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मध्यप्रदेश - स्थापना दिवस पर विशेष

प्रदेश में सुरक्षित और सक्षम बना अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग

भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2016, 19:10 IST
 

समतामूलक समाज की स्थापना सरकार का लक्ष्य है। समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिये राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिये ठोस कदम उठाये हैं। मध्यप्रदेश में कमजोर वर्ग को आगे आने के कई अवसर पिछले 12 साल में मिले हैं। वे आज अपने को प्रदेश में न केवल सुरक्षित महसूस करते हैं, बल्कि सक्षम भी पाते हैं।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के सपने को साकार करने में जुटे हैं। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य की उन्हें बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में उनकी कोशिशें समाज के कमजोर वर्ग के जीवन में दिखाई दे रही हैं।

आदिवासी विकास विभाग प्रदेश के 89 आदिवासी विकासखंड में प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय-स्तर तक की शिक्षा का संचालन कर रहा हैं। इन संस्थाओं में कन्या शिक्षा परिसर, क्रीड़ा परिसर, आवासीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, उत्कृष्ट विद्यालय, आश्रम शालाएँ, प्री-मेट्रिक एवं पोस्ट-मेट्रिक छात्रावास तथा अंग्रेजी माध्यम की नई आश्रम शालाओं आदि का संचालन कर शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने का प्रयास निरन्तर जारी है।

विशेष पिछड़ी जन-जातियों के लिये संरक्षण-सह-विकास योजना संचालित हैं। इसमें उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, कृषि विकास तथा प्रशिक्षण एवं रोजगार की योजनाओं को प्राथमिकता से लिया गया हैं। बारहवीं पंचवर्षीय योजना वर्ष 2012-17 में विशेष रूप से राज्य शासन की नीति है कि आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार किया जाये, ताकि वे अन्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा में बराबरी कर सकें।

बीते वर्ष की उपलब्धियाँ

अनुसूचित जनजाति वर्ग के शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक उत्थान के लिए विभाग द्वारा आदिवासी बहुल जिलों के आदिवासी विकासखण्डों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा, कल्याण कार्यक्रम, सामुदायिक विकास, प्रशिक्षण एवं रोजगार की योजनाएँ शुरू की गयी हैं। इस वर्ग के बेरोजगार युवाओं को रोजगार/स्व-रोजगार के लिए योग्य बनाने के लिये विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षण देकर स्वावलम्बी बनाया जा रहा है। पिछले वित्त में 5,567 युवाओं को कौशल विकास योजना में लाभान्वित किया गया हैं।

अनुसूचित-जनजाति एवं अनुसूचित-जाति के विकास के लिये उनकी आबादी के मान से अधिक राशि राज्य आयोजना में प्रावधानित की जा रही हैं। वर्ष 2002-03 में 818 करोड़ 83 लाख की राशि आदिवासी उपयोजना में प्रावधानित की गई थी। वर्ष 2015-16 में यह राशि बढ़कर 8416 करोड़ 78 लाख हो गई हैं। इस प्रकार दस गुना से अधिक वृद्धि आदिवासी उपयोजना मद में की गई।

पिछले वित्त वर्ष में 20 नये प्री-मेट्रिक छात्रावासों को स्वीकृति दी गई। विभागीय छात्रावासों एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति की दरों को मूल्य सूचकांक से जोड़कर जुलाई 2015 से शिष्यवृत्ति की दरों में वृद्वि की गई है। बालकों के लिये 1000 एवं बालिकाओं के लिए 1040 रूपये शिष्यवृत्ति दी जा रही है। विभागीय 23 क्रीड़ा परिसरों में खिलाड़ी विद्यार्थियों के लिए शिष्यवृत्ति 100 रूपये प्रति दिवस प्रति खिलाड़ी निर्धारित की गई हैं।

पिछले एक वर्ष में विभाग द्वारा 26 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल में उन्नयन किया गया। महिला न्यून साक्षरता प्रतिशत वाले जिलों में विभाग द्वारा 20 नये कन्या शिक्षा परिसर स्वीकृत किए गए। इन परिसर में 245 बालिकाएँ कक्षा 6 से 12वीं तक शिक्षा और आवासीय सुविधा पूरी तरह से शासकीय व्यय पर प्राप्त करेंगी।

विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के माध्यम से कक्षा 1 से 12वीं तक के 28 लाख 35 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ दिया गया है।

विभाग द्वारा बालिकाओं को शिक्षा निरंतर रखने के लिए 10वीं उत्तीर्ण कर 11वीं में प्रवेश लेने पर प्रोत्साहन राशि एक किश्त में प्रतिवर्ष 15 अगस्त तक दी जा रही है। कक्षा 11वीं में 33 हजार बालिका को प्रोत्साहन राशि दी गई।

विशेष पिछड़ी जन-जाति के सभी आवासहीन परिवार को आवास उपलब्ध करवाए जाने की योजना क्रियान्वित की जा रही है। अनुसूचित-जनजाति की बस्तियों के विकास के लिए सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल सुविधा, विद्युतीकरण तथा सामुदायिक भवनों के निर्माण किये गये हैं।

विभाग द्वारा 30 छात्रावास भवन प्रति छात्रावास 127 लाख कुल राशि रूपये 4064 लाख, 20 आश्रम शाला भवन इकाई लागत रूपये 135 लाख कुल 2700 लाख, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवन इकाई लागत 143 लाख कुल 5720 लाख और 6 क्रीड़ा परिसर के लिये कुल लागत राशि रूपये 6996 लाख की स्वीकृति दी गई।

विविध जन-जातीय सम्मान श्रंखला में जन-जातियों के सामाजिक उत्थान में विशिष्ट काम करने वाले नागरिकों को विष्णु कुमार जन-जातीय समाज-सेवा सम्मान वर्ष 2011 में सर्वप्रथम दिया गया। इसके अतिरिक्त रानी दुर्गावती, वीर शाह-रघुनाथ शाह, ठक्कर बापा राष्ट्रीय सम्मान एवं जन-नायक टंट्या भील राष्ट्र-स्तरीय सम्मान स्थापित किये गये हैं।

चीफ मिनिस्टर कम्युनिटी लीडरशीप डेवलमेंट कार्यक्रम

भारत सरकार द्वारा विशेष केन्द्रीय सहायता में चीफ मिनिस्टर कम्युनिटी लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम की स्वीकृति दी गई है। प्रोग्राम में प्रदेश के सभी आदिवासी विकासखंड में निवासरत 18 से 45 वर्ष के 12वीं उत्तीर्ण व्यक्तियों, जिनमें 50 प्रतिशत महिलाएँ होंगी, को समाज में सक्रिय भागीदारी का प्रशिक्षण दिया जाना है। महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट द्वारा इसका पाठयक्रम तैयार किया गया है। विषय-विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा आदिवासी समुदायों की मुख्य समस्या शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पोषण, कृषि, पशुपालन एवं उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से संबंधित शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये आदिवासी समुदाय को प्रेरित एवं मार्गदर्शन दिया जायेगा। इस वित्त वर्ष में कार्यक्रम के लिये 14 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

नेतृत्व विकास शिविर

प्रतिवर्ष 23 से 28 जनवरी तक भोपाल में यह शिविर किया जाता है। इसमें प्रत्येक जिले में कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले एक-एक बालक-बालिका को आमंत्रित किया जाता है। विशेष पिछड़ी जनजाति के 10वीं बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले एक-एक विद्यार्थी को भी इस शिविर में शामिल किया जाता है। पिछले दो वर्ष में अनुसूचित-जनजाति के 51-51 बालक-बालिका एवं विशेष पिछड़ी जनजाति के 15-15 बालक-बालिका का चयन किया गया।

