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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष

प्रदेश का औद्योगिक विकास फास्ट ट्रेक पर

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की स्थापना में प्रदेश देश में छठवें स्थान पर

भोपाल : गुरूवार, अक्टूबर 27, 2016, 21:43 IST
 

आज प्रदेश का औद्योगिक विकास फास्ट-ट्रेक पर है। उद्योग और निवेश को लेकर नई नीतियाँ बनाई गई हैं। प्रदेश सरकार ने स्व-रोजगार स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों को भी समझा है। सरकार अलग-अलग नीति बनाकर और प्रावधान कर उद्यमियों की राह आसान करने और सफल बनाने में पूरी गंभीरता के साथ प्रयासरत हैं। कम निवेश पर अधिक रोजगार का सृजन, हर हाथ को काम मिले इसी उद्देश्य से प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए इसी साल अप्रैल माह से अलग से 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम विभाग का गठन किया गया है। इसीका परिणाम है कि पिछले वित्त वर्ष में 48 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उघम पंजीकृत हो चुके हैं। यह गत वर्ष की तुलना में ढाई गुना से अधिक है। इस वित्त वर्ष में छह माह में ही तकरीबन 50 हजार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग स्थापित हुए। प्रदेश अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना के मामले में देश में छठवें स्थान पर आ गया है।

भारत सरकार के एम.एस.एम.ई. मंत्रालय की कलस्टर विकास योजना में प्रदेश के 15 औद्योगिक केन्द्र नादनटोला, जग्गाखेड़ी, निमरानी, नौगाँव, लमतरा, प्रतापपुरा, जडेरूआ, अमकुही, नेमावर, भुरकलखांपा, उमरिया-डुगेरिया, रेडीमेड गारमेंट पार्क गदईपुरा, कलस्टर ग्वालियर ऐपेरल, कलस्टर ग्राम विजैपुर इंदौर, फूड कलस्टर ग्राम बड़ौदी शिवपुरी, नमकीन कलस्टर ग्राम करमदी जिला रतलाम में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की स्थापना के लिए 133 करोड़ की परियोजना मंजूर हुई हैं। इनमें से 98 करोड़ 76 लाख के कार्य पूरे हो चुके हैं।

विश्व बैंक की ईज आँफ डूइंग बिजनेस स्टडी में वर्ष 2015 की रेकिंग में प्रदेश को 5 वाँ स्थान दिया गया है। ईज आँफ डूइंग बिजनेस में विभिन्न विभाग की 74 अनुमतियाँ/स्वीकृतियों को 'ऑनलाइन' किया गया है।

प्रदेश में तेज औ़द्योगिक विकास एवं युवा वर्ग को स्वावलम्बी बनाए जाने के मिशन के तहत युवा उद्यमियों के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर प्लान और प्ले सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए इन्क्यूबेशन एवं स्टार्ट-अप पालिसी 2016 लागू की गयी है। पालिसी में इन्‍क्यूबेशन की स्थापना के लिए पूँजी अनुदान, संचालन में सहायता, शत-प्रतिशत स्टाम्प और पंजीकरण शुल्क की छूट, इन्क्यूबेटर्स को सलाह के लिए सहायता की प्रतिपूर्ति तथा उनके द्वारा आयोजित स्टार्ट-अप प्रतियोगिता में प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया है। इन्क्यूबेटर्स में संचालित होने वाले उद्यमियों/स्टार्ट-अप के लिए ब्याज अनुदान, लीज रेंट अनुदान, पेटेंट, गुणवत्ता संवर्धन अनुदान एवं स्टार्ट-अप विपणन सहायता आदि का समावेश इस नीति में हैं।

सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों द्वारा उत्पादित 7000 से अधिक उत्पाद राज्य सरकार द्वारा खरीदे गये हैं। यह खरीदी 648 करोड़ रुपये की है। राज्य शासन के विभिन्न विभाग और उपक्रमों में उपयोग की जाने वाली 39 ऐसी वस्तुएँ चिन्हांकित की गयी हैं, जो सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों द्वारा उत्पादित की जाती हैं। इन वस्तुओं को एक अक्टूबर, 2015 से लघु उद्योग निगम के माध्यम से खरीदा जाना अनिवार्य किया गया है। इस तरह के 94 उत्पाद की दर अनुबंध ई-पोर्टल पर प्रदर्शित की गयी है। अभी तक 7,283 प्रदाय आदेश जारी किये जा चुके हैं। सूक्ष्म तथा लघु उद्यमियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की खरीदी के लिये पिछले वित्त वर्ष में 674 करोड़ 14 लाख रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 648 करोड़ 23 लाख रुपये का व्यवसाय किया जा चुका है।

