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म.प्र. स्थापना दिवस पर विशेष

पशुधन संवर्धन की सशक्त पहल गोकुल महोत्सव

भोपाल : गुरूवार, अक्टूबर 27, 2016, 18:52 IST
 

मध्यप्रदेश संभवत: देश का पहला राज्य है, जो अपने 3500 से अधिक गाँव में पशुओं और पशु-पालकों के लिये महीने भर का शिविर लगा रहा है। 'गोकुल महोत्सव' में होने वाले इन शिविरों की शुरूआत पशु-पालन मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य गोवर्धन पूजा-31 अक्टूबर को खरगोन जिले के सनावद में राज्य-स्तरीय शिविर से करेंगे। हर जिले, विकासखण्ड और गाँव में होने वाले यह शिविर 30 नवम्बर तक चलेंगे। इन शिविरों में पशु-चिकित्सा, उपचार, टीकाकरण, पशु बीमा, दवा वितरण, कृत्रिम गर्भाधान, शल्य-क्रिया, बधियाकरण, उन्नत चारा तकनीक, विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जायेगा।

गोकुल महोत्सव का उद्देश्य देशी नस्ल का सुधार करते हुए प्रदेश में स्वस्थ एवं उन्नत किस्म के पशु और भरपूर मात्रा में दुग्ध उत्पादन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में कुल 3 करोड़ 63 लाख पशु हैं। इनमें एक करोड़ 96 लाख गौ-वंशीय, 81 लाख भैंस-वंशीय और 60 लाख बकरा-बकरी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की अतिरिक्त आय का एक बहुत बड़ा साधन पशु-पालन है। शहरी क्षेत्रों में भी डेयरी उद्योग उन्नति कर रहा है। ऐसे में प्रदेश के पशु-पालकों को पशुपालन और चारा उत्पादन की अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करते हुए उन्हें उन्नति के नये आयाम देने के प्रयास किये जा रहे हैं।

गोकुल महोत्सव में पशु-पालकों की सुविधा को देखते हुए हॉट-बाजारों में शिविर लगेंगे। इनमें विधायक, पंच-सरपंच, जिला पंचायत सदस्य और गणमान्य नागरिक भी शामिल होंगे। शिविरों में पशु-पालकों को पशुओं के लिये चिकित्सा सुविधा, रोग प्रतिबंधात्मक टीकाकरण, नस्ल सुधार के लिये निकृष्ट सांडों का बधियाकरण, गाय-भैंसों के बाँझपन का उपचार, कृमि-नाशक औषधि का वितरण और हितग्राही-मूलक योजनाओं के प्रकरण तैयार किये जायेंगे। पशु-पालकों की आय बढ़ाने के उपायों, गोबर खाद, गोबर गैस प्लांट, नाडेप, ग्रीष्म ऋतु में चारे की उपलब्धता, पौष्टिक चारा, भूसा, यूरिया उपचार और संतुलित आहार की जानकारी भी दी जायेगी। वैज्ञानिक तरीके से पशु-पालन और चारा उत्पादन प्रशिक्षण निश्चित ही पशु-पालकों को लाभ पहुँचायेगा।

गोकुल महोत्सव में पशु-पालकों को उन्नत पशु-पालन एवं प्रबंधन और स्टॉल फीडिंग की जानकारी भी दी जायेगी। शिविर में आने वाले रोगग्रस्त छोटे-बड़े पशु-पक्षियों को चिकित्सा सुविधा देने के साथ ही लघु शल्य-क्रिया के माध्यम से दूर होने वाली बीमारियों की शल्य-चिकित्सा भी की जायेगी। संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिये पशुओं को एचएस, बीक्यू, एफएमडी और रेबीज के टीके लगाये जायेंगे। शिविर में आने वाले छोटे-बड़े पशुओं का निरीक्षण कर निकृष्ट नस्ल वाले पशुओं का बधियाकरण किया जायेगा, ताकि उत्तम नस्ल के पशुओं की संख्या में इजाफा हो।

पशुओं का बाँझपन पशु-पालक के लिये बहुत बड़ी समस्या होता है। इसके कारण उसे दूध, बछड़े, चारे आदि के रूप में आर्थिक हानि होती है। समस्या के निदान के लिये शिविर में बाँझ पशुओं का उपचार भी किया जायेगा। पशु-पालकों को गर्मी के मौसम में चारे की कमी से निपटने के लिये साइलेज बनाने की जानकारी भी दी जायेगी।

पशु-पालन विभाग ने शिविरों के सफल संचालन के लिये संयुक्त संचालक से लेकर निम्नतम स्तर तक जिम्मेदारी तय कर दी है। उप संचालक ने अपने जिले के अमले के विभिन्न दल गठित कर उन्हें तिथिवार ग्राम आवंटित किये हैं। संबंधित गाँव को पूर्व से ही सूचित किया जा रहा है, ताकि बड़ी संख्या में लोग अपने पशुओं के साथ उपस्थित होकर शिविर का अधिक से अधिक फायदा उठा सकें। जिलों द्वारा महोत्सव में किये गये कार्यों की विकासखण्ड, शिविर और दिवसवार जानकारी एकत्रित कर संयुक्त संचालक पशु-चिकित्सा सेवाओं को भेजी जायेगी।

 
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