आवास भत्ता सहायता की छात्रगृह योजना

आदिम-जाति कल्याण विभाग द्वारा सितम्बर, 2013 से अनुसूचित-जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को निवास ग्राम से अन्य स्थान पर अध्यापन निरंतर रखने में वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण बाधा उत्पादन न हो इस उददेश्य से निवास ग्राम से अन्य ग्राम/शहर के महाविद्यालय में पोस्ट-मेट्रिक पाठ्यक्रम में नियमित अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिये आवास सहायता योजना स्वीकृत की गई है। योजना में राज्य के आदिवासी बालक-बालिकाओं को अपने गृह निवास से बाहर महाविद्यालयीन-स्तर से शिक्षा निरंतर रखने के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन नगर में 2000 रूपये प्रति विद्यार्थी तथा जिला मुख्यालय पर 1250 रूपये प्रति विद्यार्थी और तहसील/विकासखंड मुख्यालय पर 1000 रूपये प्रति विधार्थी प्रतिमाह की दर से आवास सहायता राशि दी जाती है।

पिछले वित्त वर्ष में इस योजना में लगभग 51 करोड़ के व्यय से 28 हजार से ज्यादा विद्यार्थी लाभान्वित किये गये। इस वर्ष योजना में 40 करोड़ 65 लाख का प्रावधान रखा गया है।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय

प्रदेश के 18 जिले झाबुआ, धार, बड़वानी, रतलाम, बैतूल, सिवनी, मंडला, डिण्डौरी, अनूपपुर, छिंदवाडा, सीधी, उमरिया, अलीराजपुर, खंडवा, शहडोल, बालाघाट, जबलपुर एवं होशंगाबाद में 25 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित है। चार एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पिछले वित्त वर्ष में स्वीकृत हुए हैं। झाबुआ एवं छिंदवाडा, अलीराजपुर एवं सतना जिले में दो-दो एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। वर्ष 2005-06 से इन विद्यालयों में सी.बी.एस.ई.पाठ्यक्रम लागू किया गया है। इन संस्थाओं में विद्यार्थियों को एकेडेमिक शिक्षा के साथ-साथ कम्प्यूटर शिक्षा, व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण, राष्ट्रीय महाविद्यालयों में जेईई एवं ऑल इंडिया पी.एम.टी. में प्रवेश के लिये निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध करवाई जाती हैं।

वर्ष 2010-11 में 8 नवीन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय- सोण्डवा जिला अलीराजपुर, मोरडुण्डिया जिला झाबुआ, रोशनी जिला खण्डवा, सोहागपुर जिला शहडोल, उकवा जिला बालाघाट, सिंगारदीप जिला छिन्दवाडा, नरईनाला जिला जबलपुर,. केसला जिला होशंगाबाद में शुरू किये गये। सत्र 2014-15 में चयन क्षेत्र आजाद नगर अलीराजपुर, सेंघवा बड़वानी, धार, मैहर, सतना एवं बुधनी जिला सीहोर में यह विद्यालय शुरू किये गये हैं। सत्र 2015-16 से विभागीय उपलब्ध भवनों में कक्षा 6वीं एवं 8वीं संचालित है। वर्ष 2015-16 में 5 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय मंडला, चित्रकूट, सतना, खरगोन एवं सिंगरौली में स्वीकृत किये गये हैं। इस विद्यालयों के भवन का निर्माण भी करवाया जा रहा है। चार विद्यालय पूर्ण हो गये हैं।

क्रीड़ा परिसर

अध्ययन के साथ-साथ आदिवासी बच्चों की खेल प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रदेश में 100 सीटर कुल 22 विभागीय क्रीड़ा परिसर संचालित हैं। इनमें से 17 बालकों के लिए तथा 5 बालिकाओं के लिए हैं। ये परिसर पूरी तौर से आवासीय हैं। प्रत्येक परिसर में प्रवेशित छात्रों को 100 रूपये प्रति दिवस शिष्यवृत्ति स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त वर्ष में एक बार स्पोर्टस किट के लिए 3000 रूपये स्वीकृत किए गए हैं। क्रीड़ा परिसरों का ध्येय प्रतिभावान खिलाड़ी छात्र/छात्राओं की खोज करना एवं उन्हें नियमित प्रशिक्षण देकर विभिन्न खेल विधाओं में राष्ट्रीय एवं अतंर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में शामिल करवाना हैं।