राज्य शासन ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों से सामग्री क्रय करने के लिये भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम-2015 बनाया है। इसमें ऐसी वस्तुएँ, जो प्रदेश के सूक्ष्म एवं लघु उद्यम द्वारा उत्पादित की जाती हैं, को क्रय करने को प्राथमिकता दी जाती हैं। शासकीय विभाग में सामग्री खरीदने के लिये 'ऑनलाइन' प्रक्रिया शुरू की गयी है। इन वस्तुओं के लिये हर साल दर अनुबंध जारी किये जाते हैं। इसके लिये लघु उद्योग निगम के पोर्टल https//mpprocuement.com के जरिये निविदाएँ बुलायी जाती हैं। सक्षम इकाई इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा सकती हैं।

ई-कॉमर्स कम्पनियों के पोर्टल से विपणन

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के विकास में ई-कॉमर्स के महत्व को स्वीकार करते हुए ई-कॉमर्स कम्पनियों एवं एम.एस.एम.ई इकाइयों के बीच संवाद को बढ़ावा देने की अभिनव पहल की है। लघु उद्योग निगम द्वारा ख्याति प्राप्त ई-कॉमर्स के पोर्टल से मार्केट लिंकेज के माध्यम से विपणन की सुविधा दी जाने की योजना बनायी गयी है। योजना से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ई-कॉमर्स का उपयोग कर न्यूनतम संगठन एवं पूँजी निवेश के साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार के लिये अपने बाजार का विस्तार कर सकेंगे। प्रभावी ई-कॉमर्स सूक्ष्म, लघु, मध्यम इकाई को आगे बढ़ने और उसके उत्पादन की बिक्री के लिये एक साथ बाजार के अनेक स्तर तक पहुँचने में मदद करेगा।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के लिए मिलेंगी सुविधाएँ और रियायतें

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को अनेक सुविधाएँ और रियायतें दी गई हैं। एम.एस.एम.ई. सेक्टर में ब्याज अनुदान 5 प्रतिशत की दर से अधिकतम वार्षिक राशि रुपये 3 लाख से 5 लाख तक सात वर्ष के लिये मिलेगा। सूक्ष्म और लघु उद्योगों में स्थाई पूँजी निवेश (भूमि और रिहायशी इकाई को छोड़कर) पर 15 प्रतिशत अधिकतम राशि 15 लाख तक निवेश अनुदान और उद्योग स्थापना की तारीख से 5 वर्ष के लिए प्रवेश कर में छूट मिलेगी। मध्यम श्रेणी की इकाई को औद्योगिक परिसर तक बिजली, पानी तथा सड़क विकास में प्रत्येक मद में हुए खर्च का 50 प्रतिशत अधिकतम रुपये एक करोड़ की सहायता मिलेगी। एम.एस.एम.ई. सेक्टर में वस्त्र उद्योग इकाई को टेक्नॉलाजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम में अनुमोदित सयंत्र और मशीनरी में रुपये एक करोड़ तक पात्र निवेश का 10 प्रतिशत अनुदान और टर्म लोन पर उत्पादन की तारीख से पाँच वर्ष तक दो प्रतिशत के हिसाब से 5 करोड़ की सीमा तक ब्याज अनुदान की पात्रता होगी। ऐसी खाद्य प्र-संस्करण इकाई, जिसमें संयत्र और मशीनरी में न्यूनतम रुपये 50 लाख का निवेश हो, को अधिकतम 50 प्रतिशत या 5 वर्ष के लिए जो भी कम हो, मण्डी शुल्क में छूट मिलेगी। लघु एवं मध्यम उद्यमों को अपशिष्ट प्रबंधन में किये गये निवेश पर 50 प्रतिशत पूँजी अनुदान अधिकतम 25 लाख रुपये तक मिलेगा। नये एम.एस.एम.ई. उद्यमियों की सुविधा के लिए 100 करोड़ का वेंचर केपिटल फंड स्थापित किया गया है।

श्रम कानून में छूट

एम.एस.एम.ई. को बढ़ावा देने के लिए श्रम कानूनों को ज्यादा से ज्यादा सरल बनाया गया है। विभिन्न प्रकार के 60 कानून से घटाकर केवल एक रजिस्टर, 13 के स्थान पर 2 रिटर्न्स और सूक्ष्म उद्योगों को 9 श्रम कानून से छूट प्रदान की गई है।

एम.एस.एम.ई. सम्मेलन में मुख्यमंत्री की घोषणाएँ

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग इकाइयों को मार्गदर्शन एवं सहायता देने के लिये एमएसएमई फेसिटिलेशन सेल का गठन किया जाएगा। इसके जरिए एमएसएमई इकाइयों को शासन की नीतिओं पर मार्गदर्शन, सुविधा एक स्थान पर मिलेगी। यह सेल एक जनवरी, 2017 से प्रारम्भ होगा। इस सेल में 20 कंसलटेंट कार्य करेंगें। इन्हें बड़े जिलों में पदस्थ कर आस-पास के जिलों का दायित्व भी दिया जाएगा।

  • एमएसएमई इकाइयों के प्रोत्साहन के लिये शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाएँ एवं सहायताओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में शामिल किया जाएगा। इसके अंतर्गत पूँजी अनुदान, वेट प्रतिपूर्ति एवं प्रवेश कर छूट की कार्यवाही पूरी करने के लिये एक माह की समय-सीमा तय होगी।

