक्री कर अपने सदस्यों को लाभ दिलाने के साथ-साथ समूह के खाते में बचत भी करते है। इससे सदस्यों की अच्छी वार्षिक आय हो जाती है।

अब यह मछुआ समूह 'तिपान मछुआ सहकारी समिति' में परिवर्तित हो गया है। इसकी सदस्य संख्या बढ़कर 25 हो गई है। समिति ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में मछली पालन विभाग से 0.5 हेक्टेयर जल क्षेत्र लेकर 5 लाख रूपये की लागत से 4 नर्सरी का निर्माण किया है। उन्हें मिली वित्तीय मदद में 2.50 लाख रुपये अनुदान और 2.50 लाख रुपये खूंटाटोला के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का ऋण है। विगत 4 साल से ये समूह मैहर एवं छत्तीसगढ़ से मछली के स्पान लेकर संचयन करते हैं और फिर फ्राय तथा फिंगरलिंग में उसे विकसित कर बिक्री करते हैं। बचे हुए बीज का अपने तालाबों और जलाशय में संचयन करते हैं। इससे समिति को मछली बीज विक्रय से तो लाभ मिल रहा है, साथ-साथ मत्स्य विक्रय और आसपास के तालाबों से भी मछली पालन से वर्ष में 3 से 4 लाख रुपए की आमदनी भी मिल रही है। गाँव में मछली पालन ग्रामीणों के लिये अतिरिक्त आमदनी का सशक्त जरिया बन गया है।

सफलता की कहानी (जिला अनूपपुर)

 
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