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स्प्रिंकलर सिंचाई से अमरूद और मूसली की लाभकारी खेती

भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 12, 2018, 18:22 IST

टीकमगढ़ जिले में जतारा जनपद के ग्राम बगौरा के किसान गोकुल रजक को सूखे के कारण खरीफ और रबी फसलों की पारम्परिक खेती में लगातार नुकसान हो रहा था। इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई थी। ऐसे हालात में उद्यानिकी विभाग की मदद से उन्होंने अमरूद के पौधे लगाए। पौधों की बीच की खाली जगह में सफेद मूसली की खेती की। दो-तीन साल की मेहनत में ही अब इनके खेतों में लाखों की उपज पैदा होने लगी है।

किसान गोकुल ने करीब 3 साल पहले उद्यानिकी विभाग में सम्पर्क किया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि मेरे पास जमीन तो है, लेकिन पानी की कमी है। विद्युत पम्प केवल 15 से 20 मिनट चलता है। किसान की बात सुनने के बाद अधिकारियों ने उन्हें अमरूद का बगीचा लगाने की सलाह दी। गोकुल ने एक एकड़ जमीन में 140 अमरूद के पौधे लगाए। इसमें करीब 15 हजार रूपये की लागत आई। दो साल तक देख-रेख करने के बाद पेड़ों में फल लगना शुरू हो गए। जब बाजार में फसल बेची तो पहले की तुलना में आय में करीब 4 गुना बढोत्तरी हो गई। इसके बाद उद्यानिकी अधिकारी से सम्पर्क कर पेड़ों के बीच में सफेद मूसली की खेती भी शुरू कर दी। इसमें करीब 5 हजार रूपये का खर्च आया। अब कृषक गोकुल रजक की सालाना आमदनी करीब 3 लाख रुपये हो गई है।

क्षेत्र में पानी कम होने के कारण कृषक गोकुल रजक अमरूद के पौधों और सफेद मूसली की फसलों में ड्रिप सिस्टम और स्प्रिंकलर प्रणाली से सिंचाई करते हैं। इससे कम पानी होने पर भी फसलों की बेहतर सिंचाई संभव हो जाती है। साथ ही, उत्पादन भी भरपूर होता है।

टीकमगढ़ जिले में शासन की ओर से किसानों को सब्जी और मसाले की खेती के लिए सब्सिडी दी जा रही है। प्रधानमंत्री ड्रिप और स्प्रिंकलर योजना के तहत सामान्य, सीमांत और लघु किसानों को 60 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। जिले में गोकुल रजक अब किसानों के लिये मिसाल बन चुके हैं। जिले के अन्य किसानों को गोकुल रजक के खेत पर ले जाकर समय-समय पर नई तकनीक के बारे जानकारी दी जाती है।          


सुनीता दुबे
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