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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष

खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने की जिद और जुनून - श्री गौरीशंकर बिसेन

भोपाल : शनिवार, अक्टूबर 29, 2016, 18:43 IST
 

खेती-किसानी के लिए सरकार की कोशिशों ने मध्यप्रदेश में एक नया इतिहास लिखा है। एक समय था जब गाँव में रहना और खेती करना किसानों के लिए दूभर था। दस वर्ष में इन हालातों में क्रांतिकारी बदलाव हुआ है। मध्यप्रदेश देश में कृषि के मामले में न केवल चर्चित हुआ बल्कि प्रयासों से मिले परिणामों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कृषि कर्मण अवार्ड से एक, दो बार नहीं बल्कि चार बार नवाज़ा गया। प्रदेश की ही नहीं देश की अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली खेती-किसानी में बदलाव लाना और किसानों के लिए हितकारी बनाना आसान नहीं था।

ग्यारह वर्ष इसके लिए बहुत ज्यादा भी नहीं थे। पर दृढ़ इच्छा शक्ति थी प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान में। किसान होने के नाते उन्होंने किसान के दर्द को भोगा है। उन्हें एहसास था की कितना कठिन है कृषि करना। इसलिए उनकी यह जिद जुनून में बदल गई खेती को लाभ का व्यवसाय बनाकर रहेंगे। उन्होंने इस दिशा में पिछले ग्यारह वर्ष में जो फैसले लिए वो 60 साल में कभी नहीं लिए गए। यही कारण है कि आज प्रदेश में कृषि की तस्वीर ही बदल गई है।

मैं भी खेती-किसानी से जुड़ा हूँ। सौभाग्य से मुख्यमंत्री ने इसी से जुड़े महकमे में काम करने का अवसर दिया। खेती के लिए सबसे जरूरी था कि सिंचाई सुविधा बढ़े, समय पर पर्याप्त बिजली और किसानों को खेती करने के लिए कम ब्याज दर पर ऋण मिले। उन पर संकट आए तो सरकार उनकी न केवल हमदर्द रहे बल्कि उनकी क्षति की पूर्ति करे। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान इन सभी बिन्दु पर खरे साबित हुए। उन्होंने शुरू से इसी दिशा में काम किया। आज प्रदेश में सिंचाई क्षमता 36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पहुँच चुकी है, जो पहले मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर तक ही सीमित थी। वर्ष 2018 तक इसे 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने का लक्ष्य है। सिर्फ कृषि के लिए दस घंटे बिजली मिले यह सुनिश्चित किया गया, पहले बिजली के हालात क्या थे यह सब जानते हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत की दर पर ब्याज दिया गया। जो पहले 12 से 18 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलता था। यह प्रदेश के इतिहास में कृषि क्षेत्र में एक नए कीर्तिमान की शुरूआत भर है। इसके बाद लक्ष्य है किसान की आय दोगुना करने का जिसका रोडमेप बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। सरकार के अथक प्रयासों से कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन की शुरूआत हुई है।

विश्व में सर्वाधिक कृषि विकास दर

पिछला दशक कृषि क्षेत्र को मिली प्राथमिकता का गवाह है। वर्ष 2014-15 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 24.99 प्रतिशत की विकास दर इस क्षेत्र के विकास के लिए किए गए अभूतपूर्व प्रयासों का परिणाम रही। यह दर न केवल देश में बल्कि पूरे विश्व में सर्वाधिक आँकी गई। प्रदेश में कुल कृषि उत्पादन में 110 प्रतिशत तथा कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 124 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। वर्षवार देखें तो वर्ष 2004-05 में कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 1.43 करोड़ मीट्रिक टन था। वर्ष 2014-15 में यह बढ़कर 3.21 करोड़ मीट्रिक टन हो गया।

