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सफलता की कहानी

  

भावांतर भुगतान योजना से किसानों को मिला आर्थिक संबल

फसल की बुआई से बिक्री तक किसान के साथ सरकार

भोपाल : रविवार, दिसम्बर 3, 2017, 14:23 IST

प्रदेश की 70 फीसदी आबादी गाँवों में रहती है। इनमें से अधिकांश आबादी की जीविका का आधार कृषि है। राज्य सरकार किसानों को अर्थ-व्यवस्था का अभिन्न अंग मानती है। इसीलिये फसल की बुआई से लेकर बिक्री तक हर कदम पर किसान के साथ है सरकार। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, बीज-खाद, पानी, कीटनाशक आदि की समय पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं। अब प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य दिलाने के साथ-साथ अन्य राज्यों से तुलना कर फसल का लाभकारी मूल्य भी दिलाया जा रहा है। किसानों को बाजार भाव के उतार-चढ़ाव के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई करने के लिये यह व्यवस्था प्रदेश की हर कृषि उपज मंडी में की गई है। इस किसान हितैषी व्यवस्था का नाम है भावांतर भुगतान योजना। इस योजना में किसान को उपज के वाजिब दाम के साथ-साथ भावांतर राशि राज्य सरकार दे रही है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के किसान चिंता मुक्त हो गए हैं। फसल के समर्थन मूल्य तथा मॉडल रेट के बीच अंतर की यह राशि भावांतर राशि कहलाती है।

बुन्देलखंड के पन्ना जिले में सूखा के कारण कृषि उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। यहां के किसान फसल के कम दाम मिलने से बहुत परेशान हो गये थे। ऐसे में भावांतर भुगतान योजना यहां के किसानों के लिये वरदान साबित हुई है। जिले के पवई विकासखण्ड के कृषक गोरेलाल पटेल ने अपनी 25.59 क्विंटल उड़द पवई मंडी में बेची थी। इन्हें उड़द का 2250 रूपये प्रति क्विंटल की दर से 72 हजार 905 रूपये भुगतान मिला। इस भाव से गोरेलाल और उनका परिवार संतुष्ट नहीं थे, खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे। गोरेलाल ने भावांतर भुगतान योजना में अपनी फसल का पंजीयन कराया तो राज्य सरकार ने इन्हें 68 हजार 616 रूपये भावांतर राशि सीधे इनके बैंक खाते में जमा कराई। अप्रत्याशित मदद से गोरेलाल पटेल को आर्थिक संबल मिला। अब इन्हें भरोसा हो गया है कि रबी की फसल आसानी से ले सकेंगे। साथ ही, परिवार की जरूरतें भी आसानी से पूरी होंगी। इसी तरह पन्ना विकासखण्ड के ग्राम मुराछ के किसान सूरज सिंह को उनकी फसल की भावांतर राशि 80 हजार 640 रूपये और गुनौर विकासखण्ड के ग्राम हिनौतीभेड के किसान राम शिरोमणि पटेल को उनकी फसल की भावांतर राशि 60 हजार 96 रूपये उनके बैंक खातों में मिली है।

इंदौर जिले में विकासखण्ड सांवेर के ग्राम सिमरोल के किसान श्री दयाराम भागीरथ चौधरी ने अपनी 248 क्विंटल सोयाबीन कृषि मंडी में जाकर बेची। भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन करने पर इन्हें एक लाख 28 हजार 349 भावांतर राशि मिली, तो इनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब निश्चित होकर अगली फसल लेने तैयारी कर रहे हैं। इंदौर जिले में अभी तक 3 हजार 123 किसानों को 3 करोड़ 30 लाख 75 हजार 336 रूपये भावांतर राशि का भुगतान किया जा चुका है।

भिण्ड जिले की मेहगांव तहसील के ग्राम रजगड़ियां के किसान सूरतराम ने अपनी 8 क्विंटल उड़द कृषि मंडी में बेची। भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन कराने से इन्हें अपनी उपज की 18 हजार 800 रूपये भावांतर राशि मिली। अब सूरतराम खुशी-खुशी रबी की फसल की तैयारी में लग गए हैं।

सफलता की कहानी (पन्ना, इंदौर, भिण्ड)

 
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