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मध्यप्रदेश - स्थापना दिवस पर विशेष

दिव्यांगों को कौशल विकास से आत्म-निर्भर बनाने की सार्थक पहल

भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 28, 2016, 21:09 IST
 

प्रदेश के दृष्टि-बाधित, श्रवण-बाधित और नि:शक्तजनों के कल्याण और विकासोन्मुखी बनाने के लिये कौशल विकास से आत्म-निर्भर बनाने की सार्थक पहल की जा रही है। इनके लिये कई नयी योजना संचालित की जा रही हैं। दृष्टि-बाधित और श्रवण-बाधित, जो शिक्षारत हैं, को अपने पैरों पर खड़े होने के लिये प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिये विशेष अभियान चलाये जा रहे हैं। उन्हें शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से आत्म-निर्भर बनाया जा रहा है।

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में प्रवेश

श्रवण-बाधिक एवं दृष्टि-बाधित दिव्यांगों के लिये व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये एक विशेष अभियान प्रदेश में चलाया गया। प्रदेश के सात संभागीय मुख्यालय स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक सत्र 2016-17 में दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रवेश लेने का सुनहरा मौका मिला। विशेष बात यह है कि श्रवण-बाधित एवं दृष्टि-बाधित प्रवेशार्थियों को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नि:शुल्क प्रवेश देने का निर्णय लिया गया। प्रवेशार्थियों को हर माह दो हजार रुपये के मान से शिष्यवृत्ति दी जा रही है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 'ऑनलाइन प्रक्रिया'' रखी गयी। ऐसे अभ्यर्थी जो इस प्रक्रिया में आवेदन नहीं कर सकते, उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर प्रदान किया गया। प्रवेश प्रक्रिया मे भाग लेने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों की सुविधा की दृष्टि से उन्हें आने-जाने का व्यय दिया जाता है।

प्रदेश में शत-प्रतिशत श्रवण-बाधित दिव्यांगों के लिये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, ग्वालियर में फिटर, वेल्डर, महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में ड्रेस मेकिंग, उज्जैन में इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, इंदौर में फैशल डिजाइन टेक्नालॉजी, भोपाल में फिटर, वेल्डर, सागर में फिटर, मेकेनिक डीजल, वेल्डर, रीवा में वेल्डर और महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान रीवा में फैशन डिजाइन टेक्नालॉजी ट्रेड में 21-21 सीट निर्धारित है। इसके साथ ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान अपंग इंदौर में कम्प्यूटर ऑपरेटर एण्ड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, कारपेंटर ट्रेड में 26-26 और जबलपुर में टर्नर ट्रेड में 16 सीट निर्धारित हैं।

शत-प्रतिशत श्रवण-बाधित के लिये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर और रीवा में कम्प्यूटर ऑपरेटर एण्ड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड में 26-26 सीट निर्धारित की गयी हैं। इसके साथ ही कौशल विकास विभाग द्वारा 25 जुलाई तक शत-प्रतिशत श्रवण-बाधित एवं दृष्टि-बाधित अभ्यर्थियों द्वारा प्रवेश के बाद रिक्त सीटों पर ऐसी आवेदकों को प्रवेश देने का भी निर्णय लिया, जो शत-प्रतिशत नि:शक्तता की श्रेणी में नहीं आते हैं। उनके प्रवेश की कार्रवाई कॉलेज लेवल काउंसलिंग के माध्यम से किये जाने का भी निर्णय लिया गया है।

प्रदेश के श्रवण-बाधित एवं दृष्टि-बाधित विद्यार्थियों के शिक्षण, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश के लिये प्रदेश के सात संभागीय मुख्यालय के शैक्षणिक सत्र 2016-17 में 178 दृष्टि-बाधित तथा 230 श्रवण-बाधितों को, इस प्रकार कुल 408 नि:शक्तजन को विभिन्न संकाय में प्रवेश दिलाया गया। इन नि:शक्तजनों को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिल सके, इसके लिये प्रदेश के सात संभागीय मुख्यालय स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में श्रवण-बाधितों के लिये 12 इन्टरप्रेटर्स की नियुक्ति की गयी। वर्तमान में यह इन्टरप्रेटर्स श्रवण-बाधितों को बेहतर ढंग से विभिन्न संकाय के अंतर्गत शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के श्रवण-बाधित एवं दृष्टि-बाधित विद्यार्थियों के शिक्षण, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के लिये 973 लाख 88 हजार का बजट औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उपलब्ध करवाया गया है। वर्तमान में नि:शक्तजन विभिन्न संकाय में प्रवेश लेकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

डी/एड/पी.जी.डी.सी.ए/डी.सी.ए. में प्रवेश प्रक्रिया

नि:शक्तजनों को बेहतर से बेहतर उच्च शिक्षा के लिये शासन द्वारा शैक्षणिक सत्र 2016-17 में 99 दृष्टि-बाधित, 31 श्रवण-बाधित एवं 487 अस्थि-बाधित, इस प्रकार कुल 617 नि:शक्तजन को डी.एड. में प्रवेश दिलाया गया।

शासकीय राजकीय प्रौढ़, मूक-बधिर प्रशिक्षण संस्थान, इंदौर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2016-17 में 31 दिव्यांग को भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पीजीडीसीए/डीसीए कोर्स में प्रवेश दिलाया गया।

निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना लागू

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दृष्टि-बाधित, श्रवण-बाधित, अस्थि-बाधित, कुष्ठ रोगी एवं मानसिक रूप से अविकसित नि:शक्तजन के स्वास्थ्य एवं जीवन-स्तर में सुधार लाने के लिये निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना प्रारंभ की गयी है।

बीमा योजना का लाभ पति-पत्नी सहित दो बच्चों को प्रदान किया जाता है। बीमित नि:शक्तजनों को बीमा प्रीमियम की 10 प्रतिशत राशि वार्षिक, शेष राशि 355 रुपये स्वयं देना होगी, जबकि शेष राशि सामाजिक न्याय विभाग द्वारा तथा सर्विस टेक्स भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। बीमा योजनाओं के लिये शर्त रखी गयी है कि नि:शक्तजन के परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिये एवं बीमित व्यक्ति की उम्र 18 से 35 साल के मध्य होना जरूरी है।

योजना में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मेन्टल रिटार्डेशन, मल्टीपल डिसेऐबिलिटी के नि:शक्तजनों के लिये बीमा योजनाएँ संचालित हैं। इसमें एक लाख रुपये के बीमा की सुविधा दी गयी है। बीमा योजनाओं में अभी तक प्रदेश के 55 हजार 731 बहु-विकलांग निशक्तजनों को निरामय स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करवाये गये हैं। योजना के प्रीमियम की राशि 2 करोड़ 3 लाख राज्य निराश्रित-निधि से एकमुश्त राष्ट्रीय न्यास, भारत सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को उपलब्ध करवायी गयी है।

कृत्रिम अंग/उपकरण वितरण

ऐसे नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा-42 में नि:शक्त अव्यक्तियों को सहायक यंत्र और उपकरण उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। यह उन दिव्यांग को वितरित किये जायेंगे, जिनकी 40 प्रतिशत या उससे अधिक नि:शक्तता हो। दिव्यांगों को कृत्रिम अंग उपकरण वितरित करने के लिये पिछले वित्त वर्ष में 45 जिलों में 162 सामान्य तथा 10 मेगा शिविर लगाये गये। इन शिविरों में 24 हजार 33 दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग/उपकरण दिये गये।

कौशल उन्नयन

दिव्यांगों के कौशल उन्नयन के लिये भारत सरकार में एम्पेनल्ड 23 संस्थाओं में से 19 संस्थाओं के प्रस्ताव शासन को प्रेषित किये गये हैं। शेष संस्थाओं के निरीक्षण का कार्य अभी प्रचलन में है। इन 19 संस्थाओं ने अपने प्रस्ताव विभाग को उपलब्ध करा दिये हैं। ये संस्थाएँ लगभग 1500 दिव्यांगों को प्रशिक्षित करेंगी।

छात्रवृत्ति योजना

दिव्यांगों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने में कोई वित्तीय आवश्यकता की कमी न रह जाए, इस उद्देश्य से भारत सरकार द्वरा दिव्यांगों के लिये प्री-मेट्रिक/पोस्ट मेट्रिक/टॉप क्लास छात्रवृत्ति योजना प्रारंभ की गई है। इस छात्रवृत्ति का लाभ देने के लिये भारत सरकार द्वारा प्री-मेट्रिक 2664, पोस्ट मेट्रिक 965 एवं टॉप क्लास-9 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस तारतम्य में प्रदेश में लगभग 15000 दिव्यांगों के ऑनलाईन आवेदन भरवाने का लक्ष्य रखा गया है। सितम्बर माह के प्रारंभ तक 1031 दिव्यांगों ने अपने आवेदन ऑनलाइन किये हैं।

प्रतियोगी परीक्षा हेतु नि:शुल्क कोचिंग

दिव्यांगों के कौशल विकास के उन्नयन के लिये प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के लिये शासकीय राजकीय प्रौढ़ मूक-बधिर प्रशिक्षण संस्थान, इंदौर द्वारा विवेकानंद कोचिंग संस्थान के माध्यम से पिछले वित्त वर्ष से सभी श्रेणी के दिव्यांगों को नि:शुल्क कोचिंग दिलाई जा रही है। बैंकिंग, रेलवे, शिक्षक आदि प्रतियोगी परीक्षा में दिव्यांग के चयन के लिये कोचिंग दी जा रही है। इस वर्ष 39 दिव्यांगों को कोचिंग दी जा चुकी हैं।

दिव्यांगों के लिये सिपडा

नि:शक्त व्यक्ति अधिनियम के कार्यान्वयन के लिये सार्वजनिक भवनों, सचिवालयों, विश्वविद्यालय आदि में बाधारहित सृजित किये जाने के लिये राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। इसमें दिव्यांगों के लिये रेम्प, लिफ्ट, व्हीलचेयर, टायलेट्स का निर्माण, ब्रेल साईन, सिग्नल, फ्लोरिंग, टाईल्स का निर्माण, दृष्टिहीन के लिये क्रासिंग का उत्कीर्णन का निशान बनाने आदि को शामिल किया गया है। योजना के क्रियान्वयन के लिये पिछले वित्त वर्ष में 9 प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गये। इसमें से 210.19 लाख की राशि स्वीकृत की गई।

 
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