उल्लेखनीय है कि 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से एक दशक तक वृद्धि प्राप्त करना देश में अप्रत्याशित घटना है। गेहूँ उत्पादन में हम चौथे स्थान से दूसरे स्थान पर, धान में 14वें स्थान से 7वें स्थान पर और मक्का उत्पादन में छठवें स्थान से पाँचवें स्थान पर आ गए हैं। यही नहीं वर्ष 2004-05 में दलहन फसलों का उत्पादन मात्र 33 लाख 51 हजार मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2014-15 में लाख बढ़कर 47 लाख 63 हजार मीट्रिक टन हो गया। एक दशक में यह वृद्धि 42.14 प्रतिशत आँकी गयी। मध्यप्रदेश आज देश में कुल दलहन उत्पादन का 28 प्रतिशत उत्पादित करता है। आज हमारे प्रदेश में प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता 61 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति दिवस हो गयी है। यही नहीं कृषि क्षेत्र में भी 34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की वृद्धि हुई। आज हमारे प्रदेश का कुल कृषि क्षेत्र बढ़कर 2 करोड़ 23 लाख हेक्टेयर हो गया है।

फसल उत्पादन में नये कीर्तिमान

फसलों की बोवाई में अभूतपूर्व कीर्तिमान लगातार स्थापित हो रहे हैं। खरीफ-2004 में सोयाबीन का रकबा 45 लाख 94 हजार हेक्टेयर था, जो वर्ष 2013 में बढ़कर 61 लाख 34 हजार हेक्टेयर हो गया। वहीं धान का रकबा वर्ष 2004 में 16 लाख 96 हजार हेक्टेयर था, जो वर्ष 2013 में 19 लाख 30 हजार हेक्टेयर हो गया। खरीफ की अन्य प्रमुख फसलें भी वर्ष 2004 की तुलना में लगातार विस्तृत क्षेत्रफल में बोयी जा रही हैं। रबी की बोवाई में भी विगत दस वर्ष में तेजी से प्रगति हुई है। वर्ष 2004 में जहाँ गेहूँ की बोवाई का रकबा 42 लाख हेक्टेयर था, वह 2013-14 में 59 लाख 76 हजार हेक्टेयर तक पहुँच गया है। इसी प्रकार चना 26 लाख 93 हजार से बढ़कर वर्ष 2004 की तुलना में वर्ष 2013-14 में 31 लाख 60 हजार हेक्टेयर में बोया गया। रबी 2013-14 के परिणामों के अनुसार गेहूँ का उत्पादन 155 लाख 23 हजार मीट्रिक टन हुआ, जो वर्ष 2004-05 में हुए उत्पादन 73 लाख 27 हजार मीट्रिक टन से लगभग 81.96 लाख मीट्रिक टन अधिक है। अर्थात दो गुना से अधिक उत्पादन वृद्धि हुई। खरीफ-2013 में धान का उत्पादन 53 लाख 61 हजार मीट्रिक टन रहा, जो वर्ष 2004-05 के उत्पादन 13 लाख 09 हजार की तुलना में 40 लाख 52 हजार मीट्रिक टन अधिक है। यह वृद्धि लगभग चार गुना है।

गन्ना उत्पादन और शकर निर्माण में अभूतपूर्व वृद्धि

प्रदेश में वर्ष 2013-14 में गन्ना उत्पादन के साथ-साथ प्रदेश की शकर मिलों द्वारा अभूतपूर्व शकर निर्माण किया गया है। इस वर्ष 34 लाख 98 हजार मीट्रिक टन गन्ना पैरकर 34 हजार 43 हजार क्विंटल शकर उत्पादन किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत अधिक है।

हम अव्वल हैं!

कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने के सुचिंतित प्रयासों से आज हम देश में कई फसलों के उत्पादन में अव्वल हैं। जैसे कृषि विकास दर, जैविक क्षेत्र, कुल दलहन -तिलहन उत्पादन, प्रमाणित बीज उत्पादन, चना-सोयाबीन उत्पादन, निजी कस्टम हायरिंग-सेंटर की स्थापना, लहसुन-अमरूद और औषधि एवं सुगंधित फसलों, धनिया-मटर और प्याज उत्पादन में प्रथम और कुल खाद्यान्न उत्पादन, गेहूँ उत्पादन, सरसों उत्पादन, मसूर उत्पादन में देश में द्वितीय है प्रदेश।

