सक्सेस स्टोरीज

नेत्र ज्योति के साथ मंजू के जीवन में भी लौटीं खुशियाँ

भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 12, 2018, 17:15 IST

देवास जिले के ग्राम डोकाकुई निवासी मंजू की ज़िंदगी हँसी-खुशी चल रही थी कि 5 वर्ष पहले उसे टायफाइड हुआ और धीरे-धीरे दोनों आँखों से दिखाई देना बंद हो गया। चालीस वर्षीय मंजू के जीवन में जैसे अँधेरा ही अँधेरा छा गया। कुछ लोगों ने उचित इलाज कराने की भी सलाह दी पर मंजू के परिवार का मानना था कि टायफाइड के दौरान उसने किसी नुक्ते में खाना खा लिया, इसलिये माता के प्रकोप से उसकी आँखों की रोशनी चली गई। परिवार अनेक धर्म-स्थल पर जाकर आँखें ठीक होने की मन्नत माँगता रहा पर कुछ नहीं हुआ। परिवार थक-हारकर बैठ गया।

एक तरफ गरीबी और दूसरी तरफ घर की धुरी गृहणी की आँखों की रोशनी जाना परिवार में जैसे सब-कुछ छिन्न-भिन्न हो गया था। बच्चों के पालन-पोषण पर इसका बहुत खराब असर पड़ रहा था। तभी एक दिन स्वास्थ्यकर्मी मंजू के घर पहुँचे और उसे समझा-बुझाकर कन्नौद के सिविल अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों ने मंजू और उसके परिवार वालों को समझाया कि देवास जाकर आँखों की जाँच करवाओ तो संभवत: आँखें ठीक हो जायेंगी। पर परिवार मान कर बैठा था कि अब कुछ नहीं हो सकता।

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी फिर भी निरंतर प्रयास करते रहे। गत 22 दिसम्बर, 2017 को सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग द्वारा कन्नौद शासकीय स्कूल में शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी पुन: मंजू को लेकर शिविर में गये। शिविर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.के. सरल ने उसका परीक्षण किया। डॉ. सरल ने उसे समझाया कि यह माता का प्रकोप नहीं बल्कि उसकी आँखों में मोतियाबिंद हुआ है। ऑपरेशन से उसकी आँखों की रोशनी वापस आ जायेगी। बमुश्किल परिवार को ऑपरेशन के लिये राजी किया गया। परिवार ने कहा कि वे ऑपरेशन का खर्च नहीं उठा सकते।

डॉ. सरल ने उन्हें बताया कि देवास आने-जाने का खर्च, अस्पताल में जाँच, ऑपरेशन, उपचार, दवाइयाँ और भोजन सब नि:शुल्क रहेगा। मंजू का ऑपरेशन वह स्वयं करेंगे। इस पर मंजू एवं परिजन मान गये। गत 27 दिसम्बर को डॉ. सरल ने देवास में मंजू की एक आँख का सफल ऑपरेशन किया। उसके बाद 30 दिसम्बर को दूसरी आँख का भी ऑपरेशन सफल रहा।

मंजू और उसका परिवार आज बहुत खुश है। उसकी आँखों की रोशनी वापस आ गई है। घर का वातावरण बदल गया है। पूरा परिवार डॉ. सरल, राज्य शासन और अस्पताल के कर्मचारियों को दुआ देते नहीं थक रहा है।

सक्सेस स्टोरी (देवास)


सुनीता दुबे
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