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सफलता की कहानी

  

भावांतर भुगतान योजना ने खेती-किसानी को बनाया लाभकारी व्यवसाय

भोपाल : मंगलवार, नवम्बर 28, 2017, 14:35 IST

गोविन्द पटेल, कृष्ण कुमार और परसराम पटेल दमोह जिले के वो किसान हैं जो अब मान गये हैं कि भावांतर भुगतान योजना ने खेती-किसानी को लाभकारी व्यवसाय बना दिया है। यह बात इन किसानों को तब समझ में आई, जब मंडी में फसल बेचने गये। व्यापारी ने समर्थन मूल्य पर इन किसानों की फसल खरीदी। इन्होंने भावांतर भुगतान योजना में अपना पंजीयन कराया तो समर्थन मूल्य और मॉडल रेट के अन्तर की राशि सीधे इनके बैंक खातों में पहुंची। इन किसानों को जब यह मालूम हुआ कि यह भावांतर की राशि है जो मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं इनके खातों में पहुंचाई है, तब पहले तो अचंभित हुए फिर मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद दिया। #

गोविन्द पटेल दमोह जिले के बटियागढ़ विकासखंड में ग्राम सकतपुर में अपनी जमीन पर खेती करते हैं। इन्हें हाल ही में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अंत्योदय मेले में इनकी फसल की भावांतर राशि 1,20,072 रुपये का स्वीकृति-पत्र दिया। गोविन्द को बैंक से खबर मिली कि स्वीकृति-पत्र में लिखी धनराशि उनके खाते में आ गई है। यह जानकर इन्होंने अगली फसल की योजना बना डाली।

कृष्ण कुमार ने अपनी उड़द की फसल दमोह कृषि मंडी में बेची तो उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये भावांतर राशि सीधे बैंक खाते में मिली। कृष्ण कुमार अब इस योजना को किसानों और सरकार के बीच बिचौलियों को समाप्त करने का सफल उपाय मानने लगे हैं। ग्राम मोठा के परसराम पटेल पथरिया में अंत्योदय मेला देखने गये। मुख्यमंत्री ने जब उन्हें बुलाकर उनकी फसल की बिक्री की भावांतर राशि 1,01,207 रुपये का स्वीकृति-पत्र दिया तो गदगद हो गये। इन्होंने अपने 17 एकड़ रकबे में उड़द बोई थी, 40-42 क्विंटल उड़द हुई थी जिसे कृषि उपज मंडी में बेचा था।

दमोह जिले में खेती-किसानी के लिए अच्छे खाद-बीज और सिंचाई संसाधनों की व्यवस्था से किसान खुश हैं। जिले में सिंचाई परियोजनाओं से इस वर्ष के अंत तक एक लाख हेक्टेर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलने लगेगी। यहां के किसान अब खेतों में नहर और पाइप लाइन के जरिये सिंचाई करते हैं। पंचम नगर सिंचाई परियोजना का काम पूरा हो चुका है और साजली तथा सतधरु सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत हो गई हैं।

 सफलता की कहानी (दमोह)

 
सफलता की कहानी
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