छोटी जोत के लघु किसानों को गहरी जुताई के लिये प्रोत्साहित करने के लिये प्रदेश में 'हलधर' योजना की शुरूआत का किसानों ने उत्साहपूर्ण स्वागत किया है। हजारों किसान अब तक इस अनुदान योजना का लाभ ले चुके हैं।

कृषि यंत्रों का प्रचलन बढ़ाकर समय, पूँजी और श्रम की बचत के उद्देश्य से हाल में ही यंत्रदूत ग्राम योजना 139 ग्राम में शुरू की गयी है। बेरोजगार युवकों को यंत्र सुधारने के लिये प्रशिक्षण तथा आर्थिक सहायता देकर गाँव में ही वर्कशॉप स्थापित की जायेगी। किसानों को बहुपयोगी किन्तु महँगे कृषि यंत्र अब उनके नजदीकी क्षेत्र में ही मिल सकें, इसके लिये 1137 कस्टम हायरिंग-केन्द्र शुरू किये गये हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण शिक्षित युवकों को 10 लाख रुपये सीमा तक ऋण, अनुदान सहित उपलब्ध कर उद्यमिता का विकास करना और स्थानीय-स्तर पर कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना है। प्रदेश के 1000 ग्राम को बलराम ग्राम के रूप में चयनित किया जाकर आदर्श कृषि ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2013-14 में मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा के अतिरिक्त मुख्यमंत्री खेत-तीर्थ योजना तथा मेरा खेत-मेरी माटी योजना शुरू की गयी है।

जैविक खेती

जैविक खेती का प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। वर्ष 2006-07 में जैविक कृषि का क्षेत्रफल मात्र एक लाख 60 हजार हेक्टेयर था। वर्तमान में यह 17 लाख 58 हजार हेक्टेयर है। जैविक खेती के क्षेत्रफल में 10 गुना वृद्धि कर मध्यप्रदेश देश की कुल जैविक खेती का 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करने वाला राज्य बन गया है। आज प्रदेश के 16 जिले के 32 विकासखण्ड में जैविक खेती की जा रही है। जैविक खेती विकास परिषद का गठन किया गया है।

देश में बीज प्रमाणीकरण में भी प्रदेश अग्रणी है। वर्ष 2004-05 में 14 लाख 49 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज से आज प्रदेश में 31 लाख क्विंटल तक बीज पैदा किया जा रहा है। वर्ष 2005-06 में 26 लाख 62 हजार किसानों के पास क्रेडिट कार्ड थे। वर्ष 2015-16 में 52 लाख 62 हजार किसानों को क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये हैं।

समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015-16 में 39 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूँ समर्थन मूल्य पर खरीदा गया। इसके लिये किसानों को 6200 करोड़ का भुगतान किया गया। वर्ष 2004-05 में समर्थन मूल्य पर मात्र 4 लाख 6 हजार मीट्रिक टन गेहूँ खरीदा गया था।

कृषि महोत्सव जैसी अभिनव पहल हुई है। इस आयोजन में प्रदेश के सभी विकासखण्डों में विभिन्न विभागों द्वारा विशेष शिविर, कृषि संगोष्ठी, किसान मेले तथा राज्य-स्तरीय मेला, प्रदर्शनी और संगोष्ठी की गयी। कृषि की नई आधुनिक तकनीकों से किसानों को परिचित करवाने एवं कृषि संबंधी समस्याओं के त्वरित निराकरण का उद्देश्य इस महोत्सव से पूरा हो रहा है।

खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक

प्रदेश स्तर पर किसान कॉल-सेंटर की शुरूआत वर्ष 2008 से की गयी। देश में यह अनूठा प्रयोग पहली बार किसी राज्य द्वारा किया गया। किसान कॉल-सेंट के टोल-फ्री दूरभाष क्रमांक-18002334433 पर प्रतिदिन लगभग 500 से अधिक प्रश्न दूरभाष के माध्यम से किसानों द्वारा पूछे गये। प्रादेशिक किसान कॉल-सेंटर को राष्ट्रीय-स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

