| اردو خبریں | संस्कृत समाचारः मुख्य पृष्ठ | हिन्दी | English | संपर्क करें | साइट मेप
You Tube
पिछला पृष्ठ

सफलता की कहानी

  

किसान अब खेती-किसानी को घाटे का धंधा नहीं मानते

भोपाल : शुक्रवार, दिसम्बर 1, 2017, 15:30 IST

झाबुआ और अनूपपुर जिले के किसान अब खेती-किसानी को घाटे का धंधा नहीं मानते। भावांतर भुगतान योजना से लाभांवित होने के बाद इन जिलों के किसानों की विचारधारा में यह बदलाव आया है। इस योजना से अभी तक झाबुआ जिले में 1078 और अनूपपुर जिले में 173 किसानों के बैंक खातों में उनकी उपज की भावांतर राशि पहुंच चुकी है।

झाबुआ जिले में पेटलावद विकासखंड के ग्राम मोहनकोट की किसान माया कुंवर ने कभी नहीं सोचा था कि खेती-किसानी से फायदा भी होगा क्योंकि मौसम की नाराजगी तथा खाद-बीज, पानी-बिजली की निरंतर अनिश्चय की स्थिति से उनका आये दिन सामना होता था। इस बार माया कुंवर ने अपनी 125.86 क्विंटल सोयाबीन पेटलावद मंडी में बेचकर व्यापारी से भुगतान लेकर रसीद प्राप्त की और भावांतर योजना में पंजीयन करवाया। जब इनके बैंक खाते में 59 हजार 154 रुपये की राशि पहुंचने की जानकारी मिली तो आश्चर्यचकित हुईं क्योंकि उपज की कीमत तो मंडी में मिल चुकी थी। बैंक वालों ने इन्हें बताया कि यह राशि आपकी उपज की राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य और मॉडल रेट के अन्तर की भावांतर राशि है। यह भावांतर राशि राज्य सरकार ने दी है। यह जानकर माया कुंवर और उनके परिवार के लोग बहुत खुश हुए तथा सरकार को हृदय से धन्यवाद भी दिया।

अनूपपुर जिले में इस वर्ष मंडी दरों में गिरावट आने से किसान चिंतित थे लेकिन भावांतर भुगतान योजना ने किसानों को इस चिंता से मुक्त कर दिया है। योजना की जानकारी मिलने पर किसानों ने अपनी उपज मंडी में जाकर सरकारी अधिकारियों की देख-रेख में गल्ला व्यापारियों को बेची तो समर्थन मूल्य मौके पर ही मिला। साथ ही उनकी फसल के समर्थन मूल्य और मॉडल रेट के बीच की अन्तर की राशि उनके बैंक खातों में भावांतर राशि के रूप में पहुंची। जिले के कृषक रामकृपाल पटेल ने यह जानकारी देते हुए राज्य सरकार को साधुवाद दिया। रामकृपाल ने जब अपनी उड़द की फसल मंडी जाकर बेची और उन्हें 9 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ, तब जाकर भावांतर भुगतान योजना का फायदा उन्हें समझ में आया।

अनूपपुर जिले में 173 किसानों ने अभी तक भावांतर भुगतान योजना में मंडियों में जाकर अपनी अधिसूचित फसलों का विक्रय किया है। जिले के 14 किसानों ने 29.947 क्विंटल उड़द, 6 किसानों ने 1.575 क्विंटल तिल, 127 किसानों ने 49.15 क्विंटल मक्का और 26 किसानों ने 308.847 क्विंटल सोयाबीन कृषि उपज मंडियों में विक्रय किया है।

सफलता की कहानी (जिला अनूपपुर, झाबुआ)

 
सफलता की कहानी
जैविक खेती से किसान चित्तरंजन को मिली अलग पहचान
मत्स्य पालकों की आय में 10 गुना वृद्धि
मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना की मदद से शिवराम की आय हुई दुगुनी
अब पक्के मकान में रहता है रामकिशन का परिवार
विद्युत शैलचॉक से बढ़ी उदयलाल की आमदनी
भावांतर भुगतान योजना में मक्का के मिल रहे अच्छे भाव
स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित चिक्की ने महिलाओं को दिया आर्थिक संबल
सरसों और प्याज की खेती में अव्वल भिण्ड जिले के किसान
अन्त्यावसायी स्व-रोजगार योजना से कपड़ा व्यवसायी बना राजेश
गौ-संवर्धन योजना से किसान बना धनवान
किसानों को मिल रहा उपज का लाभकारी मूल्य
रेखा को जन्म के 7 साल बाद मिली आंखों की रोशनी
फसलों के भाव में उतार-चढ़ाव की चिन्ता से मुक्त हुए किसान
सौरभ का रेडीमेड गार्मेन्ट पन्ना में अब अपरिचित नहीं रहा
माँ के लिए नौकरी छोड़ी तो स्व-रोजगार योजना बनी सहारा
भावांतर भुगतान योजना से निराशा से मुक्त हुए किसान
स्वरोजगार अपनाकार आरती ने दूसरों को दिया रोजगार
फसल की लाभकारी कीमत मिलने की गारंटी है भावांतर भुगतान योजना
सुमरी बाई का है पक्का घर और शौचालय
बेवा कुसमा बाई को मिला पक्का घर
किसानों को मिलीं कीमतें बेहतर- अफवाहें हुईं बेअसर
भावांतर भुगतान योजना से किसानों को मिला आर्थिक संबल
खरगोन में है प्रदेश का पहला रंगीन मछली उत्पादन केंद्र
कृषि उपज मंडियों में किसानों को उपज की मिल रही सही कीमत
किसान अब खेती-किसानी को घाटे का धंधा नहीं मानते
स्वच्छता के रोल मॉडल तुषार को उपहार में मिली सायकिल
भावांतर राशि पाकर खुश हैं रीवा जिले के किसान
सूखा प्रभावित किसानों को भावांतर भुगतान योजना से मिली राहत
कृषि मंडियों में मिल रही फसल की सही कीमत
स्वच्छता अभियान के रोल मॉडल दिव्यांग तुषार को मिला डिजिटल श्रवण यंत्र
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10