  • इसके अलावा उद्योगों की आवश्यक अनुमतियों को भी लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में लाया जायेगा।

पाँच औद्योगिक प्रदर्शनी केन्द्र बनेंगे

प्रदेश के पाँच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में एक्जीबिशन सेंटर बनाये जायेंगे। इनमें गोविन्दपुरा भोपाल, रिछाई जबलपुर, पोलो ग्राउण्ड इंदौर,मेला ग्राउण्ड, ग्वालियर एवं सतना शामिल है।

निजी भूमि पर इकाई स्थापना की अनुमति की समय-सीमा तय

  • एमएसएमई इकाइयों द्वारा अपनी निजी भूमि पर औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करने के लिये डायवर्सन अंतर्गत रि-असेसमेंट आदेश एक माह में जारी होंगे। इसके वर्तमान प्रावधानों को लोक सेवा प्रबंधन अधिनियम के दायरे में लाया जायेगा ताकि एक निश्चित अवधि में एमएसएमई इकाइयों को लाभ प्राप्त हो सके।

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रति त्रैमास एमएसएमई की समस्या निराकरण/इज ऑफ डूइंग बिजनेस के सुझावों के लिए ओपन हाउस आयोजित होगा। इसमें औद्योगिक संघ और विभागों के सचिव साथ रहेंगे।

  • एमएसएमई विभाग की पृथक वेबसाइट बनाकर प्रारंभ कर दी गई।

  • प्रदेश के उद्यमियों को ऑनलाईन निःशुल्क उद्यमिता प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • निजी औद्योगिक पार्क की स्थापना के विकास में व्यय हुई राशि की प्रतिपूर्ति के लिए पार्क का क्षेत्रफल न्यूनतम 50 एकड़ के बजाय 10 एकड़ किया जायेगा।

 औद्योगिक भूमि आवंटन नियम में बदलाव

  • एमएसएमई इकाइयों को आवंटित की जाने वाली भूमि के क्षेत्रफल एवं भूमि के मूल्य में दी जा रही छूट के स्लेब में परिवर्तन कर भूमि के मूल्य पर अधिकतम छूट 90 से बढ़ाकर 95 प्रतिशत की गई है।

  • बीमार/बंद उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए 50 प्रतिशत तक की भूमि को बेचने की अनुमति दी जायेगी। ये सुविधाएँ एक अप्रैल 2015 के पूर्व बंद/बीमार इकाई के रूप में परिभाषित इकाइयों के लिए होगी।

  • एक अप्रैल, 2015 के पूर्व के पट्टाधारकों को पट्टे की शर्तों के अनुसार ही भू-भाटक प्रभावशील रहेंगे। इकाई के हस्तांतरण होने पर नवीन नियम प्रभावशील हो जायेंगे।

  • 30 वर्ष के लीजधारक को 15 वर्ष का भू-भाटक एकमुश्त जमा करने पर शेष 15 वर्ष के भू-भाटक से मुक्त रखा जाएगा।

  • लीजधारकों को 30 और 99 वर्ष की लीज अवधि का विकल्प दिया जाएगा।

  • औद्योगिक क्षेत्रों के संधारण के लिये औद्योगिक संगठनों को संधारण शुल्क के साथ जिम्मेदारी सौंपी जाएगी अर्थात जहाँ औद्योगिक संघ इच्छुक है वहाँ शासन द्वारा संधारण शुल्क वसूल नहीं किया जायेगा बल्कि औद्योगिक संघ द्वारा वसूल किया जाकर स्वयं अपने क्षेत्र का संधारण किया जाएगा।

  • औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक संघों को उनके कार्यालय के लिये जमीन आवंटित की जायेगी।

  • औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित भवन निर्माण का नियमितीकरण और पहले के शुल्क/प्रीमियम का सेटलमेंट करने के लिये वन टाईम सेटलमेंट की योजना लागू की जायेगी।

रशिया में छोटे और मझौले उद्योग के लिए निर्यात की संभावनाएँ बढ़ीं

प्रदेश के छोटे और मझौले उद्योगों में उत्पादित वस्तुओं की रशिया में निर्यात की संभावनाएँ और तकनीकी सहयोग का वातावरण बनाने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री श्री संजय सत्येन्द्र पाठक के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधि-मण्डल ने सितंबर माह में रशिया में हुए इण्डस्ट्रलियस्ट फेयर में भाग लिया। यह यात्रा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्योगों के जरिये लोगों को व्यापक पैमाने पर रोजगार उपलब्ध करवाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। यात्रा से प्रदेश की लघु उद्योग इकाइयों द्वारा उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के अवसर बढ़े हैं। इसके साथ ही इस क्षेत्र की विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा हुई। प्रदेश का एम.एस.एम.ई. निर्यात पोर्टल www.mpsume.in तैयार किया गया है। इसे विदेशों में 17 विभिन्न भाषाओं में देखा जा सकता है।

 
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