किसान-वाणी रेडियो

सिरोंज जिला विदिशा में प्रदेश के प्रथम सामुदायिक रेडियो-केन्द्र किसान-वाणी की स्थापना की गयी। इस केन्द्र से स्थानीय भाषा में किसानों को कृषि एवं सम्बद्ध विभागों की जानकारी दी जाती है, उन्नत खेती तकनीक पर विशेषज्ञों की वार्ता का प्रसारण होता है। मनोरंजन के कार्यक्रम और स्थानीय समाचार भी प्रसारित किये जाते हैं।

कृषि में इलेक्ट्रॉनिक तकनीकी के नये प्रयोग के तहत किसानों को नई तकनीकी जानकारी देने के लिये हिन्दी में देश की पहली वेबसाइट www.mpkrishi.org की शुरूआत की गई। प्रदेश के सभी 313 विकासखंड में कृषि ज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को इंटरनेट द्वारा उन्नत आधुनिक तकनीकों की जानकारी नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। खेती को और अधिक उन्नत बनाने के उद्देश्य से विदेशी अनुसंधानकर्ता 'जायका' तथा 'समिट' के साथ समझौता हुआ है।

किसानों को सभी सुविधाएँ उपलब्ध करवाने का संकल्प निभाया

अनुसूचित-जाति एवं अनुसूचित-जनजाति कृषकों को 90 प्रतिशत अनुदान पर संकर मक्का बीज कार्यक्रम-कमजोर वर्गों के आर्थिक विकास की दिशा में एक ठोस कदम है। इस कार्यक्रम में वर्ष 2013-14 में 30 हजार संकर मक्का बीज अनुदान पर किसानों को उपलब्ध करवाया गया। कृषकों के बैंक खाते में शासकीय अनुदान का सीधा भुगतान करने का निर्णय लिया गया। अनुदान पर दिये जाने वाले कृषि यंत्रों को सीधे बाजार से खरीदने की छूट दी गई है। इन वर्गों के कृषकों के लिये नल-कूप खनन एवं पम्प स्थापना पर दिया जाने वाला अनुदान 25 हजार से बढ़ाकर 40 हजार किया गया है। सामान्य जाति के कृषकों को भी नल-कूप योजना का लाभ दिया गया। हलधर योजना के माध्यम से पड़त भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिये प्रति हेक्टेयर अनुदान 1000 से बढ़ाकर 1500 रूपये किया गया। एसआरआई धान की बोवाई को प्रोत्साहित करने के लिये 20 हजार कोनोवीडर तथा 10 हजार मार्कर 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाये गये।

सूखे एवं जल-भराव की स्थिति से निपटने के लिये रिज-फरो विधि अपनाई गई है। अब तक 50 हजार रिज-फरो अटेचमेंट 90 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को वितरित किये गये हैं। उन्नत एवं प्रमाणित किस्म के बीज की उपलब्धता बढ़ाने के लिये 2313 बीज उत्पादक सहकारिता समिति स्थापित की गयी हैं। यह देश में सर्वाधिक है। हलधर योजना में ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई के लिये किसानों को अनुदान देकर प्रेरित किया गया। वर्ष 2013-14 में ढाई लाख हेक्टेयर में गहरी जुताई हुई।

विदेश भ्रमण पर प्रदेश के किसान

किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से परिचित करवाने के लिए उन्हें विदेश अध्ययन यात्रा करवायी गयी। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलेण्ड, फिलीपीन्स, ताइवान, ब्राजील और अर्जेन्टीना में हमारे प्रदेश के किसान कृषि की उन्नत तकनीक सीखकर आये हैं। यही नहीं प्रदेश में या देश में कहीं भी नये तरीके की जा रही खेती देखने के लिये खेत तीर्थ-दर्शन योजना शुरू की गयी है।

कृषि केबिनेट

देश में पहली पहल थी कि प्रदेश में कृषि केबिनेट का गठन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किया गया। इसमें लगभग 11 विभाग की गतिविधियों को चिन्हित कर निर्णय लिये जाते हैं।

