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सफलता की कहानी

  

कृषि मंडियों में मिल रही फसल की सही कीमत

भोपाल : बुधवार, नवम्बर 29, 2017, 14:43 IST

बारिश की नाराजगी के कारण उमरिया जिले में करकेली विकासखंड के ददरी गाँव के 32 वर्षीय किसान मनोज राठौर की सोयाबीन और उड़द के फसल के दानों की चमक चली गई थी। मनोज चिंतित थे कि इसके दाम कम ही मिलेंगे। कृषि उपज मंडी में अपनी फसल लेकर पहुँचे तो खुली नीलामी की व्यवस्था देखकर राहत की सांस ली। मंडी में मनोज राठौर का 18.94 क्विंटल सोयाबीन 38,034 रूपये और 14.31 क्विंटल उड़द 31,683 रूपये में बिकी। इस तरह मनोज को फसल बहुत अच्छे दाने नहीं होने के बावजूद सोयाबीन का दो हजार रूपये प्रति क्विंटल तथा उड़द का 2300 रूपये प्रति क्विंटल के भाव से नगद भुगतान मिला।

मनोज राठौर को यह फायदा सिर्फ भावांतर भुगतान योजना में फसल का पंजीयन कराने और कृषि उपज मंडी में जाकर फसल बेचने के कारण ही मिला है। मनोज ने इसके लिये राज्य सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पहले तो सेठ साहूकारों को फसल बेचना पड़ता था और वे अपनी मनमर्जी की कीमत पर खरीदते थे। कहीं कोई सुनवाई नहीं थी। अब कृषि उपज मंडी में अधिकारी अपनी देखरेख में फसल बिकवाते है। इससे किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है। मनोज राठौर को भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन कराने के कारण योजना के दूसरे चरण में भावांतर राशि का भुगतान मिलना भी सुनिश्चित है।

उमरिया के जिला कलेक्टर ने गल्ला व्यापारियों को साफ कह दिया है कि किसानों की उपज दुकानों में नहीं, कृषि उपज मंडी में आकर खरीदें। कलेक्टर की इस व्यवस्था के फलस्वरूप गल्ला व्यापारी मंडियों में आकर सरकारी अधिकारियों की देखरेख में किसानों की उपज खरीदने लगे है। इससे किसानों को दर-दर भटकने से मुक्ति मिली है और उपज की सही कीमत भी मिलने लगी है।

सफलता की कहानी (उमरिया)

 
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