बालक क्रीड़ा परिसर धार के सरदारपुर, अलीराजपुर, खरगोन, इंदौर, खण्डवा के खालवा, बड़वानी, रतलाम के बाजना, बैतूल के शाहपुर, छिन्दवाड़ा के तामियां, सिवनी के कुरई, बालाघाट के बैहर, मंडला के कालपी, अनूपपुर के अमरकंटक, सीधी के चुरहट, शहडोल और श्योपुर में है। कन्या क्रीड़ा परिसर धार के डही, बड़वानी के निवाली, बैतूल, डिण्डोरी के शहपुरा, अनूपपुर के अमरकंटक और झाबुआ में है।

आदिवासी विद्यार्थियों की उपलब्धियाँ

आदिवासी विद्यार्थियों ने पिछले पाँच साल में 68 स्वर्ण, 48 रजत और 25 काँस्य राष्ट्रीय-पदक प्राप्त किये हैं। इसी प्रकार राज्य-स्तर पर 717 स्वर्ण, 547 रजत और 458 काँस्य-पदक हासिल किये हैं।

राष्ट्रीय-स्तर पर प्रथम पुरस्कार 21 हजार, द्वितीय 15 हजार, तृतीय 11 हजार और सहभागिता पर 4000 रुपये प्रतिभागियों को मिलते हैं। राज्य-स्तर पर प्रथम आने पर 7000, द्वितीय पर 5000 और तृतीय स्थान प्राप्त करने पर 3000 रुपये से प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाता है।

पिछले वर्ष एक नवीन कन्या क्रीड़ा परिसर झाबुआ में खोला गया हैं। इस वर्ष विभिन्न क्रीड़ा प्रतियोगिता में 2300 खिलाड़ियों द्वारा भागीदारी की गई। इस वर्ष योजना में करीब 17 करोड़ रुपये का प्रावधान हैं।

आवासीय संस्थाएँ

दूरस्थ अंचलों में आदिवासी विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये बालक तथा बालिकाओं के लिए 1348 प्री-मेट्रिक तथा 130 पोस्ट-मेट्रिक छात्रावास एवं 1046 आश्रम संचालित किये जा रहे हैं। इस वर्ष 20 प्री-मेट्रिक छात्रावास, 20 पोस्ट-मेट्रिक छात्रावास और 10 आश्रम खोलने का लक्ष्य रखा गया हैं।

अनूसूचित-जनजाति छात्रावास-आश्रम के सुचारु संचालन के लिये स्थानीय-स्तर पर छात्रावास/आश्रम-पालक समिति का गठन किया गया हैं। समिति देखती है कि छात्रावास/आश्रम निवासरत विद्यार्थियों के लिये व्यक्तिगत उपयोग में आने वाली सामग्री, जिसकी आयु सीमा से 5 वर्ष तक निर्धारित है, की राशि पालक/विधार्थी के व्यक्तिगत खाते में जमा की जाती हैं। इससे सामग्री का क्रय विधार्थी एवं पालक द्वारा स्वयं किया जा रहा हैं। छात्रावास/आश्रमों के संचालन के लिये उपयोग में आने वाली अन्य सामग्री, जिनकी सीमा 5 वर्ष से अधिक है, की राशि छात्रावास/आश्रम-पालक समिति के अध्यक्ष छात्रावास/आश्रम अधीक्षक के संयुक्त खाते में जमा की जाएगी। जिला कलेक्टर के साथ पर्यवेक्षण पालक समिति द्वारा क्रय की कार्यवाही की जा रही हैं।

विज्ञान एवं सामूहिक विषयों में प्रवेश के लिये प्रोत्साहन योजना

कक्षा 10वीं उत्तीर्ण जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं के विज्ञान संकाय में प्रवेश लेने पर 2000 रूपये प्रोत्साहन राशि तथा कक्षा 12वीं उत्तीर्ण कर बी.एस.सी. भौतिक, रसायन, गणित, जीव विज्ञान में प्रवेश लेने पर 3000 रूपये की प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान है।

इस योजना में 3 करोड़ से अधिक के व्यय से 16 हजार 500 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया। इस वर्ष योजना में 460 लाख का प्रावधान हैं।

 
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