लघु और सीमांत किसानों के लिये योजना

ग्रामीण परिवेश में कृषि कार्यों को सुगम बनाने एवं गौ-वंश को संरक्षित करने के लिये लघु-सीमांत किसानों को बैलगाड़ी क्रय करने पर अनुदान देने की योजना वर्ष 2007-08 से प्रारंभ की गयी।

क्षतिपूर्ति आकलन के लिये इकाई पटवारी हल्का की गयी

किसानों को अधिक से अधिक लाभान्वित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में क्षतिपूर्ति के आकलन के लिये इकाई तहसील के स्थान पर खरीफ-2006 से धान, सिंचित धान, असिंचित सोयाबीन, तुअर एवं रबी 2006-07 से गेहूँ सिंचित, असिंचित, चना, राई, सरसों के लिये पटवारी हल्का की गयी। इसका सर्वाधिक श्रेय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तिगत प्रयासों को जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार और सम्मानों ने प्रदेश को गौरवान्वित किया

कुल खाद्यान्न उत्पादन में भारत सरकार का प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार चौथी बार मध्यप्रदेश को मिला है। इस श्रेणी में चार बार पुरस्कार प्राप्त करने वाला प्रदेश देश का पहला राज्य है। वर्ष 2014 के लिये कुल खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश को यह पुरस्कार मिला। इससे पहले वर्ष 2011-12 और 2012-13 में भी प्रदेश को यह पुरस्कार मिल चुका है। वर्ष 2013-14 में प्रदेश को यह पुरस्कार गेहूँ उत्पादन के क्षेत्र में मिला था। इस तरह लगातार चार वर्ष से यह पुरस्कार प्राप्त करने वाला भी मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।

मध्यप्रदेश में वर्ष 2014-15 में 3 करोड़ 20 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ। वर्ष 2013-14 में यह 2 करोड़ 80 लाख मीट्रिक टन था। फलस्वरूप प्रदेश को मुख्य श्रेणी में इस बार भारत सरकार से चौथे वर्ष लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ।

कृषि कर्मण अवार्ड 2011-12 के लिये प्रदेश के दो उन्नतशील किसान श्री गंभीर सिंह, विकासखण्ड सिवनी मालवा, जिला होशंगाबाद तथा श्रीमती राधा बाई दुबे, विकासखण्ड बेगमगंज, जिला रायसेन को तथा कृषि कर्मण अवार्ड 2012-13 के लिये श्रीमती शशि खण्डेलवाल बड़नगर जिला उज्जैन को भी महामहिम राष्ट्रपति द्वारा एक-एक लाख रुपये की नगद राशि से सम्मानित किया गया।

उच्चतम कृषि विकास दर प्राप्त करने पर 15 दिसम्बर, 2012 को महामहिम राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी द्वारा प्रदेश को सम्मानित किया गया। उन्नत कृषि पद्धति तथा फार्म यांत्रिकी द्वारा उत्पादन वृद्धि के लिये 18 सितम्बर, 2012 को कोलकाता में मध्यप्रदेश को यह सम्मान मिला। विगत तीन वर्ष में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिये सुविख्यात विशेषज्ञों की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ कृषि राज्य श्रेणी में 'एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड'' 19 सितम्बर, 2012 को दिया गया।

नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में 17 नवम्बर, 2013 को मध्यप्रदेश मण्डप में विभागीय स्टॉल को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।

राष्ट्रीय-स्तर पर आयोजित मेलों में प्रदर्शित तकनीक का किसानों को अवलोकन करवाने के उद्देश्य से गांधी नगर (गुजरात) समिट, में आत्मा योजना में पुरस्कृत 200 किसान शामिल हुए। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इनमें से प्रत्येक जिले के एक-एक किसान, कुल 50 किसान को, 51 हजार रुपये देकर समानित किया।

प्रदेश के 400 किसान 16-19 फरवरी, 2014 को मोहाली में 'पंजाब समिट' में, 5600 किसान 9 से 13 फरवरी, 2014 को 'कृषि बसन्त मेला' नागपुर में तथा कई प्रगतिशील किसान आईसीएआर मेला, पूसा नई दिल्ली में राष्ट्रीय-स्तर के मेलों एवं प्रदर्शनियों में सम्मानित हुए।

 
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