सक्सेस स्टोरीज

प्रतिष्ठित स्कूलों में अनुसूचित वर्गों के बच्चों की शिक्षा हुई आसान

भोपाल : शुक्रवार, फरवरी 9, 2018, 15:07 IST

मध्यप्रदेश ने वर्ष 2002-03 में प्रतिष्ठित स्कूलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के प्रवेश की योजना प्रारंभ हुई। इस योजना से इन वर्गों के बच्चों को लाभान्वित करने के लिये इनके अभिभावकों की वार्षिक आय पूर्व में 2 लाख, इसके बाद 3 लाख और अब 5 लाख रुपये वार्षिक निर्धारित की गई है। प्रतिष्ठित स्कूलों में प्रवेश के लिए हर वर्ष खाली सीटों के आधार पर जनजातीय कार्य विभाग विज्ञापन प्रकाशित करवाता है, जिसमें 5 अनूसूचित जाति और 5 जनजाति वर्ग के छात्र-छात्रा का प्रवेश होना होता है। प्रवेश परीक्षा जिला और संभाग स्तर पर आयोजित की जाती है। मेरिट के आधार पर प्रदेश के प्रतिष्ठित स्कूलों में इन बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। इस योजना में हायर सेकण्डरी स्कूल तक शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करती है।

मध्यप्रदेश सरकार की इस योजना का खरगोन जिले में सरकारी नौकरी में छोटे पद पर कार्यरत कर्मचारियों, किसानों, छोटे व्यापारियों आदि ने भरपूर लाभ लिया है। खरगोन कलेक्टर कार्यालय के एनआईसी विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रूपसिंह खरते के पुत्र अक्षय को म.प्र. शासन की इसी योजना से दिल्ली पब्लिक स्कूल इंदौर में कक्षा 3 में वर्ष 2004-05 में प्रवेश मिला। अक्षय आज तिरुचन्नापल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में एलएलबी कर रहे है। खरगोन के सहायक शिक्षक रूमिसिंह डावर की पुत्री रचना डावर का तीसरी कक्षा में वर्ष 2007-08 में दिल्ली पब्लिक स्कूल में और दिशा डावर का चौथी कक्षा में वर्ष 2008-09 में डेली कॉलेज में इसी योजनान्तर्गत प्रवेश हो पाया। दोनों ने इन स्कूलों से शिक्षा पाई और आज रचना रीवा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही तथा दिशा देश के दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ आर्ट्स कर रही है। सहायक शिक्षक के पुत्र दीपक गंदराम चौहान को चौथी कक्षा में वर्ष 2003-04 में डैली कॉलेज में प्रवेश मिला। दीपक वर्तमान में सागर से एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मगरिया गांव के लिपिक राजेन्द्र शिंदे की पुत्री ने भी वर्ष 2007-08 में इसी योजना के अन्तर्गत 5वीं कक्षा में डीपीएस स्कूल में प्रवेश पाया और अब दिल्ली के कॉलेज से साइक्लॉजी ऑनर्स की शिक्षा प्राप्त कर रही है। इसी वर्ष जय ओमप्रकाश वर्मा ने चौथी कक्षा में डीपीएस में प्रवेश पाया है। इन्हीं की तरह वर्ष 2005-06 में सहायक शिक्षक राम डावर के पुत्र गौरव और पुत्री सलोनी को डीपीएस स्कूल में प्रवेश मिला। वर्तमान में गौरव बड़ोदरा से आईआईआईटी कर रहे हैं और सलोनी महू से वैटनरी में डिग्री कर रही हैं। स्व. मालसिंह की पुत्री शिवांगी निराले का 5वीं कक्षा में 2008-09 में डीपीएस में प्रवेश हुआ। शिवांगी आज भोपाल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में वकालत की पढ़ाई कर रही है। अतुल मालसिंह वास्कले ने डेली कॉलेज में कक्षा 5वीं में 2008 में प्रवेश ‍िलया। यहां हायर सेकेण्डरी तक शिक्षा लेने के बाद अतुल अब भोपाल के मौलाना अब्दुल आजाद विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग कर रहे हैं। अनुराग प्रकाश घोंसले का तीसरी कक्षा में वर्ष 2007-08 में प्रवेश हुआ। अनुराग आज सागर से एमबीबीएस कर रहे हैं।

वर्तमान में भी प्रतिष्ठित स्कूलों में प्रवेश की इस योजना के तहत खरगोन जिले के कुछ छात्र-छात्राएं शासन के खर्चे पर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इनमें वनरक्षक सुखलाल जमरे के पुत्र निलेश काक डीपीएस स्कूल में वर्ष 2010-11 में कक्षा तीसरी में प्रवेश हुआ और आज कक्षा 10वीं में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। कसरावद के किसान अनिल आड़तिया के पुत्र आशीर्वाद भी योजना के तहत प्रवेश लेकर आज कक्षा 8वीं में पढ़ाई कर रहे हैं। कसरावद के ही विनोद अड़तिया के पुत्र भी योजना के तहत डीपीएस में शिक्षा पूरी कर रहे है। विनोद की पुत्री स्वाति भी डेली कॉलेज में शिक्षा प्राप्त कर रही है।

सक्सेस स्टोरी (खरगोन)


ऋषभ जैन
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