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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष

मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में

भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2016, 19:18 IST
 

मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने सड़क, पानी, बिजली और अन्य अधोसंरचना के कार्यों पर पिछले एक दशक में प्राथमिकता के साथ काम किया है। आज इन क्षेत्रों में हासिल की गई उपलब्धि साफ तौर पर देखने को मिलती है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिये स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल कर ठोस प्रयास किये हैं। स्कूलों में शिक्षा से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शालाओं में शौचालय के निर्माण कार्य को भी एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में लिया गया है। शत-प्रतिशत स्कूलों में बिजली हो, इसके लिये मुख्यमंत्री शाला ज्योति योजना प्रारंभ की गई है। इस पर करीब 356 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे।

'स्कूल चलें हम' अभियान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का मानना है कि प्रदेश का प्रत्येक बच्चा स्कूल पहुँचें और मध्यप्रदेश की पहचान देशभर में शिक्षित प्रदेश के रूप में हो। इस बात को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी प्रदेश भर में 'स्कूल चलें हम'' अभियान चलाया गया। हर बस्ती-बसाहट में स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों की मदद से शिक्षा ज्योति जलाने के प्रयास किये गये। हर मोहल्ले में 'पढ़े न कोई 12वीं से कम', 'मेरे प्रदेश का हर बच्चा स्कूल जायें', 'पढ़े और आगे बढ़े' जैसे नारों का सामूहिक उदघोष किया गया।

स्कूल शिक्षा का परिदृश्य

प्रदेश में 88 हजार 432 प्राथमिक शाला, 52 हजार 388 माध्यमिक शाला, 7,813 हाई स्कूल और 8,086 हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इस प्रकार प्रदेश में कक्षा-1 से 12 तक एक लाख 56 हजार 719 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इस वित्त वर्ष में 100 माध्यमिक शाला का हाई स्कूल के रूप में और 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल के रूप में उन्नयन किया गया। राज्य में 139 सरकारी स्कूल में बाउण्ड्री-वॉल निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है। प्रदेश में इस वर्ष 3 संभागीय मुख्यालय पर 100 सीटर दिव्यांग छात्रावास भवन तैयार करवाये जा रहे हैं। इन पर करीब 6 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि खर्च की जायेगी। इसके अलावा एक करोड़ 60 लाख की लागत से 2 संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय भवन शहडोल और नर्मदापुरम होशंगाबाद में तैयार करवाये जा रहे हैं। जिलों में स्कूल शिक्षा की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिये नवीन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन श्योपुर, नीमच, सागर, बुरहानपुर और हरदा में मंजूर किये गये हैं।

परीक्षा परिणाम में सुधार

हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल के परीक्षा परिणाम में भी सुधार हुआ है। इस वर्ष हायर सेकेण्डरी स्कूल का परीक्षा परिणाम 73.94 प्रतिशत और हाई स्कूल का परीक्षा परिणाम 57.32 प्रतिशत रहा है। इस वर्ष प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षा में सामूहिक नकल का कोई भी प्रकरण नहीं बना। प्रदेश में फर्जी अंक सूची पर रोक लगाने के लिये मंडल की अंक सूची को क्यूआर कोड किया गया है। बोर्ड की परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे विद्यार्थियों में निराशा को दूर करने के लिये ओपन स्कूल बोर्ड द्वारा 'रूक जाना नहीं' योजना शुरू की गई है। इसका मकसद बोर्ड की कक्षा 10 एवं 12वीं परीक्षा में अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उत्तीर्ण होने का मौका देना है। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे एक लाख 73 हजार छात्रों को परीक्षा में दोबारा शामिल होने का मौका दिया गया। इनमें कक्षा 12 में 25 हजार और कक्षा 10 में 24 हजार छात्रों ने सफलता हासिल की।

विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाएँ

राज्य में स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को कई तरह की सुविधाएँ दी जा रही हैं। कक्षा 9 में सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएँ, जिनके गाँव में शासकीय हाई स्कूल नहीं है, उन्हें 2400 रुपये के मान से साइकिल उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना का लाभ करीब 5 लाख छात्र-छात्राओं को मिलेगा। सरकारी स्कूल के कक्षा 9 से 12 तक के सभी छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध करवाई गई हैं। राज्य सरकार ने इसके लिये विभागीय बजट में 72 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। स्कूल शिक्षा विभाग में समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत समेकित छात्रवृत्ति योजना भी लागू की गई है। इस योजना के जरिये छात्रवृत्ति की प्रक्रिया को सरल किया गया है। योजना में आठ विभाग की 30 प्रकार की छात्रवृत्ति को शामिल किया गया है। कक्षा 1 से 12 तक के अध्ययनरत विद्यार्थियों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की गई है। अब छात्रवृत्ति समग्र शिक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकृत कर विद्यार्थियों के खातों में भुगतान की जा रही है। इस शिक्षा सत्र में एक करोड़ 39 लाख विद्यार्थी का नामांकन कर अब तक करीब 80 लाख विद्यार्थी की ऑनलाइन छात्रवृत्ति स्वीकृत की जा चुकी है।

प्रतिभावान विद्यार्थियों को लेपटॉप

कक्षा-12 में माध्यमिक शिक्षा मण्डल की परीक्षा में मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिये लेपटॉप दिये जाने की योजना भी शुरू की गई है। कक्षा 12वीं में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिये 85 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों को 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लेपटॉप खरीदने के लिये प्रति छात्र 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी गई है। वर्ष 2015-16 में करीब 18 हजार मेधावी विद्यार्थियों को यह राशि दी गई।

-गवर्नेंस

स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षा से जुड़ी सेवाओं में सुधार के लिये ई-गवर्नेंस को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिये एम मोबाइल एप को सम्पूर्ण प्रदेश में लागू किया गया है। एप में उपस्थिति के अलावा सभी शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की पे-स्लिप, शिकायत निवारण, विभागीय निर्देश, शाला निरीक्षण रिपोर्ट, शाला को विभिन्न मदों में प्राप्त राशि की जानकारी, छात्रों का स्कालरशिप स्टेटस, अवकाश आवेदन, उपस्थिति रिपोर्ट के अलावा जीपीएफ रिकार्ड को भी शामिल किया गया है। करीब 3 लाख 50 हजार शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारियों के मोबाइल नम्बर एजुकेशन पोर्टल पर अपलोड किये गये हैं। विभागीय गतिविधियों की जानकारी के लिये एजुकेशन पोर्टल राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र के माध्यम से तैयार किया गया है। पोर्टल का उपयोग प्रशासनिक व्यवस्था के लिये किया जा रहा है। विभाग में जारी होने वाले सर्कुलरों को नियमित रूप से इस पोर्टल पर अपलोड किये जाने की व्यवस्था है।

सुपर 100 योजना

प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली बच्चे राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थानों में प्रवेश ले सके, इसके लिये भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय और इंदौर के शासकीय मल्हाराश्रम विद्यालय में सुपर 100 योजना लागू की गई है। योजना में प्रत्येक जिले के कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में सर्वोच्च अंक लेने वाले 2-2 छात्र-छात्राओं को चयनित किये जाने का प्रावधान है। पिछले सत्र में 29 छात्र जे.ई. एडवांस, 36 छात्र एन.आई.टी. और 23 छात्र सी.पी.टी. में पास हुए हैं।

 
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